फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Why not clean chit for Bibhishhan

आरोपों से कब बरी होंगे विभीषण

Tue, 15 Oct 2013 06:26 PM IST
मनु पंवार
मनु पंवार Updated Tue, 15 Oct 2013 06:26 PM IST
विज्ञापन
Why not clean chit for Bibhishhan

रामलीलाएं निपट चुकी हैं। रावण के वध के बाद विभीषण ने नए लंकापति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। यह बात अलग है कि उन पर रावण की गोपनीयता लीक करने का इल्जाम लग गया। लेकिन लंका ढहाने का दोष सिर्फ विभीषण के मत्थे ही क्यों मढ़ा गया? वह शूर्पणखा कुसूरवार क्यों नहीं, जिन्होंने लंका के सर्वनाश की बुनियाद रखी? दोष तो रावण का भी है, जिन्होंने वक्त पर अपनी बहन के हाथ पीले नहीं किए। रावण ने भाई होने का फर्ज तो नहीं ही निभाया, उल्टे वह राम-लक्ष्मण से बदला लेने निकल पड़े। रावण चूंकि शासक थे, इसलिए उनके समर्थकों ने उन्हें दोष न देकर विभीषण को बलि का बकरा बना लिया। इतिहासकारों ने भी उन्हें ही घर के भेदी के रूप में बदनाम कर दिया। विभीषण आज तक उस दाग से नहीं उबर पाए हैं।

विज्ञापन


लेकिन लंका ढहाने का दोष सिर्फ विभीषण पर क्यों? तब के विपक्ष को भी क्रेडिट मिलना चाहिए। उन दिनों विपक्ष में रामचंद्र जी, सुग्रीव और उनकी वानर सेना थी। लंका ढहाने का क्रेडिट हनुमान को क्यों न मिले, जिन्होंने अपनी जलती पूंछ से लंका जला डाली थी? बलवा करने की धाराओं में लंका की पुलिस ने उन्हें धर भी लिया था।
विज्ञापन


लंका ढहाने का जिम्मेदार कोई उन जामवंत को क्यों नहीं ठहराता, जिनके उकसावे पर हनुमान लंका में रेकी करने घुस गए थे। अपने काम का क्रेडिट न मिल पाने का गुस्सा जामवंत को आज तक है। इसीलिए उनके वंशज मौका मिलने पर इंसानों को काटने को दौड़ते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लंका ढहाने का क्रेडिट अंगद को भी जाना चाहिए, जिनके पैर ने रावण की सत्ता के पैर उखाड़ने में अहम भूमिका निभाई। क्रेडिट उन नल-नील का भी बनता है, जिन्होंने समुद्र पर पुल बांधने का टेंडर उठाया। कितना रिस्की काम था वह! पुल में जरा भी खोट निकलता, तो दोनों की नौकरी चली जाती। उन्होंने ऐसा मजबूत पुल बांधा कि रामचंद्र जी समेत पूरी वानर सेना लंका में दाखिल हो गई। आज के ठेकेदार निर्माण कार्य में इतनी ईमानदारी कहां बरतते हैं? जितना रेत, बजरी, सीमेंट, सरिया पुल के लिए जरूरी है, उतने में तो वे पुल के साथ पीडब्ल्यूडी के उस अधिशासी अभियंता का बंगला भी बना डालते हैं, जिसने उन्हें ठेका दिलाया है।

लंका ढहाने के जिम्मेदार इतने सारे हैं, फिर भी बदनामी अकेले विभीषण झेल रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed