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अध्यक्ष पद पर बैठकर BCCI के खिलाफ काम कर रहे शशांक: अनुराग ठाकुर
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 10 Sep 2016 10:44 PM IST
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अनुराग ठाकुर
- फोटो : getty
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बीसीसीआई और आईसीसी के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर नोएडा में कहा कि शशांक मनोहर बीसीसीआई के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने शशांक मनोहर पर आरोप लगाया कि उन्होंने बीसीसीआई को उस वक्त छोड़ा जब बीसीसीआई को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।
पिछले कुछ समय से बीसीसीआई और आईसीसी के बीच इंग्लैंड में 2017 में आयोजित होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन के लिए आवंटित की गई राशि के लिए तनातनी चल रही है। बीसीसीआई ने आरोप लगाया कि उसे टी-20 विश्व कप में तीन गुना ज्यादा मैचों के आयोजन के लिए एक तिहाई राशि मिली। इसके बाद द्विस्तरीय टेस्ट मैचों के प्रस्ताव को आईसीसी को बीसीसीआई के विरोध के कारण वापस लेना पड़ा।
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पिछले कुछ समय से बीसीसीआई और आईसीसी के बीच इंग्लैंड में 2017 में आयोजित होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन के लिए आवंटित की गई राशि के लिए तनातनी चल रही है। बीसीसीआई ने आरोप लगाया कि उसे टी-20 विश्व कप में तीन गुना ज्यादा मैचों के आयोजन के लिए एक तिहाई राशि मिली। इसके बाद द्विस्तरीय टेस्ट मैचों के प्रस्ताव को आईसीसी को बीसीसीआई के विरोध के कारण वापस लेना पड़ा।
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शशांक मनोहर
- फोटो : getty
अनुराग ठाकुर का दावा है, लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के कारण ही आईसीसी आंखें दिखा रही है। दुनियाभर के जो देश कल तक हमारी बात सुनकर नीतियां बनाते थे, आज वे कह रहे हैं कि भारतीय बोर्ड तो तबाह हो गया है। अब उनकी क्यों सुनें? और ये सब तब हो रहा है जब आईसीसी के चेयरमैन भारतीय ही हैं।
लोढा समिति की सिफारिशों की ओर संकेत देते हुए उन्होंने कहा, जब श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में बाहरी हस्तक्षेप हुआ तो आईसीसी ने चिंता जताई लेकिन, जब बीसीसीआई में हस्तक्षेप हुआ तो आईसीसी चुप रहा। स्वदेश और आईसीसी में हमें खुलकर काम करने की स्वतंत्रता नहीं है।
कल शशांक मनोहर ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता आईसीसी है न कि बीसीसीआई का। मुझे विभिन्न देशों के बोर्ड डायरेक्टर्स ने चुना है। जब मैं बीसीसीआई का अध्यक्ष था तब मेरी प्राथमिकता बीसीसीआई थी। आज मैं आईसीसी का स्वतंत्र अध्यक्ष हूं और मुझे आईसीसी के हितों का ख्याल रखना है। आईसीसी में बीसीसीआई के हितों का ख्याल रखना बीसीसीआई के प्रतिनिधि की जिम्मेदारी है न कि मेरी।
लोढा समिति की सिफारिशों की ओर संकेत देते हुए उन्होंने कहा, जब श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में बाहरी हस्तक्षेप हुआ तो आईसीसी ने चिंता जताई लेकिन, जब बीसीसीआई में हस्तक्षेप हुआ तो आईसीसी चुप रहा। स्वदेश और आईसीसी में हमें खुलकर काम करने की स्वतंत्रता नहीं है।
कल शशांक मनोहर ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता आईसीसी है न कि बीसीसीआई का। मुझे विभिन्न देशों के बोर्ड डायरेक्टर्स ने चुना है। जब मैं बीसीसीआई का अध्यक्ष था तब मेरी प्राथमिकता बीसीसीआई थी। आज मैं आईसीसी का स्वतंत्र अध्यक्ष हूं और मुझे आईसीसी के हितों का ख्याल रखना है। आईसीसी में बीसीसीआई के हितों का ख्याल रखना बीसीसीआई के प्रतिनिधि की जिम्मेदारी है न कि मेरी।
बीसीसीआई
- फोटो : getty
बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ निशाना साधते हुए नाराज ठाकुर ने संवाददाताओं से कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं आईसीसी चेयरमैन के बयान से नाराज हूं या नहीं। लेकिन अध्यक्ष के रूप में मुझे सभी को यह बताने की जरूरत है कि मेरे बोर्ड के समस्य क्या महसूस करते हैं।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि मनोहर बीसीसीआई के समर्थन से क्रिकेट जगत में सुरक्षित जगह ढूंढ रहे थे। उन्होंने कहा, लोगों को समझना होगा कि जब आईसीसी का संविधान बदला गया (बिग थ्री को खत्म करना) तो मनोहर बीसीसीआई अध्यक्ष थे। उन्हें सदस्यों को विश्वास में लेना चाहिए था। लेकिन तब वह क्रिकेट जगत में अपने लिए जगह ढूंढ रहे थे। बीसीसीआई आईसीसी के 105 सदस्यों में से एक है और ठाकुर ने कहा कि बीसीसीआई का उद्देश्य कमजोर क्रिकेट देशों के साथ खड़े रहना है। ठाकुर ने कहा, यह हमारी जिम्मेदारी है कि जिंबाब्वे, श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ खड़े रहें। हम प्रत्येक उस देश के साथ खड़े रहना चाहते हैं जो अच्छा करना चाहता है।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि मनोहर बीसीसीआई के समर्थन से क्रिकेट जगत में सुरक्षित जगह ढूंढ रहे थे। उन्होंने कहा, लोगों को समझना होगा कि जब आईसीसी का संविधान बदला गया (बिग थ्री को खत्म करना) तो मनोहर बीसीसीआई अध्यक्ष थे। उन्हें सदस्यों को विश्वास में लेना चाहिए था। लेकिन तब वह क्रिकेट जगत में अपने लिए जगह ढूंढ रहे थे। बीसीसीआई आईसीसी के 105 सदस्यों में से एक है और ठाकुर ने कहा कि बीसीसीआई का उद्देश्य कमजोर क्रिकेट देशों के साथ खड़े रहना है। ठाकुर ने कहा, यह हमारी जिम्मेदारी है कि जिंबाब्वे, श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ खड़े रहें। हम प्रत्येक उस देश के साथ खड़े रहना चाहते हैं जो अच्छा करना चाहता है।