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Budget: बजट भाषण में दिखा वित्तीय इंजीनियरिंग की कुशलता और राजनीति का सटीक प्रबंधन, हर वर्ग को देने की कोशिश

Wed, 24 Jul 2024 07:31 AM IST
Shankar Ayair शंकर अय्यर
Updated Wed, 24 Jul 2024 07:31 AM IST
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सार
इस बार के बजट में हर वर्ग के लिए कुछ ना कुछ देने की कोशिश की गई है। इस बजट में राजनीति का कुशल प्रबंधन वित्तीय इंजीनियरिंग में दिखाई देता है।
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The efficiency of financial engineering and precise management of politics shown in the budget speech
बजट 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 7,800 शब्दों वाले करीब नब्बे मिनट के बजट भाषण में वित्तीय इंजीनियरिंग की कुशलता व राजनीति का सटीक प्रबंधन दिखता है।


बजट दरअसल पवित्र राजनीतिक मंशा की एक अभिव्यक्ति होता है। सरकार के लिए यह राजनीतिक सहयोगियों को आश्वस्त करने का एक अवसर है, लेकिन साथ ही यह आर्थिक आवेगों को भी बढ़ावा देता है। 2024 का बजट राजनीतिक मजबूरियों और आर्थिक अनिवार्यताओं के चौराहे पर पहुंचा है। लोकसभा चुनावों के दौरान बयानबाजी का सिलसिला, सत्ताधारियों के संख्याबल में कमी और जीडीपी में वृद्धि व निजी उपभोग के दावों और ‘फील-गुड’ कारक के बीच की दूरी ने राजनीतिक अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में उम्मीदें बढ़ा दी थीं।

बजटों का शिल्प, कला और विज्ञान दोनों होता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 7,800 शब्दों वाले करीब नब्बे मिनट के भाषण में आय पिरामिड में सबसे नीचे से आने वाली दर्द भरी चीखों का सुनना दिखता है। बजट में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किए जाने की कोशिश है।


बजट राजनीति का कुशल प्रबंधन वित्तीय इंजीनियरिंग में दिखाई देता है। बजट से पहले दो सहयोगियों तेदेपा और जदयू ने अपने समर्थन की कीमत जाहिर कर दी थी, जिसे पूरा भी किया गया है। नए बजट में वे सभी बातें हैं, जो लोग सरकार से सुनना चाहते हैं। बजट में नौ प्राथमिकताएं सूचीबद्ध हैं। बजट लोकलुभावन वादों को छोड़ संरचनात्मक दृष्टिकोण का विकल्प चुनता है। इसमें कृषि अनुसंधान, उच्च उपज वाले बीज जारी करने, प्राकृतिक खेती की शुरुआत, दालों और तिलहनों के लिए मिशन, खराब होने वाली वस्तुओं के लिए क्लस्टर, डिजिटल सर्वेक्षण, किसान क्रेडिट कार्ड के विस्तार, मवेशियों और झींगा पालन के लिए वित्तपोषण की समीक्षा की पेशकश की गई। सरकार ने बेरोजगार युवाओं की बात सुनी और रोजगार से जुड़ा एक प्रोत्साहन कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें नियोक्ताओं को लागत में छूट, शिक्षार्थियों को वित्तीय मदद, और नौकरी चाहने वालों को मौके शामिल हैं।

बजट टीम भारत के विचार को पुनर्जीवित करने के लिए एक रूपरेखा का वादा करती है, जिसमें राज्यों व केंद्र में समरूपता होगी। बजट में शहरीकरण की शक्ति को भी पहचाना गया है। इन्हें विकास का केंद्र माना गया है, लेकिन इतना काफी नहीं, क्योंकि भारत में शहरों के प्रबंधन को बदलने के लिए प्रतिमानों में बड़ा बदलाव जरूरी है। इसमें संदेह नहीं कि बजट में कई आशाजनक बिंदु हैं। सब कुछ कहने और हो जाने के बाद यह देखना बाकी है कि जो कहा गया है, वह पूरा होता है या नहीं। यह वास्तव में उम्मीद की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा है।
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