फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Stock market ahead of China in race emerging markets India credibility and acceptance increased global stage

शेयर बाजार: उभरते बाजारों की दौड़ में चीन से आगे, वैश्विक मंच पर भारत की साख और स्वीकार्यता में हुई वृद्धि

Mon, 23 Sep 2024 04:20 AM IST
Surjit Singh Surjit Singh
Updated Mon, 23 Sep 2024 04:20 AM IST
विज्ञापन
सार
मॉर्गन स्टेनली के दोनों सूचकांकों में भारत के वेटेज का बढ़ना बताता है कि वैश्विक मंच पर भारत की साख और स्वीकार्यता में वृद्धि हुई है।
loader
Stock market ahead of China in race emerging markets India credibility and acceptance increased global stage
भारतीय शेयर बाजार (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिनों में भारत के शेयर सूचकांक ने नई उंचाइयों को छुआ है। सरकार की दीर्घकालीन आर्थिक नीतियों और सकारात्मकता का ही परिणाम है कि भारत की मध्यम और छोटी कंपनियां, बड़ी कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। उभरते बाजारों में भारत निवेशकों का पसंदीदा देश बन रहा है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में, जापान के बाद भारत निवेशकों का दूसरा पसंदीदा देश है।



एक सितंबर से 13 सितंबर तक, कुल 13 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा 53 हजार करोड़ रुपये का भारत में निवेश हुआ है, जिनमें से 28 हजार करोड़ का निवेश स्टॉक मार्केट में हुआ है। शेयर बाजार में तेजी ने न सिर्फ विदेशी निवेशकों को, बल्कि घरेलू निवेशकों को भी आकर्षित किया है। शेयर बाजार में मिलने वाले अच्छे रिटर्न ने निवेशकों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। पिछले चार वर्षों में भारतीय निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। परंपरागत क्षेत्रों, जैसे सोना और प्रॉपर्टी में निवेश के अलावा लोगों की शेयर बाजार में भी दिलचस्पी बढ़ी है। इंटरनेट और मोबाइल के प्रसार ने शेयर बाजार की जानकारी और निवेश को लेकर जागरूकता बढ़ाई है। यानी वित्तीय साक्षरता में होने वाली वृद्धि ने लोगों को निवेश करने के लिए प्रेरित किया है।


यही कारण है कि इन्वेस्टमेंट रिसर्च फर्म मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल (एमएससीआई) के नवीनतम सूचकांक में भारत ने चीन को पछाड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है। एमएससीआई विभिन्न देशों, क्षेत्रों और उभरते बाजारों के आधार पर अनेकों प्रकार के सूचकांक जारी करता है, जिनमें दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं, पहला, उभरते बाजार निवेश योग्य बाजार सूचकांक (ईएम आईएमआई) और दूसरा, उभरते बाजार का मानक सूचकांक (ईएम सूचकांक)। इन दोनों सूचकांकों में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। पिछले कुछ महीनों में छोटी कंपनियों द्वारा अच्छा प्रदर्शन किया गया, जिसके कारण ईएम आईएमआई सूचकांक के पोर्टफोलियो में 25 नए स्टॉक के जुड़ने से भारत के वेटेज में 21 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जबकि चीन के वेटेज में 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शेयरों को शामिल करने और वेटेज तय करते समय, एमएससीआई विदेशी फंडों के लिए उपलब्ध गुंजाइश पर विचार करती है। वर्तमान में एमएससीआई के कुल पोर्टफोलियो में 18.5 प्रतिशत भारतीय स्टॉक हैं।

चीन का कुल बाजार पूंजीकरण 8.14 लाख करोड़ डॉलर है, जो भारत के 5.03 लाख करोड़ डॉलर से 60 फीसदी अधिक है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल के अंत तक ईएम सूचकांक में भी भारत, चीन को पीछे छोड़ देगा, क्योंकि पिछले दिनों चीन के लगभग 60 खराब प्रदर्शन करने वाले स्टॉक को हटा दिया गया है, जबकि भारत के अच्छा प्रदर्शन करने वाले सात स्टॉक को इसमें जोड़ा गया है। नए परिवर्तनों के बाद भारत का वेटेज जहां 84 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं चीन के वेटेज में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। वर्तमान में चीन का वेटेज 23.7 प्रतिशत है और भारत का प्रतिशत 20.6 प्रतिशत है।

मॉर्गन स्टेनली के दोनों सूचकांकों में भारत के वेटेज का बढ़ना यह सिद्ध करता है कि वैश्विक मंच पर भारत की साख और स्वीकार्यता, दोनों में वृद्धि हुई है। सरकार की अनुकूल नीतियों और भारतीय निगमों के प्रभावशाली प्रदर्शन के कारण देश न सिर्फ निरंतर आर्थिक प्रगति कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को भी बढ़ावा मिल रहा है। भारत मौद्रिक और राजकोषीय घाटा आदि के क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। साल 2024 की शुरुआत में एफडीआई में 47 प्रतिशत की वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों में कमी, ऋण बाजारों में पर्याप्त विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) आदि ऐसे सकारात्मक कारक रहे हैं, जिसके चलते घरेलू निवेशकों द्वारा भी अधिक पैसा शेयर बाजार में निवेश किया जा रहा है। भारत का वेटेज चीन से ज्यादा होने एवं अमेरिका में मंदी की आहट से विदेशी निवेशकों का भारतीय कंपनियों पर भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में छोटी और मध्यम दर्जे की कंपनियों के शेयर बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ने की संभावना है।

भारतीय बाजारों के बढ़ते महत्व को बनाए रखने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए घरेलू और विदेशी, दोनों प्रकार की पूंजी पर विशेष बल देना होगा। 2047 तक भारत को विकसित देशों में शामिल करने के लिए निवेश की गति एवं वैश्विक बाजार में भारत के भरोसे को बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक ढांचे को विकसित करना होगा। इसके लिए उदार निवेश नियमों के द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को एक अनुकूल आर्थिकी प्रदान करनी होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed