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समाधान : ऊर्जा दक्षता को मिले नए सिरे से प्रोत्साहन, सरकारें अपनाएं एकीकृत नजरिया

Fri, 13 Dec 2024 06:55 AM IST
Shiv Shukla शिव शुक्ला
Updated Fri, 13 Dec 2024 06:55 AM IST
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सार
सरकारें ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए ऊर्जा उपयोग का एकीकृत नजरिया अपनाएं और उन्हें पारंपरिक ईंधनों से बिजली की तरफ ले जाने के प्रयास करें।
 
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Solution: Energy efficiency should get fresh impetus, governments should adopt integrated approach
पवन ऊर्जा - फोटो : Freepik

विस्तार

उर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की पहल के तहत आज से राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह शुरू हो रहा है, जो 20 दिसंबर तक चलेगा। बिजली उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने और बिजली आपूर्ति गुणवत्ता में सुधार के साथ, भारत में बिजली की मांग पिछले एक दशक में 2.3 गुना बढ़ चुकी है और आगे बढ़ ही रही है। इस वर्ष गर्मी में कई राज्यों में विद्युत वितरण ढांचे की विफलता के चलते बिजली कटौती देखी गई, जिससे नए थर्मल पावर प्लांट्स की मांग पैदा हुई है। ऐसे में ऊर्जा दक्षता या बिजली की प्रत्येक यूनिट से अधिकतम कार्य करना, अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने जितना ही महत्वपूर्ण है, ताकि ग्लोबल वार्मिंग और इससे बिजली की मांग में वृद्धि का दुष्चक्र तोड़ा जा सके।


आज भारत एक रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सृजन में दस साल पहले की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत कम ऊर्जा इस्तेमाल करता है। इस सुधार में सबसे बड़ा योगदानकर्ता औद्योगिक क्षेत्र है, जो ‘परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड’ (पीएटी) योजना के माध्यम से काम करता है। उपकरणों के लिए न्यूनतम ऊर्जा खपत मानक और उजाला कार्यक्रम से एलईडी बल्ब आने से बहुत बदलाव हुए हैं। ये कार्यक्रम भविष्य में भी बिजली की खपत में कमी लाते रहेंगे।


लेकिन ऊर्जा दक्षता को विश्वसनीय व किफायती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है? पहला, एक ऊर्जा-कुशल अर्थव्यवस्था को बिजली खपत बढ़ाने का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि बिजली सर्वाधिक कुशल ऊर्जा स्रोत है। हम जितना अधिक बिजली इस्तेमाल की तरफ बढ़ते हैं, हमारी विकासशील अर्थव्यवस्था उतनी ही ज्यादा ऊर्जा कुशल बनती है। सीईईडब्ल्यू का विश्लेषण बताता है कि 2070 में नेट-जीरो उत्सर्जन वाली भारतीय अर्थव्यवस्था में बिजली की खपत दोगुनी होगी। इसलिए, सरकारों को ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए खाना पकाने, आवागमन और औद्योगिक प्रक्रियाओं में ऊर्जा उपयोग का एकीकृत नजरिया अपनाना चाहिए और उन्हें पारंपरिक ईंधनों से बिजली की तरफ ले जाना चाहिए। यहां राज्य सरकारों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बिजली वितरण, औद्योगिक विकास, शहरी नियोजन, परिवहन, रियल एस्टेट और अन्य कई क्षेत्रों का प्रशासन उनके पास है। इस लिहाज से राजस्थान की ड्राफ्ट एनर्जी पॉलिसी 2050 और मुंबई का क्लाइमेट एक्शन प्लान अच्छा उदाहरण पेश करते हैं, जिनमें ऊर्जा-उपयोग के लिए एक दीर्घकालिक रास्ता तैयार किया गया है।

दूसरा, स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में निवेश आकर्षित करने के लिए बिजली मूल्य निर्धारण में सुधार होना चाहिए। बिजली शुल्क को लागत-आधारित बनाना होगा, जिसमें योग्य उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष सब्सिडी देने की व्यवस्था हो। वित्त वर्ष 2023 में सरकारों ने बिजली उपयोग के लिए गैर-लक्षित सब्सिडी में लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। ऐसी गैर-लक्षित सब्सिडी नुकसानदेह है, क्योंकि इसमें जरूरतमंद उपभोक्ताओं की तुलना में बड़े उपभोक्ताओं को ज्यादा सब्सिडी मिलती है। तीसरा, उपभोक्ताओं को न केवल अपनी बिजली खपत, बल्कि उस खपत और बिल को उपयुक्त बनाने वाले बेहतर उपायों की जानकारी होना भी जरूरी है। बीईई का आकलन है कि एसी चलाने के तापमान यानी एसी सेट पॉइंट टेंपरेचर में प्रत्येक एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी उसके मासिक बिल में छह प्रतिशत कमी ला सकती है। अगर एसी के ट्रिगर टेंपरेचर (जब एसी ऑन करने की जरूरत महसूस होती है) को सिर्फ दो डिग्री सेल्सियस बढ़ा दिया जाए, तो 2031 तक बिजली खपत में लगभग 25 प्रतिशत कमी आ सकती है। इसलिए, नीतियों का लक्ष्य उपकरणों के कुशल इस्तेमाल के बारे में उपभोक्ता की जागरूकता बढ़ाना भी होना चाहिए।

अभी तक स्मार्ट मीटर का उपयोग राजस्व वसूली में सुधार के लिए हो रहा है, लेकिन बिजली वितरण कंपनियों को अब इसे उपभोक्ताओं को उनके बिजली खपत पैटर्न और बिलों को घटाने वाले सुझावों की जानकारी देने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। डिस्कॉम, खास तौर पर निजी डिस्कॉम, दिल्ली और गुजरात में, पहले से ही उपभोक्ताओं को ऐसी रिपोर्ट उपलब्ध करा रहे हैं। भारत में ऊर्जा दक्षता के मामले में अब तक जो प्रगति हुई है, उसमें प्रशासनिक माध्यम, जैसे ऊर्जा दक्षता को सुधारने वाले विनियमों और मांगों का एकीकरण करने वाली योजनाओं, का सबसे बड़ा हाथ रहा है। इसका अगला चरण पारंपरिक ईंधन से बिजली को अपनाने की दिशा में परिवर्तन होगा। नीतियों को ऊर्जा दक्षता का एकीकृत नजरिया अपनाकर, ऊर्जा संसाधनों की सही कीमत निर्धारित करके और तकनीक के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण को आम जीवनशैली का हिस्सा बनाते हुए ऊर्जा दक्षता में प्रगति का लाभ लेना चाहिए।
-(डायरेक्टर ऑफ प्रोग्राम्स, सीईईडब्ल्यू) साथ में ध्रुवक अग्रवाल
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