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जनता बेवकूफ नहीं है, राहुल जी

Sun, 23 Aug 2015 07:52 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 23 Aug 2015 07:52 PM IST
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The public is not stupid, Rahul jee

स्पष्ट होने लगा है कि दोस्तो कि राहुल गांधी की नजरों में जनता बिल्कुल बुद्धू है। यह संदेह था मेरे मन में कई दिनों से, लेकिन पिछले सप्ताह यकीन में तब बदल गया, जब राहुल गांधी ने 'कुर्ता-पायजामा सरकार' वाली बात कही। अपने आप को गरीबों का मसीहा साबित करने की कोशिश में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सूट-बूट की नहीं, कुर्ता-पायजामा की होगी। भूल गए थे वह शायद कि यह जनता वह जनता नहीं, जो उनकी दादी के समय थी।

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इंदिरा गांधी के लंबे प्रधानमंत्री काल में स्वतंत्रता संग्राम की यादें ताजा थीं। समाजवादी सोच तब तकरीबन हर भारतीय की थी, चाहे वह फुटपाथ पर सोने वाला बेघर हो या महल में रहने वाला धनवान। ऊपर से था गांधी का असर। सो हमारे राजनेता जब खादी का कुर्ता-पायजामा पहना करते थे, तो उनके लिबास में हमको सादगी और ईमानदारी दिखती थी। उनकी यह राजनीतिक वर्दी बहुत सस्ती मिला करती थी किसी भी खादी ग्रामोद्योग की दुकान पर। इतनी इज्जत थी उस समय इस वर्दी की कि खादी पहनना फैशन-सा बन गया था। इंदिरा गांधी कुर्ता-पायजामा तो नहीं पहना करती थीं, पर साड़ियां उनकी साधारण सूती होती थीं।
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पिछले दो दशकों में जमाना ऐसा बदला है कि खादी का कपड़ा सिर्फ अमीर लोग खरीद सकते हैं अब। परिवर्तन ऐसा आया है कि खादी की साड़ी का दाम शुरू होता है पांच हजार रुपये से और नायलॉन की साड़ी मिलती है सौ रुपये में। लेकिन राहुल गांधी को अभी तक परिवर्तन की यह झलक नहीं दिखी है। न ही उनके साथियों को। ये सब आते हैं संपन्न परिवारों से, लेकिन खुद को साधारण आदमी दिखाने के लिए पहनते हैं खादी का कुर्ता-पायजामा। लेकिन इसके साथ वे पहनते हैं महंगी घड़ी, महंगी चप्पलें, जेब में रखते हैं हजारों की कलम।
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उदाहरण और भी हैं, जिनसे साबित होता है कि राहुल जी जनता को बेवकूफ समझते हैं। ललित गेट को ही लीजिए। मानसून सत्र के अंतिम दिन जब कांग्रेस के सांसदों ने बहस होने का मौका दिया, आपने सुना होगा कि किस तरह उसके उपाध्यक्ष ने कहा, आईपीएल काला धन का प्रतीक है, ललित मोदी को वापस लाओ। क्या राहुल जी भूल गए हैं कि आईपीएल शुरू हुआ था यूपीए के समय में? क्या वह यह भी भूल गए हैं कि किस शौक से वह खुद मैच देखने जाया करते थे?

ऊपर से यह भी शायद भूल गए हैं कांग्रेस उपाध्यक्ष कि ललित मोदी के खुलासों की शृंखला में खुलासा यह भी था कि कुछ वर्ष पहले उनसे मिलने आए थे वरुण गांधी यह पेशकश लेकर कि सोनिया जी से सुलह करवा सकते हैं, अगर वह राहुल की इटली वाली मौसी से मिलकर उनको छह करोड़ डॉलर देने को तैयार हो जाएं। ललित मोदी ने यह भी ट्वीट किया कि मैंने वरुण को कहा, 'पागल हो गए हो क्या?' सो राहुल गांधी को या तो इन बातों की जानकारी नहीं है या वह यह सोचकर चल रहे हैं कि जनता को बेवकूफ बनाना आसान है।


पिछले वर्ष मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया, लेकिन लगता है, इस हकीकत को भी भूल गए हैं राहुल गांधी। न भूले होते, तो शायद ऐसा गठबंधन न करते बिहार में, जिसमें कांग्रेस की भूमिका एक जूनियर पार्टनर की है, और वह भी लालू यादव और नीतीश कुमार के नेतृत्व में, जो कल तक कांग्रेस के विरोधी थे। लेकिन राहुल भूल रहे हैं कि मतदाता पहले की तरह बेवकूफ नहीं हैं।

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