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हाय रे लाल टमाटर!
पूरन सरमा
Updated Tue, 22 Jul 2014 02:50 PM IST
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काम वाली बाई ने बताया कि मंडी में टमाटर बीस रुपये पाव बिक रहा है, तो मुंह में पानी आ गया। पिछले पंद्रह दिनों से सलाद में टमाटर गायब था। मैंने बच्चे से कहा, टिंकू, गाड़ी निकाल। मंडी से टमाटर लाएंगे।
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वह बोला, पापा, टमाटर में गाड़ी क्या करेगी? स्कूटी ले जाओ। मैं बोला, तू समझता नहीं, अस्सी रुपये किलो का टमाटर है। मंडी में भीड़-भाड़ रहती है। थैला हाथ से छूट गया या गाय ने सींग मार दी, तो टमाटर खरीदना, न खरीदना बराबर हो जाएगा। मन मारकर वह तैयार हो गया।
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मंडी पहुंचे, तो एक दुकान में सड़ा-गला टमाटरों का ढेर देखा, तो वही टमाटर रसदार लगा। मैंने भाव पूछा, तो दुकानदार ने बताया कि पचास रुपये लगा देंगे। मैंने सोचा, चलो, तीस रुपये किलो का फायदा है। सब्जी और सलाद के लिए यह बुरा नहीं। बच्चा मेरी बात समझ गया।
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वह बोला, क्या ले रहे हैं पापा। ये सड़े टमाटर हैं। बदबू मार रहे हैं। आगे चलो, ताजा टमाटर लेंगे। मैंने कहा भी कि पचास में बुरे नहीं है। पर वह नहीं माना। हम आगे बढ़े, तो टमाटर गायब था।
थक-हारकर हम फिर उसी दुकान पर आए। मैंने कहा, भाई, पांच किलो तौल दो। बच्चा बोला, पांच दिन में इससे घर की हालत दुर्गंध के कारण बहुत बुरी होगी। मैंने कहा, अस्सी का पचास में मिल रहा है, गाड़ी लेकर आए हैं। पेट्रोल का खर्च पांच किलो में ही निकलेगा। मेरा सीना गर्व से फूला जा रहा था कि आज तो सलाद में टमाटर होगा।
टमाटर का थैला घर में लाकर रखा, तो पत्नी ने नाक बंद कर ली और बोली, क्या लाए हो, जिससे दिमाग तक सड़ गया है। बच्चे ने जवाब दिया, सड़ा हुआ टमाटर। पत्नी ने थैला खोला, तो दुर्गंध और फैली। उसने पूरा थैला बाहर कूडे़दान में उड़ेल दिया।
टिंकू लगातार हंसे जा रहा था। मैंने कहा, अब क्या खाओगे सलाद में? उसने कहा, हम बिना सलाद के खा लेंगे, आपके इस सड़े टमाटर से तो बचे। मैं गुस्से में ऑफिस जाने की तैयारी में जुट गया। बाहर से टमाटरों की गंध अब भी मेरे नथुनों को राहत दे रही थी।