Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   us-midterm-election-republican-defeat-trump-global-politics-india-us-trade-relations

बदलते समीकरण: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप को झटका, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है दूरगामी प्रभाव

Thu, 05 Nov 2026 06:25 AM IST
अमर उजाला Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 05 Nov 2026 06:25 AM IST
विज्ञापन
सार
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी का हारना कोई नई बात नहीं है। फिर भी, यह डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका जरूर है, जिसके अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
loader
us-midterm-election-republican-defeat-trump-global-politics-india-us-trade-relations
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी का हार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में संसद के दोनों सदनों-प्रतिनिधि सभा और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी की भारी हार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए न केवल घरेलू राजनीति में बड़ा झटका है, बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। जाहिर है, अपने बचे हुए अगले दो साल के कार्यकाल तक राष्ट्रपति ट्रंप की सांविधानिक शक्तियां तो बनी रहेंगी, लेकिन अमेरिकी संसद में उनका नियंत्रण खत्म होने से उनके लिए नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। रिपब्लिकन की हार के पीछे महंगाई, व्यापार व विदेश नीति में अनिश्चितता जैसे मुद्दे रहे, जिनके कारण आम अमेरिकियों के जीवनयापन की लागत बढ़ने से ट्रंप प्रशासन के प्रति भारी असंतोष पैदा हुआ। दरअसल, अमेरिकी इतिहास बताता है कि राष्ट्रपति की लोकप्रियता और सत्ता में होने का लाभ ज्यादातर मौकों पर उसकी पार्टी को मध्यावधि चुनाव में सफलता नहीं दिला पाता है। 1938 के बाद से, 22 में से 20 मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को हाउस में अपनी सीटें गंवानी पड़ी हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी को अब ट्रंप के विधायी एजेंडे को रोकने, उनके प्रशासन के कामकाज की जांच करने और सैन्य खर्च, व्यापार शुल्क तथा बजट संबंधी फैसलों पर निगरानी रखने का अवसर मिलेगा। इस तरह चुनावी नतीजे न केवल अमेरिका की घरेलू राजनीति में सत्ता का संतुलन बदलेंगे, बल्कि ईरान युद्ध, यूक्रेन संघर्ष, प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर डाल सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में अब अधिक राजनीतिक और संस्थागत चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भले ही ट्रंप अमेरिकी सेना के कमांडर इन चीफ बने रहेंगे, लेकिन युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने और उसके लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के मामले में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य और आर्थिक सहायता तथा रूस के प्रति ट्रंप प्रशासन की नीति पर कांग्रेस में नए सिरे से बहस होने की संभावना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ नीति के जरिये भारत और चीन ही नहीं, बल्कि अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ भी व्यापारिक तनाव बढ़ाया है। अब डेमोक्रेटिक बहुमत इन नीतियों के आर्थिक प्रभावों और उनके औचित्य पर सवाल उठा सकता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पहले से ही चुनौतीपूर्ण रही है। अब कांग्रेस में ट्रंप प्रशासन की बदली हुई स्थिति इस प्रक्रिया को और जटिल बना सकती है। दूसरी ओर, एच-1बी वीजा को लेकर ट्रंप की सख्त नीतियों पर भी डेमोक्रेट्स नए सिरे से सवाल उठा सकते हैं। कुल मिलाकर, मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने वाशिंगटन में सत्ता समीकरण तो बदल दिए हैं, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी संसद में जो डेमोक्रेट्स को ताकत मिली है, उसका इस्तेमाल वे घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कैसे करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed