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साहस, संकल्प और सुनीता: सकुशल वापसी महज वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, धैर्य की अद्भुत मिसाल भी है

Thu, 20 Mar 2025 05:20 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 20 Mar 2025 05:20 AM IST
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सार
नासा के दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों-भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की करीब नौ महीनों के लंबे अंतरिक्ष मिशन के बाद सकुशल पृथ्वी पर वापसी महज एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय संकल्प, धैर्य और साहस की अद्भुत मिसाल भी है। 
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Sunita Williams Return Tale of Courage determination scientific achievement is also example of patience
कैप्सूल से बाहर निकलने पर सुनीता ने किया अभिनंदन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों-भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की करीब नौ महीनों के लंबे अंतरिक्ष मिशन के बाद सकुशल पृथ्वी पर वापसी महज एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय संकल्प, धैर्य और साहस की अद्भुत मिसाल भी है। उनके इस कामयाब मिशन ने अंतरिक्ष अनुसंधान के नए द्वार तो खोले ही हैं, मानवता को सितारों तक पहुंचने की उसकी क्षमता पर भरोसा भी दिलाया है।



ये दोनों अंतरिक्ष यात्री पिछले वर्ष जून में बोइंग और नासा के आठ दिनों के जॉइंट क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन पर गए थे, जिसका उद्देश्य बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन तक पहुंचाने और वापस लेने की क्षमता का परीक्षण करना था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के चलते इनका आठ दिन का सफर नौ महीने और 14 दिनों में तब्दील हो गया। कभी-कभी विज्ञान में योजनाएं बदलती हैं, और इन्हीं बदलावों के बीच नई खोजों के द्वार खुलते हैं-यह मिशन इसका ही प्रतीक है।


नौ महीनों से ज्यादा वक्त तक अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के माहौल में रहना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, क्योंकि इस दौरान मनुष्य की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्थितियों में काफी परिवर्तन होते हैं। इसके अलावा, हड्डियों की सघनता, नींद की गुणवत्ता, हृदय प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और दृष्टि इत्यादि पर पड़ने वाले प्रभाव भी अध्ययन के विषय होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इस तरह का डाटा एकत्र करने के लिए वर्षों तक योजनाएं बनानी पड़ती हैं, लेकिन इस मिशन का अनियोजित विस्तार इन अध्ययनों के लिए एक अप्रत्याशित संसाधन बन गया है, जो भविष्य में दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों के लिए अत्यंत मूल्यवान सिद्ध होगा।

कहना अनुचित न होगा कि सुनीता विलियम्स और बुच का यह मिशन न केवल नासा के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक छिपा हुआ वरदान साबित हुआ है। यह अनुभव हमें यकीनन अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने के करीब पहुंचाएगा और इससे हम यह भी जान पाएंगे कि हमारे शरीर और दिमाग बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किस हद तक ढल सकते हैं। निस्संदेह भारत के लिए भी यह गर्व का क्षण है कि भारतीय मूल की एक बेटी ने विश्व के कठिनतम अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारत, जो फिलहाल गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों में जुटा है, के लिए भी यह कामयाबी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मिशन से प्राप्त आंकड़े भविष्य में चंद्र, मंगल समेत सभी मिशनों के लिए मार्गदर्शक साबित होंगे।

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को निश्चित ही इसका श्रेय जाएगा कि उन्होंने अंतरिक्ष में रहते हुए पृथ्वी पर विज्ञान का क्षितिज और व्यापक किया। उनकी वापसी एक मिशन का अंत नहीं, अलबत्ता अंतरिक्ष अनुसंधान के अगले अध्याय की शुरुआत मानी जानी चाहिए।

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