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पोप, वेटिकन और कहानियां: ट्रंप के एजेंडे का विरोध... इसलिए लिओ XIV अब शीर्ष ईसाई धर्मगुरु? क्या नई साजिश...

Sun, 25 May 2025 08:23 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 25 May 2025 08:23 AM IST
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सार
अचानक क्यों चले गए पोप फ्रांसिस? क्या यह परंपरावादी कार्डिनल्स का विद्रोह था, जो उनके उदार सुधारों से खार खाये थे या वैश्विक ताकतों का खेल, जो उनके युद्ध-विरोधी और पूंजीवाद-विरोधी रुख से तंग आ चुकी थीं? नए पोप लिओ XIV का राजनीतिक रुख तो मौजूदा अमेरिकी निजाम को नहीं जंचता, तो क्या आगे फिर कुछ नई साजिश उगेगी?
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Vatican and stories Oppose agenda of Trump Pope Leo XIV is now top Catholic priest new conspiracy likely
पोप और वेटिकन से जुड़ी हैं कई कहानियां (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

पोप लिओ अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को संरक्षण देने के पक्ष में हैं और ट्रंप प्रवासियों को अमेरिका से खदेड़ रहे हैं। चर्चा है कि वोट देते वक्त कार्डिनल एक सुपर पावर को पोप चुनना नहीं चाहते थे, मगर पोप लिओ, इसलिए पोप बन गए, क्योंकि वह ट्रंप के एजेंडे का विरोध करते रहे हैं।



सेंट पीटर्स बेसिलिका के छज्जे से ‘हबेमस पापम’ की पुकार का इंतजार लंबा नहीं चला। वेटिकन में सिस्टीन चैपल की चिमनी ने कार्डिनल के बीच असहमति का काला धुंआ बस एक बार उगला और फिर सफेद धुआं निकल आया। केवल दो दिन लगे नया पोप चुनने में। कैथोलिकों को पहला अमेरिकी पोप मिला, पोप लिओ 14वें। 18 मई को जब वेटिकन में दुनिया भर के मेहमानों के बीच पोप लिओ भक्तों से मिल रहे थे, तब वेटिकन की दीवारों के पार साजिश कथाओं की केक पक रही थी।


किस्म-किस्म की दुनियावी जंगों के बीच वेटिकन के पवित्र मंच पर विश्वास और साजिशों के किस्से जारी हैं, पोप फ्रांसिस की रहस्यमयी मौत ने सिस्टीन चैपल को एक थ्रिलर का स्टेज बना दिया। ऐसे अचानक क्यों चले गए पोप फ्रांसिस? क्या यह परंपरावादी कार्डिनल्स का विद्रोह था, जो उनके उदार सुधारों से खार खाये थे? या वैश्विक ताकतों का खेल, जो उनके युद्ध-विरोधी और पूंजीवाद-विरोधी रुख से तंग आ चुकी थीं? नए पोप लिओ का राजनीतिक रुख तो मौजूदा अमेरिकी निजाम को नहीं जंचता। तो क्या आगे फिर कुछ नई साजिश उगेगी?

नए पोप जब तक अपना नया अभियान शुरू करें, आइए टाइम मशीन में। हम आपको वेटिकन की उस स्याह इतिहास की तरफ ले चलते हैं, जिसमें गहरी साजिशें भरी पड़ी हैं। टाइम मशीन नौवीं सदी में है। रोम एक पोप की सनक पर हैरान है। पोप स्टीफन VI ने अपने पूर्ववर्ती पोप फॉर्मोसस की लाश को कब्र से खोदकर मुकदमा चलाया है। लाश को सिंहासन पर बिठाकर ‘अपराधों’ के लिए दोषी ठहराया गया। सजा? लाश की दो अंगुलियां काटकर टाइबर नदी में फेंक दी गईं। यह कैडवर सिनॉड वेटिकन के इतिहास का सबसे घिनौना अध्याय है, जिसने ईसाई जगत को हिला दिया है। स्टीफन की यह हरकत सत्ता की जंग और बदले की आग है।

यह 1032 है। आप पोप बेनेडिक्ट IX से मुखातिब हैं। महज 20 साल की उम्र में ताज हथियाने वाला युवा, वेटिकन को भ्रष्टाचार का अड्डा बना रहा है। उसने पवित्र सिंहासन को सोने के बदले बेच दिया। रोम की गलियां लूट, हिंसा और अनैतिकता से सुलग रही थीं। बेनेडिक्ट को तीन बार सत्ता से खदेड़ा गया, मगर वह लौट आया, मानो कोई शैतानी छाया हो। हम 14वीं सदी में आ गए हैं। पोप अर्बन VI की क्रूरता (1378) ने चर्च को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है। उसने कार्डिनल्स को यातनाएं दीं, कई को मार डाला। जवाब में फ्रांस के कार्डिनल्स ने बगावत कर एविगनोन में पोप क्लेमेंट VII को चुना। फिर एक तीसरा पोप उभरा, और यूरोप तीन पोप के बीच बंट गया। हर कोई एक-दूसरे को शैतान बता रहा है। रोम की गलियों में दंगे भड़क उठे हैं। अब चर्च दशकों तक अराजकता में डूबा रहेगा। यह कैथोलिक एकता की चिंदियां उड़ा देगा। यह पंद्रहवीं सदी है। टाइम मशीन आपको कुख्यात पोप एलेक्जेंडर VI (रोड्रिगो बोर्जिया) के युग में ले आई है। इसने रिश्वत से ताज हथियाकर वेटिकन को अपने परिवार का साम्राज्य बना लिया है। उसके बच्चे साजिशों के केंद्र में हैं। बोर्जिया ने कार्डिनल्स को खरीदा, दुश्मनों को जहर दिया, और वेटिकन को सत्ता और हिंसा का मंच बना दिया है। लेखक पिएत्रो एरेटिनो लिखेंगे ‘रोम अब साजिशों का मंदिर है।’

यह 1503 है। पोप जूलियस II, ‘योद्धा पोप,’ कवच पहनकर युद्ध में कूद पड़े हैं। माइकल एंजेलो को सिस्टीन चैपल सजाने का आदेश देने वाले इस पोप ने अपनी सैन्य महत्वाकांक्षा से चर्च को कर्ज में डुबो दिया है। टाइम मशीन अब 16वीं सदी में है। रोम में पोप लियो X (जियोवन्नी दे मेडिची) ने िवलासिता की सारी हदें पार कर दी हैं। वह कह रहा है, ‘ईश्वर ने हमें ताज दिया, तो मजा लें।’ उसने सेंट पीटर्स बेसिलिका बनाने के लिए पापमुक्ति पत्र बेच डाले हैं। ‘सिक्का खनके, आत्मा मुक्त।’ अलबत्ता जर्मनी में भिक्षु मार्टिन लूथर ने उनकी सत्ता को चुनौती दी है। विरोध बढ़ रहा है। पोप लियो ने पापल बुल एक्ससर्ज डोमिने (1520) जारी कर लूथर को चेतावनी दी, जिसे लूथर ने जला दिया। दूसरे पापल बुल सेट रोमन पॉन्टिफिसम के जरिये लूथर चर्च से बाहर हो गए हैं, मगर प्रिंटिंग प्रेस ने प्रोटेस्टेंट क्रांति को यूरोप में फैला दिया है।

इधर, पोप क्लेमेंट VII (मेडिची) ने (1523) यूरोप की सत्ता के खेल में खुद को उलझा लिया है। पोप और फ्रांस के गठजोड़ ने सम्राट चार्ल्स V को भड़काकर उनकी सेनाओं सेे रोम को लूट लिया। अब हेनरी VIII चर्च ऑफ इंग्लैंड बनाकर कैथोलिक चर्च को चुनौती दे रहे हैं। यूरोप कैथोलिक-प्रोटेस्टेंट धर्मयुद्धों में खून से लाल है। थर्टी ईयर्स वार (1618-1648) में लाखों जानें जाएंगी। सेंट बार्थोलोम्यू डे नरसंहार (1572) में हजारों प्रोटेस्टेंट्स की हत्या से करुणामय यीशु रो उठे हैं। इधर, रोम (1542) में पोप पॉल III ने इन्क्विजिशन शुरू कर दिया है। ‘विधर्मियों’ को कुचलने के इस अभियान में दार्शनिक जियोर्डानो ब्रूनो को 1600 में जिंदा जला दिया गया। गैलीलियो गैलीली को 1633 में सूर्य-केंद्रित सिद्धांत के लिए सजा दी गई है।

यह 17वीं सदी है। हम यूरोप वेस्टफेलिया की संधि (1648) को मेज पर छोड़कर 21वीं सदी की तरफ बढ़ते हैं। इस संधि के बाद धर्मयुद्ध रुकेंगे। चर्च और शासकों के बीच नई व्यवस्था कायम होगी। टाइम मशीन 2025 में वेटिकन के सेंट पीटर्स स्क्वायर पर उतर रही है। हवा में नए पोप के स्वागत की गर्मजोशी है, मगर गलियारों में साजिश कथाओं के बगूले उठ रहे हैं। पोप लिओ को पिछले पोप फ्रांसिस की मौत से उठे सवालों का जवाब देना होगा। परंपरावादी कार्डिनल्स धार्मिक सख्ती की वकालत कर रहे हैं, जबकि प्रोग्रेसिव पुजारी विवाहित पादरियों, महिला संतों और समलैंगिक जोड़ों को जगह देने की मांग कर रहे हैं। पोप लिओ अमेरिका में रह रहे प्रवासियों को संरक्षण देने के पक्ष में हैं और ट्रंप प्रवासियों को अमेरिका से खदेड़ रहे हैं। चर्चा है कि वोट देते वक्त कार्डिनल एक सुपर पावर को पोप चुनना नहीं चाहते थे, मगर पोप लिओ, इसलिए पोप बन गए, क्योंकि वह ट्रंप के एजेंडे का विरोध करते रहे हैं। अपनी पहली प्रार्थना में उन्होंने गाजा, यूक्रेन और पर्यावरण का जिक्र किया है, जिसके राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। वेटिकन का पवित्र इतिहास साजिशों, युद्धों और पापों की महागाथा भी है। स्टीफन, बेनेडिक्ट, अर्बन, एलेक्जेंडर, जूलियस, लियो, और क्लेमेंट के पापी साये सिस्टीन चैपल की दीवारों से झांकते हैं। नए पोप गलतियों से सबक लेंगे या चर्च बनाम ट्रंप भी देखने को मिलेगा? आप इतिहास बनता देखिए। हम फिर मिलेंगे...

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