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गन्ना किसानों की बढ़ेंगी मुश्किलें
के सी त्यागी
Updated Mon, 31 Jul 2017 07:07 PM IST
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के सी त्यागी
उत्तर प्रदेश में गन्ने का मूल्य तय करने के लिए रंगराजन फॉर्मूले की सिफारिश पर अमल की प्रक्रिया तेज हो गई है। केद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है, जिसमें राज्य समर्थित मूल्य यानी एसएपी को समाप्त कर एफआरपी यानी फेयर रिम्यूरेटिव प्राइज नीति की वकालत की गई है। इसका मतलब है कि उचित एवं लाभकारी मूल्य के अनुसार गन्ने का दाम तय किया जाए।
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मगर रंगराजन फॉर्मूले के तहत चीनी मिल मालिकों द्वारा उत्पादन में आए खर्च के आकलन को आधार बनाकर गन्ना किसानों को उत्पाद की कीमत दिए जाने की बात से किसानों में असंतोष है। संदेह है कि गन्ने की कीमत निर्धारित करने समय मिल मालिकों का पक्ष हावी न हो जाए। इस प्रणाली के तहत मिलों द्वारा गन्ना से निर्मित चीनी के विक्रय भाव की औसतन वसूली का 75 फीसदी हिस्सा किसानों को दिया जाना प्रस्तावित है। अच्छी उपज की स्थिति में 0.1 फीसदी रिकवरी रेट पर एफआरपी, जो केंद्र द्वारा तय की जाती है, पर 2.68 रुपये की बढ़ोतरी का प्रावधान है। इस प्रावधान में रिकवरी रेट के साथ जुड़ी शर्त किसानों को परेशान करने वाली है। किसान संगठनों का आरोप है कि रंगराजन फॉर्मूले से गन्ना मूल्य तय करने की नीति शुगर लॉबी के इशारे पर आधारित है और उत्तर प्रदेश के किसान इस मूल्य नीति के पक्ष में नहीं हैं।
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गन्ने की कीमत की राजनीति को समझने के लिए दो आवश्यक तथ्यों को समझने की जरूरत है। इसकी पहली कीमत एफआरपी यानी उचित और लाभकारी मूल्य केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है। इसके बाद यूपी सरकार एसएपी यानी राज्य परामर्श मूल्य की घोषणा करती है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि एसएपी हमेशा केंद्र की घोषित कीमत से अधिक होता है और इससे उत्पादकों की यथासंभव मदद भी हो जाती है। अक्तूबर से शुरू हो रहे फसल वर्ष 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने एफआरपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर उसे 255 रुपये प्रति क्विंटल किया है। पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की एफआरपी में कोई इजाफा नहीं हुआ था और यह 230 रुपये प्रति क्विंटल था। जब गन्ने का एफआरपी 230 रुपये प्रति क्विंटल था, तब उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार 280 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय कर चुकी थी।
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यानी राज्य सरकार किसानों को घाटे से उबारने और उचित कीमत प्रदान करने की कोशिश में 50 रुपये प्रति क्विंटल अधिक प्रदान कर रही थी। सपा सरकार ने तीन वर्षों तक राज्य परामर्श मूल्य में कोई मूल्य वृद्धि नहीं की थी, मगर 2017 में चुनावी वर्ष में उसने इसमें 30 रुपये की वृद्धि की थी।
उत्तर प्रदेश के करीब 40 जिलों में गन्ने की खेती होती है और तकरीबन पचास लाख किसान इससे जुड़े हैं। केंद्र के नए निर्देश से किसानों के बीच राज्य परामर्श मूल्य को खो देने का भय घर कर गया है। चूंकि इस निर्देश के तहत एसएपी को समाप्त कर केवल एफआरपी देने की बात की जा रही है, निश्चित रूप से किसानों को एसएपी से हाथ धोना पड़ेगा। वर्तमान रिकवरी रेट 9.5 फीसदी है, जिसका मतलब है कि एक क्विंटल गन्ने से 9.5 किलोग्राम चीनी बनेगी।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों में उपज भी अच्छी होती है और रिकवरी दर भी लगभग 12 से 13 फीसदी होती है। लिहाजा वहां के किसानों को एफआरपी प्रक्रिया के तहत घाटा नहीं होता। जहां तक उत्तर प्रदेश के किसानों का सवाल है, रिकवरी रेट की वजह से यह फैसला प्रतिकूल साबित हो सकता है।
- लेखक जय(यू) के प्रवक्ता हैं