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हमारी आपकी टोपी का रंग एक है

Sun, 09 Feb 2014 06:14 PM IST
योगेंद्र शर्मा
योगेंद्र शर्मा Updated Sun, 09 Feb 2014 06:14 PM IST
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the colour of our caps is same

पिछले जमाने में मां अपने बेटों को हड़काती थी, खबरदार, जो बिना टोपी के घर से निकला। रास्ते में श्मशान की कोई चुड़ैल पीछे पड़ गई, तो क्या होगा? उस दौर में बेटियों को भी बिना सिर ढके निकलना सख्त मना था। बुजुर्गों के आगे सिर न ढकने को बेअदबी समझा जाता था। यानी सिर ढके बिना काम नहीं चलता था।

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टोपी की पूंछ आसमान छू गई, तो दस गज कपड़े की टोपी यानी पगड़ी पहनने लगे लोग। अपने दादा स्कूल मास्टर थे। एक दिन स्कूल में वह टोपी के महत्व पर प्रकाश डाल रहे थे कि चार विद्यार्थियों ने बताया कि मां कहती है, यहां दाल-रोटी का टोटा है, तो टोपी कहां से आए? दूसरे दिन लंबी संटी रखने वाले दादा अपने थैले में टोपियां लेकर गए और उन्हें पहनाईं।
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टोपी का महत्व यहीं तक नहीं था। लौटती बारात देखकर कोई बेटी वाला अपने समधी के चरणों में टोपी रख देता था। जवाब मिलता, दहेज की रकम पूरी करो, तो बारात रुकेगी। तभी मोहल्ले का कोई चरित्रवान युवक उसकी टोपी उसे पहनाते हुए कहता, बाबूजी, आप उचित समझें, तो मैं करूंगा आपकी बेटी से शादी। ऐसी घटनाएं फिल्मों में भी घटीं और जिंदगी में भी।
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गांधी जी ने टोपी का महत्व समझा। सारा देश सफेद कश्तीनुमा टोपी पहन मोर्चे पर आ डटा और अंग्रेजों को अपना होल्डॉल बांधना पड़ा। देश आजाद हुआ, तो नेताओं को टोपी पहनने में लाज आने लगी। अब दूसरों को टोपी पहनाने वाला बुद्धिमान कहलाने लगा। एक टोपी पहनाऊ महारथी हुए नटवरलाल। वास्तविक जीवन में हर ‘टोपी पहनाऊ’ पूज्य माना जाने लगा। मतदाता भी सोचने लगा कि नेता खाऊ है तो क्या, अपना काम तो करा देता है। दामाद जी जब रिश्वत में फंसे थे, तब उसी ने तो बचाया था, फिर अपनी जात-बिरादरी का है। इसी दौर में ईश्वर के नाम पर जनता को टोपियां पहनाने की परंपरा भी शुरू हुई।


अब दूसरा समय आ गया है। इन दिनों झाड़ू पार्टी ने राजनीति का कचरा साफ करने के लिए कमर कस ली है। लेकिन अभी कचरा साफ करने का काम शुरू ही हुआ था कि कुछ टोपी पहनाऊ यह कहते हुए उनके पीछे आ खड़े हुए कि गंदगी साफ करने में हम आपकी मदद करेंगे। देखिए, आपकी और हमारी टोपी का रंग एक ही है। टोपी पहनने वालों के ठीक पीछे टोपी पहनाने वाले खड़े हो गये हैं। यानी बिल्लियों को चूहों की सुरक्षा का टेंडर मिला है। खुदा खैर करे।

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