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सख्ती बनी रहे: ऑपरेशन सिंदूर के बाद घुसपैठ की जमीनी सच्चाइयां उजागर, समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए...

Tue, 03 Jun 2025 09:23 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 03 Jun 2025 09:23 AM IST
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सार
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अब तक 2,000 से भी अधिक अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस उनके देश भेजे जाने की कार्रवाई सीमा पार अवैध घुसपैठ की जमीनी सच्चाइयों को उजागर करती है। यह सख्ती बनी रहे, तभी समस्या के दीर्घकालिक समाधान की उम्मीद की जा सकती है।
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Strict Vigilance should remain After Operation Sindoor infiltration exposed long term solution demand vigil
घुसपैठ के खिलाफ भारत में सख्त कार्रवाई (फाइल) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अब तक 2,000 से अधिक अवैध बांग्लादेशियों को वापस उनके देश भेजे जाने की खबर सीमा से सटे राज्यों में अवैध प्रवासियों की पहचान कर वापस भेजने के अभियान में बड़ी सफलता को तो दर्शाती ही है, यह अवैध घुसपैठ की जमीनी सच्चाई को भी उजागर करती है।



अवैध प्रवासन की समस्या भारत के लिए नई नहीं है। पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में यह मुद्दा लंबे समय से सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तनाव का कारण बना हुआ है। कुछ वर्ष पहले के आंकड़ों के अनुसार, भारत में दो करोड़ से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे थे। आज यह संख्या बढ़कर कितनी हो गई, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।


इसके प्रत्यक्ष और परोक्ष परिणाम संसाधनों पर अनावश्यक बोझ, राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे, स्थानीय जनसांख्यिकीय संतुलन में बदलाव और अपराध में बढ़ोतरी के रूप में दिखते हैं। यह मुद्दा चिंतित करने वाला सिर्फ इसलिए नहीं है, क्योंकि ये अवैध प्रवासी नकली नाम और दस्तावेज हासिल कर पश्चिम बंगाल और असम से दूर दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद तक में अपना ठिकाना बनाते हैं, बल्कि इसलिए भी है, क्योंकि उनको पहचानना और पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

अगर पहचान हो भी गई, तो राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में उन्हें वापस भेजना टेढ़ी खीर साबित होता है। ऐसे में, गृह मंत्रालय के निर्देश पर गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, असम, मेघालय और त्रिपुरा जैसे राज्यों में अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने का अभियान जोर-शोर से चल रहा है, जो स्वागतयोग्य है।

इस मामले में गुजरात से दूसरे राज्यों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए, जिसने इस अभियान को सबसे पहले शुरू तो किया ही, अब वह इसमें अग्रणी भूमिका भी निभा रहा है, जिसकी बदौलत वहां अवैध प्रवासी आधे से भी कम रह गए हैं। बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने पिछले महीने इस अभियान पर आपत्ति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद भारत ने अपने ढंग से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे पहले है। ताजा अभियान की खास बात यह है कि इसमें बायोमेट्रिक्स को भी कैप्चर किया जा रहा है, जिससे अगर अवैध घुसपैठिये दोबारा भारत में प्रवेश करने की कोशिश करें, तो उन्हें रोका जा सके।

हैरानी की बात यह है कि इस अभियान के डर से हजारों प्रवासी स्वेच्छा से भारत-बांग्लादेश सीमा पर पहुंचे हुए हैं। यह दर्शाता है कि सख्त सरकारी नीतियां अवैध प्रवासियों की समस्या से निपटने में कारगर साबित हो सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए सीमा सुरक्षा के तंत्र को और मजबूत किए जाने के साथ बायोमेट्रिक डाटाबेस के विस्तार और कूटनीतिक उपायों पर भी ध्यान देना श्रेयस्कर होगा।

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