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तकनीक: क्या एआई प्राचीन यूनानी देवता की तरह है? प्राचीन काल में देवता की तरह ही हर सवाल एआई से पूछ रहे लोग
Sat, 07 Nov 2026 08:48 AM IST
ज्योति भास्कर
वेब कीन, प्रोफेसर, मिशिगन यूनिवर्सिटी।
वेब कीन, प्रोफेसर, मिशिगन यूनिवर्सिटी।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 07 Nov 2026 08:48 AM IST
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जटिल काम में मदद कर रहा एआई
- फोटो :
एआई-अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
कल्पना कीजिए कि आपके सामने जिंदगी का कोई ऐसा सवाल है, जिसका जवाब आपको नहीं मिल रहा। आप हर जतन करके थक जाते हैं। आखिरकार मोबाइल उठाते हैं और चैटबॉट से पूछ लेते हैं। कुछ ही सेकंड में जवाब आपके सामने होता है। धीरे-धीरे यह सिलसिला आपकी आदत में बदलने लगता है। ऐसा केवल आपके साथ नहीं है। पर, क्या आपने कभी सोचा है कि इन्सान आखिर किसी दूसरे स्रोत से जवाब पाने के लिए इतना उत्सुक क्यों रहता है? और, क्या यह पहली बार है, जब उसने किसी शक्ति या माध्यम को अपना मार्गदर्शक बनाया है?
इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमें आज से हजारों साल पीछे प्राचीन यूनान पहुंचना होगा। वहां डेल्फी नामक जगह पर एक ऐसा मंदिर था, जहां दूर-दूर से लोग अपने मुश्किल सवाल लेकर आते थे। मंदिर में मौजूद एक पुजारिन, जिसे डेल्फिक ओरेकल कहा जाता था, देवता अपोलो की ओर से उनके सवालों के जवाब देती थी। माना जाता था कि वह दैवीय संदेश प्राप्त करती थी। लोगों का विश्वास था कि उसके पास ऐसा ज्ञान है, जो आम इन्सान की समझ से परे है। आज फर्क सिर्फ इतना है कि अब लोग जवाब पाने के लिए किसी मंदिर तक नहीं जाते, बल्कि अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर एआई से सवाल पूछते हैं।
इस समानता की एक दिलचस्प मिसाल 2021 में देखने को मिली, जब ‘आस्क डेल्फी’ नाम की एआई वेबसाइट शुरू की गई। यहां लोग सवाल पूछ सकते थे। कुछ ही हफ्तों में इस पर 30 लाख सवाल पूछे गए। इतनी बड़ी संख्या में सवालों ने इसके निर्माताओं को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं लोग इस तकनीक को सही और गलत का अंतिम निर्णायक तो नहीं मानने लगे हैं। इस वेबसाइट का नाम भी प्राचीन यूनानी डेल्फिक ओरेकल से ही प्रेरित था।
यहां एक और दिलचस्प बात है। ‘ओरेकल’ का विचार केवल धर्म और आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गणित और कंप्यूटर विज्ञान में भी पहुंच गया। 1939 में कंप्यूटर विज्ञान के अग्रदूत एलन ट्यूरिंग ने ‘ओरेकल मशीन’ की अवधारणा पेश की। यह एक ऐसी गणितीय मशीन का मॉडल था, जो कुछ सवालों के जवाब पाने के लिए किसी बाहरी स्रोत की मदद ले सकती थी। इस तरह धर्म और गणित, दोनों में ओरेकल का मूल विचार एकसमान दिखाई देता है। एआई के संदर्भ में यह समानता और भी दिलचस्प हो जाती है। एआई के जवाब भले ही कुछ सेकंड में हमारे सामने आ जाते हों, पर उनके पीछे चलने वाली पूरी प्रक्रिया को समझना सरल नहीं है। यहां तक कि इन्हें विकसित करने वाले इंजीनियर और शोधकर्ता भी कई बार इनके अप्रत्याशित व्यवहारों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। यही रहस्य व अस्पष्टता लोगों के मन में इनके प्रति भरोसे के साथ एक तरह का डर भी पैदा करती है।
पिछले साल एआई कंपनी एंथ्रोपिक के साथ हुई एक घटना इसका उदाहरण है। कंपनी ने क्लॉड4 पर किए एक प्रयोग के दौरान पाया कि जब एआई मॉडल को बातचीत के दोनों पक्षों पर रखा गया, यानी वही सवाल पूछने और जवाब देने की भूमिका निभाने लगा, तो बातचीत ने अप्रत्याशित दिशा पकड़ ली। दोनों के बीच संवाद चेतना, आत्म-जागरूकता तथा अस्तित्व जैसे विषयों तक पहुंच गया और बातचीत में आध्यात्मिक, दार्शनिक व काव्यात्मक विचार सामने आने लगे। दिलचस्प बात यह थी कि मॉडल को इस तरह की बातचीत करने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया था।
बेशक, इसका अर्थ यह नहीं है कि एआई में कोई दैवीय शक्ति है या वह आज का नया डेल्फिक ओरेकल बन चुका है। एआई गलतियां भी करता है और कई बार आत्मविश्वास के साथ गलत जानकारी भी दे सकता है। पर, इस पूरे घटनाक्रम में एक बात गौर करने वाली है। हम जिस तकनीक को अपनी सुविधा के लिए बना रहे हैं, धीरे-धीरे उसी से जीवन के जटिल सवालों के जवाब भी मांगने लगे हैं।
शायद यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है। हजारों साल पहले डेल्फी के मंदिर में खड़ा इन्सान भी अपने सवालों के जवाब तलाश रहा था और आज का इन्सान भी। तब उसे उम्मीद थी कि मंदिर की पुजारिन उसे सही रास्ता दिखाएगी, आज उसे लगता है कि एआई उसकी उलझन दूर कर देगा। माध्यम बदल गया है, जवाब देने का तरीका बदल गया है, पर मार्गदर्शक की तलाश करने वाला इन्सान आज भी वैसा ही है।
जेमिनी 4 कार्बन
यह एक उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल है, जिसे विशेष रूप से जटिल तकनीकी समस्याओं, सॉफ्टवेयर निर्माण व साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए विकसित किया गया है। यह जटिल और बहु-चरणीय इंजीनियरिंग और कोडिंग प्रोजेक्ट्स पर बिना रुके कई दिनों तक स्वतंत्र रूप से काम कर सकता है। यह मॉडल उपयोगकर्ता के निर्देशों को समझता है और जरूरत के अनुसार विभिन्न उपकरणों की मदद से काम आगे बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, सॉफ्टवेयर में किसी गड़बड़ी का पता लगाना, उसके कारण को समझना और उसे ठीक करने के लिए कोड तैयार करना। यह अपने काम के परिणामों की जांच भी कर सकता है।
-साथ में, अंबुज तिवारी (द कन्वर्सेशन)