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क्या एक बार फिर से द्रविड़ की कोचिंग हार्दिक पांड्या की गाड़ी को ट्रैक पर वापस ला सकती है?

Mon, 12 Jul 2021 06:14 PM IST
Vimal Kumar विमल कुमार
Updated Mon, 12 Jul 2021 06:14 PM IST
सार

मौजूदा टीम इंडिया के कप्तान और कोच को ये बखूबी पता है कि अगला कपिल देव तो दूर की बात मौजूदा पांड्या भी उन्हें अगले कुछ सालों के लिए मिल जाए तो टीम की बल्ले-बल्ले हो सकती है।

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Can Rahul Dravid coaching help hardik pandya for getting back to form
हार्दिक पांड्या - फोटो : ट्विटर

विस्तार

टीम इंडिया के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की कपिल देव से तुलना करना हमेशा से ही ज्यादती थी। बेहतर ये होता कि पांड्या को पहले अपने ही शहर वड़ोदरा के ऑलराउंडर इरफान पठान से खुद को बेहतर साबित करने दिया जाता और उसके बाद उनसे बड़ी उम्मीदें पाली जातीं। लेकिन, भारतीय क्रिकेट का ये दुर्भाग्य है कि किसी भी उभरते हुए ऑलराउंडर में हम सबसे पहले अगले कपिल देव को ढूंढने लगते हैं, ठीक उसी तरह से जैसे कि इंग्लैंड कई सालों तक हर उभरते हुए हरफनमौला खिलाड़ी में इयन बॉथम को तलाशने की नाकाम कोशिश करता रहा। एंड्रयू फ्लिंटॉफ भले ही बॉथम जैसे अनोखे खिलाड़ी नहीं थे लेकिन बुरे भी नहीं थे। आज इंग्लैंड के पास बेन स्टोक्स है जो शायद फिलंटॉफ से बेहतर हैं। मजेदार बात ये है कि पाकिस्तान ने कभी भी अगला इमरान खान या फिर न्यूजूीलैंड ने अगले रिचर्ड हैडली की तलाश में बहुत वक्त नहीं गंवाया जो कपिल और बॉथम के समकालीन थे। 

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हार्दिक पांड्या - फोटो : cricketcomau

मौजूदा टीम इंडिया के कप्तान और कोच को ये बखूबी पता है कि अगला कपिल देव तो दूर की बात मौजूदा पांड्या भी उन्हें अगले कुछ सालों के लिए मिल जाए तो टीम की बल्ले-बल्ले हो सकती है। एक ऑलराउंडर के तौर पर पांड्या जो संतुलन अपनी टीम को देते हैं उसका विकल्प रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन जैसे स्पिन ऑलराउंडर भी नहीं हैं। और ना ही विकेटकीपर बल्लेबाज वाले युवा ऑलराउंडर ऋषभ पंत। वैसे पांड्या ना तो कपिल देव की तरह आए और छा गए और ना ही पठान की तरह लंबे समय तक लगातार हर फॉर्मेट में सक्रिय रहे। पांड्या को पिछले आईपीएल से ही गेंदबाजी करने से बचाया जा रहा था ताकि वो इस साल इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में खेल सकें। लेकिन, ऐसा हो नहीं पाया। पांड्या की फिटनेस को देखते हुए टेस्ट मैचों में हर रोज करीब पंद्रह ओवर डालना उनके बस की बात नहीं। ऐसे में अब हर किसी का ध्यान सफेद गेंद की क्रिकेट में पांड्या को पूराने ऑलराउंडर की तरह खेलते देखने की है। 

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हार्दिक पांड्या - फोटो : ट्विटर

गेंदबाज के तौर पर पांड्या ने 55 मैचों में अब तक 55 विकेट लिए हैं और उनका इकॉनोमी रेट 5.56 का रहा है। टी-20 अंतरराष्ट्रीय में भी पांड्या ने अब तक 41 विकेट 44 पारियों में 19.5 की स्ट्राइक रेट और 8.17 की इकॉनमी रेट से झटके हैं। ये आंकड़े इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं कि पांड्या में एक गेंदबाज के तौर पर भी ऑलराउंडर वाली काबिलियत है। मतलब ये कि टीम को जरुरत पड़े तो विकेट लेने वाले आक्रामक गेंदबाज जो बड़ी साझेदारियों को तोड़ सकता है वाली भूमिका निभा सकतें है तो साथ ही कसी हुई गेंदबाजी करते हुए विरोधियों के रन बहाव पर भी रोक लगा सकते हैं। ऐसा हर गेंदबाज के बूते मुमकिन नहीं है। 
 

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Hardik Pandya - फोटो : social Media

लेकिन, ये सब पूराने वक्त की बात दिखती है। सितंबर 2018 में एशिया कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ पीठ की चोट उभरी और उसके बाद से वो भारतीय टीम में इन एंड आउट होते रहे। तब से लेकर अब तक वो भारत के लिए सिर्फ 18 वन-डे खेले जबकि टीम इंडिया ने कुल 49 मैच खेले। और तो और, अपनी आईपीएल फ्रैंचाइजी मुंबई इंडियंस के लिए पांड्या ने 2021 और 2020 IPL में एक भी गेंद नहीं फेंकी। इस साल 2021 में सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर टीम में खेलने वाले हार्दिक पर उम्मीदों का दबाव साफ साफ दिखा। वो 52 रन ही बना पाए 7 मैचों में और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी 118 का ही रहा।

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हार्दिक पांड्या - फोटो : twitter@hardikpandya7

ये आंकड़े दिखातें है कि पांड्या के लिए श्रीलंका के खिलाफ आने वाली वन-डे और टी20 सीरीज बहुत ज़्यादा मायने रखती है। अच्छी बात ये कि इस समय एक बार फिर से कोच के तौर पर उनको भविष्य की राह दिखाने के लिए राहुल द्रविड़ टीम के साथ हैं। ये वही द्रविड़ हैं जिन्होंने 2016 में इंडिया ए के लिए खेलने वाले पांड्या को फिर से उनका हुनर वापस ढूंढने में अहम भूमिका निभायी थी। पांड्या उस दौरे पर टीम इंडिया से बाहर होने के बाद भेजे गए थे। ऐसे में दिलचस्प सवाल यही है कि क्या एक बार फिर से द्रविड़ को कोचिंग पांड्या की गाड़ी को ट्रैक पर वापस ला सकती है? अगर ऐसा होता है तो आने वाले दो वर्ल्ड कप के लिए पांड्या के तौर पर ऑलराउंडर का टीम इंडिया में होना विराट कोहली के लिए काफी राहत की बात होगी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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