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Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Tamil Nadu What fear is haunting DMK BJP in big preparations to destroy Dravidian politics eyes on 2026 polls

आखिर द्रमुक को कौन-सा डर सता रहा है: द्रविड़ राजनीति को ध्वस्त करने की बड़ी तैयारी में भाजपा, 2026 पर नजरें

Tue, 15 Apr 2025 04:55 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Tue, 15 Apr 2025 04:55 AM IST
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सार
तमिलनाडु में भाजपा और अन्नाद्रमुक के बीच हुए गठबंधन से राजग को मजबूती मिली है, जबकि द्रमुक को सत्ता विरोधी रुझान का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा वहां एक सदी पुरानी द्रविड़ राजनीति को ध्वस्त करने की बड़ी तैयारी में है और इसकी शुरुआत 2026 के विधानसभा चुनाव से हो सकती है।
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Tamil Nadu What fear is haunting DMK BJP in big preparations to destroy Dravidian politics eyes on 2026 polls
तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन का एलान - फोटो : PTI

विस्तार

इस समय कई वजहों से तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। एक तो, अप्रैल, 2026 में वहां विधानसभा के चुनाव होने हैं। हालांकि, चुनाव होने में अभी एक साल का समय बचा है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां अभी से ही लामबंद होने लगी हैं और सबसे ज्यादा सक्रियता भाजपा दिखा रही है। दूसरे, गृह मंत्री अमित शाह ने अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) को राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) खेमे में मिला लिया है। इससे राज्य में राजग खेमा मजबूत बनकर उभरा है। तीसरा, द्रमुक मुख्यमंत्री एमके स्टालिन दो भाषा फॉर्मूला लाकर हिंदी विरोधी आग को भड़का रहे हैं, जिसको लेकर दूसरे राज्यों से तमिलनाडु में काम करने आए समुदायों में भारी नाराजगी है।



चौथा, द्रमुक ने परिसीमन विवाद छेड़ दिया है। द्रमुक नेताओं ने इसे ‘राजनीतिक तख्तापलट’ बताते हुए कहा कि इससे उन राज्यों को लाभ मिलेगा, जिन्होंने अपनी जनसंख्या का सही ढंग से प्रबंधन नहीं किया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा आयोजित बैठक में विपक्षी दलों की जाॅइंट एक्शन कमेटी ने संभावित परिसीमन पर सात सूत्री प्रस्ताव पारित किया। समिति ने परिसीमन की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है और 1971 की जनगणना पर आधारित संसदीय क्षेत्रों की संख्या की सीमा को 25 और वर्षों के लिए बढ़ाने की अपील की है।


पांचवां, समग्र शिक्षा अभियान के लिए केंद्र की ओर से तमिलनाडु को धनराशि जारी नहीं की गई है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार इस बात पर अड़ी हुई है कि इस योजना के लिए केंद्र का हिस्सा तभी जारी किया जाएगा, जब तमिलनाडु केंद्र द्वारा प्रायोजित एक अन्य योजना पीएमश्री के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करेगा। एमओयू में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के साथ-साथ त्रि-भाषा नीति को पूरी तरह लागू करने की सहमति भी शामिल है, जिसका तमिलनाडु सरकार कड़ा विरोध कर रही है।
छठा, द्रमुक के एक वरिष्ठ मंत्री ने एक बैठक में सेक्स वर्कर और हिंदू धर्म के दो संप्रदायों-शैव एवं वैष्णव से जुड़ी अश्लील कहानी सुनाई। बयान इतना विवादित और अशोभनीय था कि इससे न केवल विपक्ष, बल्कि खुद उनकी पार्टी के कई नेता नाराज हो गए। उनकी टिप्पणी का वीडियो वायरल हो गया। इसके कारण मंत्री के. पोनमुडी को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पत्नी दुर्गा और सौतेली बहन कनिमोझी, जो द्रमुक सांसद भी हैं, ने स्टालिन पर मंत्री को बर्खास्त करने का दबाव बनाया। 

सातवां, नैनार नागेंद्रन को भाजपा की राज्य इकाई का नया अध्यक्ष चुना गया है। नागेंद्रन राज्य में भाजपा के 13वें अध्यक्ष बने हैं। नागेंद्रन के नेतृत्व में राज्य की भाजपा इकाई को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। 

इन सभी घटनाक्रमों के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी कार्ययोजना आगे बढ़ाई। उन्हें कई हिंदू धार्मिक समूहों से जानकारी मिली थी कि राज्य के दक्षिणी जिले में हिंदू धर्म से इस्लाम और ईसाई धर्म में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहा है। गवर्नर आरएन रवि ने भी इस बारे में अमित शाह को सूचित किया था। भाजपा का लक्ष्य हिंदू एवं हिंदी विरोधी द्रमुक और एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकना है। पिछले सप्ताह अमित शाह के चेन्नई दौरे ने निश्चित रूप से डीएमके को परेशान कर दिया है।

द्रमुक के शीर्ष नेताओं को द्रविड़ राजनीति के लिए संभावित खतरे का अंदेशा है। पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रामेश्वरम में पंबन पुल का उद्घाटन करने से भी राजनीतिक हलचल मची थी। ट्रेन और जहाज, दोनों लिफ्ट वाले इस पुल का इस्तेमाल समुद्र पार करने के लिए कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का दौरा रामनवमी के दिन हुआ। मोदी ने द्रमुक को भ्रष्ट पार्टी और सरकार को अल्पसंख्यकों को खुश करने में व्यस्त बताया।

अब सबसे पहले तमिलनाडु की वास्तविक राजनीति की बात करते हैं। द्रमुक की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस मंत्रिमंडल में जगह चाहती है। कम्युनिस्ट पार्टी ने कर्मचारियों के लिए 12 घंटे की ड्यूटी जैसे विवादास्पद कानूनों को वापस लेने पर जोर दिया है। द्रमुक ने ट्रेड यूनियन के गठन पर रोक लगा दी है। स्टालिन अपने वरिष्ठ सहयोगियों के कारण भी गंभीर संकट में हैं, जो द्रविड़ राजनीति को पटरी से उतार रहे हैं। इसके अलावा, उनके परिवार के सदस्य भारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। द्रमुक के एक मंत्री पीटीआर राजन ने ही ऐसा आरोप लगाया है।

अब हम कुछ वंशवादी पार्टियों की ओर रुख करते हैं, जो उथल-पुथल में हैं-जैसे 84 वर्षीय डॉ. एस रामदास की अध्यक्षता वाली पाट्टली मक्कल काची। पिता-पुत्र पार्टी के विशाल वित्तीय संसाधनों के लिए लड़ते हैं। नाम तमिलर काची के नेता सीमान ईवी रामासामी नायकर की उच्च जातियों के खिलाफ नीतियों की आलोचना करते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। सिने अभिनेता विजय जोसेफ ने तमिल वेत्री कझगम नामक नई पार्टी बनाई है। द्रमुक के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान का फायदा उठाने के लिए विजय जोसेफ ने मोर्चा बनाया है। यही तमिल राजनीति की कहानी है।

जिधर से भी आप देखें, भाजपा आगे बढ़ रही है। भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से राज्य में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है और उसे इसमें धीरे-धीरे सफलता भी मिल रही है। तमिलनाडु में केंद्र की सामाजिक कल्याण योजनाओं के अनेक लाभार्थी हैं, जो भाजपा व उसके गठबंधन के लिए अनुकूल हैं। राज्य की भाजपा इकाई के पूर्व प्रमुख के. अन्नामलाई ने मेरी धरती, मेरे लोग नामक पदयात्रा की थी, जिसे ग्रामीण लोगों का समर्थन मिला था। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा राज्य में पहले से ही अपने नेताओं को एक बड़े अभियान के लिए उतार रही है। हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा ने जो रणनीति अपनाई थी, वही राजनीति अमित शाह राज्य विधानसभा चुनाव में अपनाने की योजना बना रहे हैं। भाजपा एक सदी पुरानी द्रविड़ राजनीति को ध्वस्त कर सकती है। और इसकी शुरुआत 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से होगी।

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