{"_id":"687edf74ada03323670f2ad9","slug":"upi-flight-matter-of-pride-for-india-after-being-on-top-now-the-challenge-is-to-increase-digital-literacy-2025-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपीआई की उड़ान: भारत का दुनिया में अग्रणी होना गर्व की बात, अब डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की चुनौती...","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
यूपीआई की उड़ान: भारत का दुनिया में अग्रणी होना गर्व की बात, अब डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की चुनौती...
Tue, 22 Jul 2025 06:16 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 22 Jul 2025 06:16 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
UPI पेमेंट में भारत सबसे आगे (सांकेतिक)
- फोटो :
Adobe Stock
विस्तार
भारत ने डिजिटल भुगतान में नया कीर्तिमान स्थापित किया है, और यह गर्व की बात है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इसे वैश्विक स्तर पर त्वरित भुगतान में अग्रणी माना है। जून, 2025 में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) ने 18.39 अरब लेनदेन के साथ 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बत्तीस फीसदी की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है।
यह उपलब्धि भारत की तकनीकी प्रगति को तो रेखांकित करती ही है, इससे यह भी पता चलता है कि कैसे एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे ने देश को नकदी-प्रधान से डिजिटल-प्रधान अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया है। यूपीआई, जिसे 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा शुरू किया गया था, की कामयाबी को महज आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के रूप में देखना चाहिए, जिसने भारत में बैंकिंग को आम आदमी की जेब में पहुंचा दिया है।
अब गांव का किसान हो, या छोटे शहर का दुकानदार-बैंकों की लंबी कतारों में लगे बिना महज एक मोबाइल एप से भुगतान कर सकता है। जाहिर है कि इससे नकदी पर निर्भरता घटी है, पारदर्शिता बढ़ी है और छोटे कारोबारियों को डिजिटल पहचान भी मिली है। यूपीआई अब भारत में 85 फीसदी डिजिटल लेनदेन और वैश्विक स्तर पर लगभग 50 फीसदी रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों को संचालित करता है।
यह आंकड़ा तब और प्रभावशाली हो जाता है, जब हम देखते हैं कि प्रतिदिन होने वाले भुगतानों के मामले में इसने वैश्विक दिग्गज वीजा को भी पीछे छोड़ा हुआ है। यह उपलब्धि केवल नौ वर्ष में हासिल की गई है, जो भारत की तकनीकी नवाचार और कार्यान्वयन की गति को दर्शाती है।
यूपीआई ने शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण और छोटे शहरों में भी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। जनधन योजना के तहत पचपन करोड़ से अधिक बैंक खातों ने लाखों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। सस्ती इंटरनेट सुविधा व 5जी नेटवर्क के तेज विस्तार ने भी यूपीआई की पहुंच को व्यापक बनाया है।
यूपीआई का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि यह संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस में भी कार्यरत है। अब भारत ब्रिक्स समूह में यूपीआई को एक मानक भुगतान प्रणाली के रूप में पहुंचाने की कोशिश कर रहा है और अगर ऐसा होता है, तो यह वैश्विक डिजिटल नेतृत्व में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। हालांकि, इस कामयाबी के साथ साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने की चुनौतियां भी हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।