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विश्लेषण: पांच साल के लिए मजबूत नींव रखता बजट, राहत के साथ प्रोत्साहन का भी बनेगा आधार

T.V Mohandas Pai टी वी मोहनदास पाई
Updated Wed, 24 Jul 2024 07:08 AM IST
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सार
यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप आगामी पांच साल के लिए ठोस नींव रखता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में राहत और प्रोत्साहन प्रदान करता है, जिसमें रोजगार सृजन, शहरी विकास और महिला कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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Union Budget lays strong foundation for five years to become basis incentives along with relief
बजट 2024 - फोटो : PTI

विस्तार

वर्ष 2024 का बजट अत्यधिक प्रत्याशित रहा, खासकर प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद कि पिछला दशक आने वाले पांच वर्षों में अपेक्षित परिवर्तनकारी परिवर्तनों के लिए केवल एक प्रस्तावना या 'ट्रेलर' था। यह बजट नौ प्रमुख क्षेत्रों के आसपास संरचित है, जिसमें रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है, जो सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। सरकार 4.1 करोड़ युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करते हुए 'अच्छी भुगतान वाली नौकरियां' निर्मित करने की अपनी प्राथमिकता में काफी स्पष्ट रही है। इस संबंध में, शिक्षा के लिए बढ़ा हुआ बजट आवंटन दूरगामी प्रभाव वाला एक रणनीतिक कदम है। दूसरी तरफ, कृषि अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने का उद्देश्य दूरगामी सोच वाले दृष्टिकोण को दर्शाते हुए उत्पादकता बढ़ाना है।



एक और उल्लेखनीय पहल रोजगार से जुड़ा प्रोत्साहन कार्यक्रम है, जहां सरकार भविष्य निधि में नियोक्ता का हिस्सा और ईपीएफओ के साथ पंजीकृत नए कर्मचारियों के लिए पहले महीने का वेतन, जो पंद्रह हजार रुपये तक हो, कवर करेगी।  इसके अतिरिक्त, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जो इस क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं। कार्यबल में महिलाओं के लिए बढ़ा हुआ बजट आवंटन और शिक्षा ऋण की ब्याज दरों में तीन प्रतिशत की छूट समावेशी विकास की दिशा में सराहनीय कदम हैं। इसके अलावा, सरकार ने एक इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया है जिसका लक्ष्य एक करोड़ भारतीय युवाओं को शीर्ष 500 कंपनियों में आवासीय और व्यावसायिक अनुभव प्रदान करना है, ताकि शिक्षा और रोजगार के बीच अंतर को कम किया जा सके। बजट में आंध्र प्रदेश और बिहार राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो राजनीति में विश्वस्त सहयोगी होने के नाते स्वाभाविक भी था। बिहार के लिए, कोसी नदी बेसिन में बाढ़ सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना एक महत्वपूर्ण कदम है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निश्चित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बजट क्रेडिट गारंटी योजना को बढ़ाना और मुद्रा लोन सीमा को रुपये 20 लाख तक बढ़ाने जैसे उपायों से एमएसएमई को आवश्यक वित्तीय सहायता मिलने, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


बजट में शहरी विकास को प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना गया है, जिसमें जल आपूर्ति, स्वच्छता एवं परिवहन के लिए 10 लाख करोड़ रुपये के पर्याप्त निवेश का प्रस्ताव रखा गया है। कई सुधारों के प्रस्ताव के साथ सरकार ने शहरी ढांचों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है, जो सतत विकास एवं जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जरूरी है, क्योंकि भारत का भविष्य शहरी क्षेत्रों पर ही निर्भर है। बजट में ऊर्जा परिवर्तन को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिसमें सोलर रूफटॉप नीति की शुरुआत की गई है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान की फंडिंग के लिए एक लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण आवंटन किया गया है, जिसमें निजी क्षेत्र को शामिल किया गया है, जो नवाचार के महत्व को रेखांकित करता है। बजट में रोजगार, भूमि संबंधी मामलों और वित्तीय क्षेत्र में अगली पीढ़ी के सुधारों की रूपरेखा पेश की गई है, जिसका उद्देश्य व्यापार सुगमता को बढ़ाना और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करना है। बजट प्राप्तियां बढ़कर 32.07 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं, जबकि राजकोषीय घाटा जो अंतरिम बजट में 5.1 फीसदी था, वह घटकर 4.9 फीसदी रह गया है। यह कमी मुख्य रूप से जीडीपी में वृद्धि, उच्च प्राप्तियों और कम व्यय के कारण आई है।

2023-24 के वास्तविक खातों से पता चलता है कि संशोधित बजट में निर्धारित 5.8 फीसदी की तुलना में राजकोषीय घाटा घटकर 5.6 फीसदी रह गया है। बजट प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर में कई तरह के बदलाव लाता है। हालांकि अप्रत्यक्ष करों, विशेष रूप से जीएसटी का सरलीकरण एक सकारात्मक कदम है। लेकिन कर कटौती एवं उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी जैसे कई मुद्दे अब भी हैं। कैपिटल गेन टैक्स में बढ़ोतरी से शेयरबाजार में सूचीबद्ध निवेशकों के लिए चिंताएं बढ़ी हैं। सूचीबद्ध वित्तीय संपत्तियों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है, जबकि शॉर्ट टर्म गेन पर टैक्स को 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। सरकार ने सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध, दोनों प्रतिभूतियों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की दर को एक समान 12.50 फीसदी रखकर दोनों के बीच के अंतर को पाट दिया है। यह गैर-सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के लिए दर में बड़ी कमी है, जिससे स्टार्ट-अप्स में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। सोना एवं चांदी पर कर घटाकर छह फीसदी कर दिए जाने से इनकी तस्करी तो घटेगी ही, मूल्यवर्धन एवं निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा एंजल टैक्स हटाने से स्टार्ट-अप को भी बड़ी राहत मिली है। व्यक्तिगत कराधान के मामले में बजट ने कई लोगों को निराश किया है। जबकि प्रति व्यक्ति 17,500 रुपये की सकल कटौती के साथ कुछ कर राहत दी गई है। कर संरचना के छह स्लैब को बनाए रखना शायद अनावश्यक रूप से जटिल है। तीन-स्लैब की संरचना अधिक सरल होती।

बजट का एक और महत्वपूर्ण पहलू विवाद समाधान पर ध्यान केंद्रित करना है। विवाद से विश्वास योजना की शुरुआत का उद्देश्य कुछ लंबित आयकर विवादों को हल करना है। प्रत्यक्ष कर, उत्पाद शुल्क और सेवा कर से संबंधित अपील दायर करने की मौद्रिक सीमा बढ़ा दी गई है, लेकिन यह अधिक प्रभावी होता, यदि उच्च न्यायालय के निर्णयों का बेहतर सम्मान करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के लिए सीमा कम से कम 50 करोड़ रुपये तक बढ़ा दी जाती। कुल मिलाकर, यह बजट प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप आगामी पांच साल के लिए ठोस नींव रखता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में राहत और प्रोत्साहन प्रदान करता है, जिसमें रोजगार सृजन, शहरी विकास और महिला कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। हालांकि, बजट मध्यम वर्ग की जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है, जो लगातार कर बोझ उठाता है। पूंजीगत लाभ कर में वृद्धि इक्विटी संस्कृति को भी कम कर सकती है, जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

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