फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Thailand and Cambodia's border dispute and viral audio, from colonial times to now

अंतरराष्ट्रीय : सीमा विवाद और वायरल ऑडियो, औपनिवेशिक काल से अब तक

Sat, 26 Jul 2025 07:29 AM IST
शिव शुक्ला पेट्रा एल्डरमैन
पेट्रा एल्डरमैन Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 26 Jul 2025 07:29 AM IST
विज्ञापन
सार
थाईलैंड व कंबोडिया के विवाद की जड़ें औपनिवेशिक काल से जुड़ी हुई हैं, लेकिन हालिया विवाद के पीछे प्रीह विहार मंदिर से ज्यादा शिनावात्रा का वायरल ऑडियो है।  
 
loader
Thailand and Cambodia's border dispute and viral audio, from colonial times to now
थाईलैंड और कंबोडिया के झंडे - फोटो : Freepik

विस्तार

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से जारी सीमा संघर्ष हाल में नाटकीय रूप से बढ़ गया है। 23 जुलाई को बारूदी सुरंग में विस्फोट होने से उबोन रत्चथानी प्रांत में सीमा पर गश्ती दल के पांच जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जो एक सप्ताह में इस तरह का दूसरा मामला था। इसके बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध खराब हो गए। दोनों पक्षों के बीच घातक गोलीबारी हुई। इस साल मई के अंत में दोनों सेनाओं के बीच हुई गोलीबारी में कंबोडिया के एक सैनिक की मौत हो गई थी। लेकिन इस संघर्ष की जड़ें 19वीं और 20वीं सदी के शुरुआती औपनिवेशिक काल से जुड़ी हैं।



दक्षिण-पूर्व एशिया में पश्चिमी शक्तियों के औपनिवेशिक हितों के विस्तार से पहले स्थानीय शासकों के बीच एक सीमाबद्ध राष्ट्र-राज्य की अवधारणा नहीं थी। इन देशों के बीच कोई स्पष्ट सीमाएं नहीं थीं। ब्रिटिश और फ्रांसीसियों ने मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में राष्ट्र की अवधारणा का सूत्रपात किया तथा पहली बार थाईलैंड (तब सियाम) और कंबोडिया के बीच अधिकृत नक्शा तैयार किया।


दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड एकमात्र ऐसा राष्ट्र है, जो कभी उपनिवेश नहीं बना, लेकिन सियामी राजाओं के अनुरोध पर नक्शा तैयार किया गया था। थाईलैंड की वर्तमान सीमाओं को 1893 की पाकनाम घटना के बाद अलग-अलग मानचित्रों और संधियों के जरिये आकार दिया गया था, उस वक्त दो फ्रांसीसी बंदूकधारी नौकाओं ने चाओ प्राया नदी तक यात्रा की और बैंकॉक को घेर लिया।

उभरते राष्ट्र के रूप में अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए सियाम ने फ्रांस को अपने कई क्षेत्रीय दावे सौंप दिए। इनमें से वर्तमान कंबोडिया के कई प्रांत शामिल थे, जहां एक प्राचीन मंदिर है। फ्रांस द्वारा 1907 में बनाए गए नक्शे में इन क्षेत्रों को परिभाषित किया गया, पर उसमें काफी अस्पष्टता थी। 1953 में कंबोडिया की स्वतंत्रता के बाद यह मानचित्र कंबोडिया-थाई संबंधों में एक नाजुक मुद्दा बन गया, खासकर प्रीह विहार मंदिर का विवाद।

1954 में दक्षिण-पूर्व एशिया से फ्रांसीसियों के जाने के बाद थाईलैंड ने प्रीह विहार मंदिर पर कब्जा कर लिया। कंबोडिया इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में ले गया, जहां 1962 में फ्रांसीसी मानचित्र के आधार पर मंदिर को कंबोडिया से संबंधित बताया गया, जिसे थाईलैंड ने बेमन से स्वीकार तो कर लिया, लेकिन मंदिर के आसपास के क्षेत्र को लेकर विवाद बना रहा। 2008 में यह मामला फिर भड़क उठा, जब यूनेस्को ने मंदिर को विश्व धरोहर का दर्जा दिया।

इसके बाद दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गईं, लेकिन 2013 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फिर से कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दोनों देशों को क्षेत्र से सेनाएं हटाने के लिए कहा। इसके बाद मामला शांत हो गया, लेकिन इस साल मई में फिर से यह विवाद उभर आया। दरअसल, थाईलैंड में थाकसिन और कंबोडिया में हुन सेन, काफी प्रभावशाली हैं और उनके बीच दो दशकों से संबंध भी अच्छे थे। लेकिन हालिया विवाद के पीछे थाकसिन की बेटी और प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा की निजी बातचीत का ऑडियो हुन सेन द्वारा वायरल करने से इनके रिश्तों में कड़वाहट आ गई, जिससे पैतोंगतार्न की कुर्सी खतरे में आ गई, जिन्हें फिलहाल अदालत ने निलंबित कर दिया है।
(द कन्वर्सेशन से)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed