धूप आने दो: हम अतीत की यात्रा में रहते हैं, टाइम मशीन की परिकल्पना में है विरोधाभास
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विस्तार
क्या आपको मालूम है कि हम हर रात अतीत की यात्रा कर सकते हैं। प्रकाश की गति बहुत तेज है। लेकिन, ब्रह्मांड में चीजें हमसे इतनी दूर हैं कि दूर के तारों और ग्रहों से प्रकाश को हम तक पहुंचने में लंबा समय लगता है। सूर्य से जो प्रकाश आता हमें दिखाई देता है, वह वास्तव में आठ मिनट और बीस सेकंड पहले सूर्य को छोड़ चुका होता है। मतलब यह है कि सूर्य को हम वैसे देखते हैं, जैसा वह आठ मिनट और बीस सेकंड पहले था। हमारी आकाशगंगा (गैलेक्सी) मिल्की वे से निकटतम कैनिस मेजर ड्वार्फ आकाशगंगा है, जो 25 हजार प्रकाश वर्ष दूर है। इसका मतलब यह है कि प्रकाश को वहां से हम तक पहुंचने में 25 हजार वर्ष लगेंगे। इसका मतलब हुआ कि आज जब हम टेलिस्कोप की मदद से कैनिस मेजर ड्वार्फ आकाशगंगा को देखते हैं, तो वह हमें वैसी दिखाई देती है, जैसी वह 25 हजार साल पहले थी। सवाल यह है कि अगर उस आकाश गंगा में कोई है, जो पृथ्वी को देख रहा हो, तो क्या उसे महाभारत या रामायण या उससे भी पहले की पृथ्वी दिख रही होगी?
समय के बारे में हमारी आधुनिक समझ भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत और कार्य-कारण संबंधों पर आधारित है। आइंस्टीन का सिद्धांत 100 से ज्यादा वर्षों से अस्तित्व में है और यह माना जाता है कि यह हमारे ब्रह्मांड की संरचना का सटीक विवरण देता है। दशकों से भौतिक विज्ञानी सापेक्षता के सिद्धांत के जरिये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वाकई समय की यात्रा संभव है। दिक्कत यह है कि सापेक्षता के सिद्धांत की मदद से आप ऐसे समीकरण लिख सकते हैं, जो समय की यात्रा का वर्णन करते हों, लेकिन इनका कोई अर्थ नहीं रह जाता अगर वास्तविक दुनिया में इनके जैसा कुछ न हो। सापेक्षता सिद्धांत के आधार पर समय यात्रा की बात सोचने में दो दिक्कते हैं। पहली, टाइम मशीन बनाने के लिए हमें नकारात्मक ऊर्जा की जरूरत होगी, जबकि अपने रोजमर्रा के जीवन में हमें जो भी ऊर्जा दिखती है, वह सकारात्मक ऊर्जा है।
क्वांटम भौतिकी बताती है कि ऐसा नकारात्मक ऊर्जा वाला पदार्थ सैद्धांतिक तौर पर पैदा किया जा सकता है, वह भी थोड़े समय के लिए और थोड़ी मात्रा में। क्वाटंम सिद्धांत की यही सीमा है। समय-यात्रा के साथ दूसरी दिक्कत यह है कि इस विचार में विरोधाभास छिपे हैं। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति की हत्या हो चुकी हो और आप अतीत में जाकर उस व्यक्ति की हत्या रोक दें। फिर, जब आप वर्तमान में लौटेंगे, तब वह व्यक्ति जिंदा होगा या नहीं। अगर वह जिंदा होगा, तब अतीत की यात्रा से पहले जिस वर्तमान के आप गवाह रहे थे, उसका क्या? एक दूसरा उदाहरण देखिए। अगर मैं टाइम मशीन में प्रवेश करता हूं और इसके जरिये मैं समय में पांच मिनट पहले जाने के लिए कमांड देता हूं । जब मैं पांच मिनट अतीत में पहुंचता हूं, तो मशीन को नष्ट कर देता हूं। तो पांच मिनट बाद मैं इसका इस्तेमाल कैसे करूंगा?
जब हम समय के बारे में सोचते हैं, तब हम सोचते हैं कि यह एक सीधी रेखा में चल रहा है, जिसमें एक के बाद एक चीजें घटित होती हैं। अगर हम अतीत में जाकर जो पहले हुआ उसे बदल सकें, तो हम समय की पंक्ति का क्रम बदल देंगे। इसका मतलब होगा कारण-कार्य के नियम का टूटना। मान लीजिए, आप गिरे और आपका हाथ टूट गया। तो, गिरना कारण और हाथ टूटना उसका प्रभाव यानी परिणाम हुआ। ब्रह्मांड की हर क्रिया इस कार्य-कारण नियम से बंधी है।
इसी विरोधाभास से निपटने के लिए विज्ञान कथाओं में समय यात्रियों को अतीत में महत्वपूर्ण बदलाव न करने और अतीत में खुद से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन असल जिंदगी में यह विरोधाभास केवल सैद्धांतिक है, यह वास्तविक हो ही नहीं सकता। इसी विरोधाभास के चलते सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के मुताबिक समय यात्रा संभव ही नहीं है।
समय यात्रा के इन विरोधाभासों को बदलने का एक प्रयास भौतिक विज्ञानी इगोर दिमित्रीविच नोविकोव ने किया था, जो कहते हैं कि मनुष्य अतीत की यात्रा कर सकता है, लेकिन उसे बदल नहीं सकता। आप पूछ सकते हैं कि अगर अतीत को बदला नहीं जा सकता, तो समय यात्रा का कोई मतलब नहीं निकलता। तो, क्या समय यात्रा की बहस का यहीं अंत मान लिया जाए? शायद नहीं। नोविकोव के अनुसार इस विरोधाभास का अंत तभी मुमकिन है, जब समानांतर समय रेखाएं हों । यह विचार बेहद सरल है। जब आप टाइम मशीन से बाहर निकलें, तो आप एक अलग टाइम लाइन में हों, जहां आप कुछ भी कर सकते हों। आप चाहें तो टाइम मशीन को ध्वस्त भी कर सकते हों। चूंकि जिस मूल टाइम लाइन से आप आए हैं, उसमें मौजूद मूल टाइम मशीन में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है, इसलिए कोई विरोधाभास नहीं है। जाहिर है कि समय यात्रा तभी मुमकिन है, जब हमारा ब्रह्मांड कई इतिहासों के सह-अस्तित्व की अनुमति दे सके। लेकिन, क्या यह संभव है? क्वांटम विज्ञान इसके संकेत जरूरत देता है।
तकनीकी तौर पर देखें, तो हम पहले ही समय में आगे बढ़ रहे हैं। हर सेकंड हम भविष्य की यात्रा कर रहे हैं। अनुभव बताता है कि जो व्यक्ति तेज गति से चल रहा हो, उसके लिए समय अलग तरह से चलता है, उसकी तुलना में जो स्थिर खड़ा है। अगर आप दिल्ली से चेन्नई जाते किसी हवाई विमान में बैठे हों, तो आपको समय जल्दी गुजरते लगेगा, उसकी तुलना में जो चेन्नई हवाई अड्डे पर एक जगह बैठा आपका इंतजार कर रहा है। जाहिर है कि समय के गुजरने को विभिन्न लोग अलग-अलग दरों पर महसूस करते हैं। इसका एक पहलू और भी है। अगर आप दिल्ली में बैठकर भविष्य का अनुमान लगाते हुए कहें कि आप साढ़े पांच घंटे बाद कानपुर में होंगे। आप तेज गति से कार चलाते हुए ऐसा कर भी लेते हैं। लेकिन, आपके साथ ही दूसरी कार में चला एक व्यक्ति सामान्य गति से कार चलाते हुए दस घंटे में दिल्ली से कानपुर पहुंचता है।
पहले व्यक्ति ने जो पांच घंटे बचाए, उसमें भविष्य की समय यात्रा के सूत्र छिपे हो सकते हैं। तो, अगर भविष्य की समय यात्रा का रहस्य गति में छिपा है, तो यह माना जा सकता है कि अगर आप बहुत तेज गति से चल रहे हों, तो आप कई वर्ष भी बचा सकते हैं। किसी भी चीज की सबसे तेज गति प्रकाश की चाल है। प्रकाश हर घंटे में करीब एक अरब किलोमीटर की यात्रा करता है। अब तक सबसे तेज मानव निर्मित चीज नासा का पार्कर सोलर प्रोब मानी जाती है, जो 2018 में सूर्य पर भेजा गया एक अंतरिक्ष यान था। लेकिन इसकी गति प्रकाश की चाल की महज 0.064 फीसदी थी। यानी प्रकाश इससे 1,000 गुना ज्यादा तेज चलता है। जाहिर है कि अगर मनुष्य भविष्य की यात्रा करना चाहता है, तो भी उसे बहुत लंबा रास्ता तय करना होगा।