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मंत्री पद पर विवादास्पद नियुक्तियों के लिए घर में ही घिरे इमरान खान
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पाक प्रधानमंत्री इमरान खान
- फोटो : एएनआई
एक क्षण के लिए ऐसा लगा, मानो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की दिवंगत अध्यक्ष बेनजीर भुट्टो नेता प्रतिपक्ष के रूप में नेशनल एसेंबली में सत्ता पक्ष की आलोचना कर रही हैं। लेकिन यह वह नहीं, बल्कि उनके इकलौते बेटे और पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी थे, जिन्होंने संदिग्ध अतीत वाले लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए पीटीआई सरकार पर हमला कर मृत पड़े निचले सदन में जान फूंक दी। अपने भाषण के कुछ हिस्से में वह अपनी मां की तरह बोल रहे थे, खासकर तब, जब सत्ता पक्ष के लोग उन्हे बोलने नहीं दे रहे थे, तब उनकी तरफ मुड़कर उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में सवाल पूछा ही जाएगा।'
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प्रधानमंत्री चुने जाने से पहले इमरान खान संसद की बैठकों में शामिल होना पसंद नहीं करते थे। जब वह विपक्ष में थे, तब कभी-कभार ही निचले सदन में आते थे। उनके एक करीबी सहयोगी ने मुझे बताया कि उन्हें संसद की कार्यवाही बहुत ऊबाऊ लगती है। सदन के नेता चुने जाने के बाद फिर इमरान खान सदन से दूर रहते हैं, और अब उनका बहाना है कि विपक्षी पार्टी उन्हें बोलने नहीं देती और प्रश्नों से तंग करने की उसकी आदत वह बर्दाश्त नहीं कर सकते।
इस हफ्ते बिलावल भुट्टो ने प्रधानमंत्री को 'भूतिया कर्मचारी' बताया, जो संसद में आए और सत्र में उपस्थित हुए बिना वेतन लेते हैं। लेकिन बिलावल का तीखा हमला प्रधानमंत्री की उस पसंद को लेकर है, जिसमें उन्होंने गैर निर्वाचित लोगों को सलाहकार बनाया है। उनमें से सभी पीपीपी, पीएमएल (एन) या सेवानिवृत्त जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। मंत्रिमंडल में पीटीआई के सांसदों की संख्या बहुत कम है। इन गैर निर्वाचित सलाहकारों के साथ सबसे खतरनाक बात यह है कि ये संसद के प्रति जवाबदेह नहीं हैं, बल्कि उनके प्रति जवाबदेह हैं, जिन्होंने इन्हें नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री ने भी अपना काम करने में विफल रहे मंत्रिमंडल के सदस्यों की जिम्मेदारी नहीं ली है। हां, भविष्य के लिए उन्होंने चेतावनी जरूर दी कि काम न करने वाले मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया जाएगा।
अलबत्ता बिलावल ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर किसी को अपने पद से हटना था, तो वह अक्षम और अयोग्य प्रधानमंत्री को हटना चाहिए था। बिलावल इमरान खान को इलेक्टेड (निर्वाचित) के बजाय सिलेक्टेड (चुने गए) प्रधानमंत्री कहकर यह संकेत देते हैं कि वह ताकतवर पाकिस्तानी सेना के कंधे पर चढ़कर सत्ता में आए हैं।
हाफिज शेख वित्त मंत्रालय में नए सलाहकार हैं, जो इसी पद पर आसिफ अली जरदारी की सरकार और बाद में सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ के मंत्रिमंडल में भी काम कर चुके हैं और वाशिंगटन के करीबी बताए जाते हैं। बिलावल ने प्रधानमंत्री से पूछा, 'क्या आपने वित्त मंत्री असद उमर को इसलिए बर्खास्त कर दिया, क्योंकि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठनों के समर्थन से चुनाव लड़ा था? क्या आपने आतंकवादी और प्रतिबंधित संगठनों से संबंध रखने वाले सभी मंत्रियों को हटाए जाने की मेरी मांग मान ली है?' दरअसल चुनाव के दौरान पीटीआई के कई सदस्य, जिनमें मौजूदा राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और पूर्व वित्त मंत्री असद उमर भी शामिल थे, वोट मांगने के लिए प्रतिबंधित जेहादी समूहों से मिले थे। बिलावल ने आगे कहा कि 'अगर सत्ता पक्ष के लोग सोचते हैं कि वे हमें अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर और दबाव डालकर चुप करा देंगे, तो ऐसा संभव नहीं है। जब जिया उल हक, अयूब खान और परवेज मुशर्रफ जैसे तानाशाह हमें नहीं रोक सके, तो यह कठपुतली सरकार हमारे सामने कुछ भी नहीं है।'
इमरान खान ने जो सबसे ज्यादा विवादास्पद नियुक्ति की है, वह गृह मंत्री के रूप में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर एजाज शाह की है, जिन पर बेनजीर भुट्टो और अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्याओं के आरोप हैं। अंग्रेजी दैनिक द न्यूज ने भी एजाज शाह की नियुक्ति के लिए इमरान खान पर हमला बोला है। उसने अपने संपादकीय में लिखा है, 'एजाज शाह सबसे विवादास्पद हैं। शाह पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के विश्वस्त सहयोगी थे, वह इंटेलिजेंस ब्यूरो के महानिदेशक के रूप में काम कर चुके हैं, और उन पर कई तरह से राजनेताओं को धमकाने और जबर्दस्ती करने का आरोप है। बेनजीर भुट्टो ने भी उन पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था।'
बिलावल भुट्टो ने सत्ता पक्ष से सवाल किया कि 'आप दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या आप दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि हमारे मंत्रिमंडल में आतंकवादी और उनके सूत्रधार शामिल हैं?'
नेशनल एसेंबली में इमरान खान को इसके लिए भी आलोचना सुननी पड़ी कि अपने हाल के ईरान दौरे में उन्होंने तेहरान को बताया कि उनके यहां आतंकी हमलों के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकवादी जिम्मेदार थे। हालांकि कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री की इस स्वीकारोक्ति का स्वागत भी किया है। इस क्षेत्र के हर देश में आतंकवादी समूह हैं, जिनका इस्तेमाल दूसरे देश के खिलाफ किया जाता है। अगर ईरान और पाकिस्तान इन आतंकी समूहों के खिलाफ मिलकर काम कर सकते हैं, तो निश्चित रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भारत भी सहयोग कर सकते हैं। काबुल के सहयोग से पाक तालिबान निरंतर पाकिस्तान में हमले करते हैं।
कुछ टिप्पणियों में इमरान खान द्वारा ईरान में दिए गए बयान को गलत ढंग से उद्धृत किया गया, पर मीडिया के लिए उनकी नई विशेष सहायक फिरदौस आशिक आवान ने जियो टीवी को बताया कि यह स्वीकार करना पाकिस्तान की नीति है कि उसके यहां आतंकी समूह रहते हैं और उन्हें खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी हितसाधकों ने मिलकर मौजूदा आतंकी समूहों को खत्म करने का फैसला किया है। उन्होंने संकेत दिया कि इमरान खान के इस बयान से सेना भी सहमत है।
पर नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ ने कहा कि 'विदेशी धरती पर विदेशी नेताओं के साथ बैठकर अपने ही देश को बदनाम करने का ऐसा उदाहरण राष्ट्रीय और कूटनीतिक इतिहास में नहीं मिलता। कल्पना कीजिए कि ईरानी नेतृत्व क्या सोच रहा होगा!'