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कश्मीर में पंजाब के रास्ते आतंक की साजिश
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कश्मीर में आतंकवाद (file photo)
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अमर उजाला
विस्तार
बीते 29 दिसंबर को दिल्ली में केंद्रशासित क्षेत्र जम्मू और कश्मीर को लेकर एक अहम बैठक होनी थी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को करनी थी। बैठक के कुछ घंटों पहले ही जम्मू शहर के सिद्दड़ा इलाके में तड़के सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो गई। इसमें पुलिस ने कश्मीर की तरफ जा रहे चार आतंकियों को मार गिराया। ये चारों भारी हथियारों से लैस थे। 26 जनवरी से पहले पुलिस ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। हालांकि बाद में आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र के राजोरी जिले में नए साल के पहले दिन चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया और अगले दिन उसी घर में आईईडी धमाके में 16 और चार वर्ष के दो बच्चे मारे गए।
सिद्दड़ा की पुलिस मुठभेड़ में मारे गए आतंकी पंजाब के नंबर के ट्रक से कश्मीर की ओर जा रहे थे। घाटी में बर्फबारी के मद्देनजर और नियंत्रण रेखा पर सख्ती की वजह से पिछले काफी दिनों से कश्मीर के आतंकियों को हथियारों की सप्लाई पंजाब और जम्मू के रास्ते से की जा रही है। पाकिस्तान ड्रोन से हथियार और गोला-बारूद पंजाब और जम्मू के इलाकों में गिरा देता है, जिसे इस तरफ से लोग कश्मीर पहुंचा देते हैं। इस साल भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक होने वाली ड्रोन ड्रॉपिंग्स में दोगुने से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है। सीमा सुरक्षा बल के अनुसार, 2020 में सीमा पर 79 ड्रोन गतिविधि दर्ज की गई थी। 2021 में यह संख्या 109 पहुंच गई और इस साल यानी 2022 में ड्रोन से संबंधित 266 घटनाएं हुईं। ये गतिविधि सबसे अधिक पंजाब में दर्ज की गई, जहां 2022 में 215 घटनाएं सामने आईं। जम्मू क्षेत्र में पिछले वर्ष 22 ड्रोन ड्रॉपिंग की घटनाएं दर्ज की गईं। सिद्दड़ा में मारे गए आतंकियों से भी पुलिस को सात एके 47, तीन पिस्टल और एक एम4 राइफल मिली है।
जाहिर है, पाकिस्तान में बैठे आतंक के आका पंजाब और जम्मू से लगने वाली भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा को सॉफ्ट टारगेट मानते हुए लगातार हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ की आपूर्ति कर रहे हैं। सर्दियों में पड़ने वाला कोहरा चौकसी को मुश्किल बना देता है और आतंकियों के लिए मददगार साबित होता है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य के सुरक्षा परिदृश्य में लगातार सुधार हुआ है। सुरक्षा बलों के शिकंजे की वजह से आतंकी खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि अप्रैल, 2019 से जुलाई, 2022 तक घाटी में 118 नागरिकों की लक्षित हत्या की गई, जिसमें पांच कश्मीरी पंडित और 16 अन्य हिंदू और सिख थे।
लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि सेना और सुरक्षाबलों को घाटी में आतंक के पारिस्थितिकी तंत्र को धराशायी करने में बड़ी सफलता मिली है। घाटी के स्थानीय युवा अब आतंकी संगठनों में भर्ती नहीं हो रहे हैं और नियंत्रण रेखा पर बढ़ी निगरानी के कारण सीमा पार से घुसपैठ की घटनाओं में भी भारी गिरावट आई है। इन्हीं वजहों से हताश आतंकी और अलगाववादी शक्तियां घाटी में हिंदुओं और सिखों की लक्षित हत्या करके दहशत फैलाने की कोशिश करती हैं। प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कश्मीरी पंडित समुदाय के सरकारी कर्मचारियों की पिछले महीने हिट लिस्ट जारी करना भी उसी दिशा में उठाया गया कदम था। दहशत की वजह से ये कर्मचारी लगभग सात महीनों से जम्मू के सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरण की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।
पंजाब में मोहाली में हुए ग्रेनेड हमले और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में खालिस्तान के झंडे लहराकर खालिस्तान समर्थक ताकतों ने एक बार फिर से पंजाब में खलबली मचाने की कोशिश की है। पिछले वर्ष 29 अप्रैल को खालिस्तान स्थापना दिवस मनाने को लेकर पटियाला में दो गुटों के बीच हुए संघर्ष ने भी यह साबित कर दिया कि पंजाब में खालिस्तान आंदोलन के स्लीपर सेल अब भी मौजूद हैं। पाकिस्तान इन्हीं स्लीपर सेल को कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए उपयोग करना चाहता है।
- क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, जम्मू