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आप भी ऐसा कर सकते हैं तो कभी भी मौत आपको नहीं डराएगी
रा.श्री.
Updated Fri, 12 Jun 2015 04:31 PM IST
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परमात्मा के भक्ति साम्राज्य में निवास करने वाले संत सदा अभय होते हैं। वे किसी से भी नहीं डरते। यह घटना सोलह सौ वर्ष पहले की है, मिस्र के प्रसिद्ध संत हिलोरियो के पूर्वाश्रम की। बचपन से ही संतों के चरणों में उनकी श्रद्धा थी। वह संत एंटोनी की प्रसिद्धि से आकृष्ट होकर उनसे मरुस्थल में मिलने गए थे।
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वहां उनके पास उन्होंने दो महीने का वक्त बिताया। घर लौटने पर उन्हें अपने माता-पिता की मृत्यु का समाचार मिला। इस समय उनकी अवस्था केवल पंद्रह वर्ष की थी। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति रिश्तेदारों और गरीबों में बांट दी और स्वयं भगवान का भजन करने के लिए निकल पड़े।
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उन्होंने मरुस्थल में रहने का निश्चय किया, जो समुद्र तट से थोड़ी दूर स्थित था और झाड़-झंखाड़ों से घिरा होने के कारण भयानक दिख रहा था। मित्रों ने सावधान किया कि वह स्थान लूटपाट और मार-काट के लिए कुख्यात है, दिन-दहाड़े डाकू सारी वस्तुएं छीनकर मार डालते हैं।
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हिलोरियो ने मरुस्थल के लिए प्रस्थान करते हुए कहा, मुझे भगवान पर भरोसा है। संसार में मैं किसी से नहीं डरता।
रास्ते में कुछ अपरिचित व्यक्तियों ने संत से पूछा, यदि आप पर कोई मरुस्थल में हमला कर दे, तो आप क्या करेंगे? हिलोरियो ने उत्तर दिया, गरीब और भूखे-नंगे रहने वाले लोग किसी से नहीं डरते हैं।
उन लोगों ने फिर कहा, लेकिन वे आपको जान से मार सकते हैं। हिलोरियो ने कहा, हां, यह सच है। यही कारण है कि मैं उनसे नहीं डरता। मैं मरने के लिए हमेशा प्रस्तुत हूं। संत हिलोरियो की निर्भयता ने उन व्यक्तियों को आश्चर्यचकित कर दिया। वे वास्तव में मरुस्थल के डाकू ही थे, जो वेष बदलकर संत हिलोरियो की परीक्षा लेने आए थे।