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पिक्चर अभी बाकी है: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही कब तय होगी

Mon, 22 Jun 2026 06:43 AM IST
virag gupta विराग गुप्ता
Updated Mon, 22 Jun 2026 06:43 AM IST
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सार
हाईकोर्ट के फैसले को टेलीग्राम द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी, पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सोशल मीडिया के नियमन व साइबर अपराधों को रोकने के लिहाज से सरकार द्वारा पेश दस्तावेजों और हाईकोर्ट के फैसले का महत्व सदैव बना रहेगा। लोक व देशहित से जुड़े मुद्दों पर समाज और सरकार की तरफ से ऐसी ही सक्रियता जरूरी है।
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टेलीग्राम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूरे देश के लिए अग्नि परीक्षा बनी नीट की सफलता के बाद सरकार में राहत है। मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर प्रतिबंध भी आज से खत्म हो जाएगा। लेकिन पेपर लीक की अफवाहों को रोकने के लिए टेलीग्राम के एडिटिंग फीचर पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंध 30 जून तक जारी रहेंगे। नीट परीक्षा के पांच दिन पहले 16 जून को केंद्र सरकार ने अंतरिम आदेश से टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई। सरकार ने टेलीग्राम के खिलाफ अंतिम आदेश पारित करने के साथ हाईकोर्ट में लिखित जवाब भी दायर कर दिया। टेलीग्राम का मुख्य तर्क यह था कि आपत्तिजनक मैसेजों को रोकने के बजाय पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना गलत व गैरकानूनी है। टेलीग्राम के वकीलों और सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल और अटॉर्नी जनरल की बहस के बाद हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दिया।


इतने सारे काम दो दिन में होने से यह उम्मीद की जा सकती है कि आम लोगों से जुड़े मुकदमों में भी न्याय की रफ्तार तेज होगी। प्रतिबंध खत्म होने के बावजूद हाईकोर्ट के फैसले को टेलीग्राम या दूसरी कंपनियां सुप्रीम कोर्ट में चुनौती जरूर देंगी। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा, सोशल मीडिया के नियमन और साइबर अपराधों को रोकने के लिहाज से सरकार द्वारा पेश दस्तावेजों और हाईकोर्ट के फैसले का महत्व सदैव बना रहेगा। लोकहित और देशहित से जुड़े उन मुद्दों पर समाज और सरकार में बहस और कार्रवाई जरूरी है।


दुनिया भर में टेलीग्राम के एक अरब मासिक ग्राहक हैं, जिनमें 15 करोड़ भारत में हैं। टेलीग्राम की दुबई स्थित एलएलसी यानी विदेशी कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आईटी इंटरमीडियरी नियमों के तहत, टेलीग्राम कंपनी ने नोडल, शिकायत और कंप्लायंस तीनों तरह के अधिकारियों की नियुक्ति का दावा किया है। यह बात सही है, तो फिर टेलीग्राम कंपनी के भारत स्थित कार्यालय का विवरण हाईकोर्ट और सरकार के सामने पेश क्यों नहीं किया गया? सरकार के जवाब के अनुसार, विदेशी कंपनी संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर नहीं कर सकती। केंद्र सरकार ने भारत के डाटा चोरी के आरोप में सैकड़ों चीनी एप्स पर वर्ष 2020 में प्रतिबंध लगाया था, जिसके खिलाफ अदालतों में कोई आदेश पारित नहीं हुआ।
टेलीग्राम और दूसरी विदेशी कंपनियां भारत में आईटी और श्रम कानूनों का पालन नहीं करतीं और खरबों की कमाई पर पूरा टैक्स नहीं देतीं। भारत में ऑफिस की स्थापना और नियमों के पालन के बगैर विदेशी कंपनियों को संविधान के मौलिक अधिकारों का संरक्षण कैसे मिल सकता है?  

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस आदेश की पुष्टि की है, जिसमें कहा गया है कि टेलीग्राम नए डार्क वेब के तौर पर अपराधियों का पसंदीदा नेटवर्क बन गया है। टेलीग्राम के माध्यम से नकल माफिया, आतंकवाद, बच्चों के अश्लील वीडियो, वित्तीय धोखाधड़ी, बैंकों के म्यूल खाते, डिजिटल अरेस्ट और साइबर हमले के मामले बढ़ रहे हैं। परीक्षा माफिया से युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है, तो साइबर अपराधों से देश की अर्थव्यवस्था खोखली हो रही है। सवाल यह है कि नीट परीक्षा खत्म होने के बाद अन्य साइबर अपराधों को रोकने के लिए टेलीग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ सरकार ठोस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?

गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिर्पोटिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) के आंकड़ों के अनुसार, टेलीग्राम के माध्यम से साल 2023 में 75,688 मामलों में 1,359 करोड़ रुपये, साल 2024 में 2.48 लाख मामलों में 1,940 करोड़ रुपये, साल 2025 में 2.75 लाख मामलों में 3,086 करोड़ रुपये तथा साल 2026 के शुरुआती पांच महीनों में 88,713 मामलों में 748 करोड़ रुपये के फ्रॉड के मामले रिपोर्ट किए गए। पिछले चार वर्षों में टेलीग्राम के माध्यम से साइबर अपराध के 6.8 लाख मामलों में 7,133 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड हुए। सरकार ने टेलीग्राम से कहा था कि मोबाइल के आईएमईआई नंबर के आधार पर साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है। सरकार ने वीपीएन के अवैध नेटवर्क के इस्तेमाल को रोकने के लिए भी टेलीग्राम को आदेश दिए थे। ऐसे सभी निर्देशों को टेलीग्राम के साथ अन्य सोशल मीडिया, यूपीआई और डिजिटल पेमेंट कंपनियों के ऊपर सख्ती से लागू करने की जरूरत है।

इस साल जून के शुरुआती 15 दिनों में टेलीग्राम में 16,578 आतंकी समूहों को प्रतिबंधित किया गया, जो नए तरीके से फिर अपराध में लिप्त हो जाते हैं। व्यावसायिक लाभ की वजह से टेलीग्राम जैसी कंपनियां डिजिटल माफिया के मर्ज की जड़ पर प्रहार नहीं कर रहीं। टेलीग्राम कंपनी को इंटरमीडियरी नियमों के तहत मिली कानूनी सुरक्षा खत्म होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर बताते हुए आरोपियों को जमानत देने से इन्कार किया है। कई राज्यों की पुलिस ने टेलीग्राम से जुड़े अपराधों के मामले में व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उसके बावजूद टेलीग्राम कंपनी को अक्तूबर, 2024 के बाद 35 बार सिर्फ चेतावनी देकर उसके खिलाफ आपराधिक मामलों को रफा-दफा कर दिया गया। सरकार ने हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों में कहा है कि टेलीग्राम कंपनी के नोडल, शिकायत और कंप्लायंस तीनों तरह के अधिकारियों का नाम, पता और संपर्क के विवरण जारी होने चाहिए। इससे जनता की शिकायतों के जल्द समाधान के साथ पुलिस और सरकारी अधिकारियों को कानून के अनुपालन में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि इस बारे में केएन गोविंदाचार्य की याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2013 में अनेक आदेश पारित किए थे, जिन्हें 13 वर्षों से लागू नहीं करने से डिजिटल अपराध और नकल माफिया का प्रकोप बढ़ रहा है। टेलीग्राम के सीईओ पावेल दुरोव ने सोशल मीडिया में कहा कि उनकी कंपनी के खिलाफ फेसबुक और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा और सहयोगी भारतीय कंपनियां व्यापारिक साजिश कर रही हैं। इन गंभीर आरोपों के बारे में सरकार ने लिखित जवाब में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार के तहत हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, टेलीग्राम समेत सभी विदेशी टेक कंपनियों के ऊपर भारत के कानूनों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। इससे भविष्य में नीट समेत दूसरी परीक्षाओं में नकल माफिया पर नियंत्रण के साथ साइबर अपराधों में कमी आएगी।                
edit@amarujala.com
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