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क्रिकेट को निश्चित करने के लिए
प्रकाश पुरोहित
Updated Thu, 28 Jan 2016 07:00 PM IST
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क्रिकेट से अनिश्चितता निकाल दी जाए, तो ऐसा लगेगा, जैसे फुग्गे से हवा निकाल दी गई हो। दावा किया जाता रहा है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। पर हाल के दिनों में हम देखें, तो पता चलता है कि क्रिकेट में से अनिश्चितता कम होती जा रही है, बल्कि खत्म हो रही है।
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टेस्ट क्रिकेट को रोचक बनाने के लिए मैदान में तीसरे अंपायर की पोस्टिंग पर विचार हो रहा है, क्या इससे क्रिकेट की अनिश्चितता वापस लौट आएगी? यदि न्यूट्रल अंपायर का नियम तय कर दिया गया है, तो तीसरे अंपायर क्या खूंटा गाड़ देंगे? अगर क्रिकेट को फिर से अनिश्चितता देनी है, तो न्यूट्रल अंपायर की तरह ही न्यूट्रल कंट्री का नियम लागू करना चाहिए।
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वैसे, पाकिस्तान न्यूट्रल या तीसरे देश में ही इतना ज्यादा खेल रहा है कि उसे पाकिस्तान में खेलने का मौका मिले, तो वहां हार जाए! अगली एशेज इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया में नहीं, वेस्ट इंडीज में होना चाहिए! जरूरी है कि तब वेस्ट इंडीज टीम घर बैठी हो, वर्ना देखने वाले परेशान हो जाएंगे कि इधर जाऊं या उधर जाऊं! जैसे, अभी भारतीय टीम को न्यूजीलैंड जाना है, तो इसके बजाय दोनों टीमों को जिंबाब्वे भेजा जाना चाहिए था, ताकि क्रिकेट में अनिश्चितता कायम रहे। अमेरिका में क्रिकेट की शुरुआत इस तरह हो सकती है कि भारत-पाकिस्तान की सीरिज वहां करा दी जाए।
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सवाल उठ सकता है कि तीसरे देश में सीरीज हो, तो देखने कौन आएगा? निवेदन है कि टेस्ट क्रिकेट देखने स्टेडियम में जाता ही कौन है! एशेज में ही पूरा स्टेडियम एक दिन भी नहीं भरा! स्कूली बच्चे न हों, तो वेस्ट इंडीज और दक्षिण अफ्रीका में तो सिवाय खिलाड़ियों के कोई नजर ही न आए! क्रिकेट अनिश्चितताओं के साथ टीवी का भी खेल है। स्टेडियम तो खाली रखने के लिए होते हैं। टीवी हरा-भरा रहे, इसलिए जरूरी है कि तीसरे देश की तलाश करें। यह भी हो सकता है कि किसी एक देश को ठेका दे दिया जाए कि वह बारह महीने बस क्रिकेट ही करवाता रहे...ताकि क्रिकेट बचा रहे!