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ठोस कदम, व्यावहारिक उपाय

Thu, 01 Feb 2018 09:12 PM IST
सी एम वासुदेव
सी एम वासुदेव Updated Thu, 01 Feb 2018 09:12 PM IST
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Solid steps, practical solutions
कृषि

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो वर्ष 2018-19 का केंद्रीय बजट पेश किया है, उसे भले ही लोकलुभावन बजट न कहा जाएगा, पर इसे आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर जरूर तैयार किया है। इस बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने, ग्रामीण क्षेत्र का विकास करने, सामाजिक कल्याण पर जोर देने, गरीबों के जीवन को आसान बनाने और वरिष्ठ नागरिकों को राहत पहुंचाने पर ध्यान दिया है। कहा जा सकता है कि सरकार ने आने वाले चुनावों में लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की है, लेकिन उसके सामने आर्थिक चुनौतियां भी हैं, इसलिए उसने इसे लोकलुभावन बजट नहीं बनाया।


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जहां तक कृषि क्षेत्र की बात है, इस बजट में सरकार ने आगामी खरीफ फसल से किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में देने की बात कही है। यही नहीं, कृषि बाजारों को बढ़ावा देने, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी वित्त मंत्री ने बजट में आवंटन किया है। मैं समझता हूं कि कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने और किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए ये सब जरूरी और ठोस कदम हैं।

 स्वास्थ्य के क्षेत्र में वित्त मंत्री ने कई घोषणाएं की हैं, लेकिन जो सबसे बड़ी घोषणा की है, वह आयुष्मान भारत नामक नई योजना के तहत सरकारी खर्चे पर शुरू की गई स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसके तहत दस करोड़ गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा। इससे शहरी एवं ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं हासिल करने में सहूलियत होगी और इलाज के लिए उनके घर, जमीन नहीं बिकेंगे। साथ ही, सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं ग्रामीण इलाकों में आवासीय योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए भी काफी ध्यान दिया है।

वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा के पचास हजार तक के प्रीमियम पर आयकर से छूट मिलेगी। इसके अलावा गंभीर बीमारियों के इलाज पर एक लाख रुपये तक के खर्च पर भी आयकर से छूट दी गई है। वय वंदन योजना के तहत अब वरिष्ठ नागरिक पंद्रह लाख रुपये तक की जमा राशि पर कम से कम आठ फीसदी ब्याज प्राप्त करेंगे। बैंकों और डाकघरों में यदि उनके धन पर पचास हजार रुपये तक ब्याज मिला है, तो उस पर कोई कर नहीं लगेगा। उज्ज्वला योजना के तहत तीन करोड़ नए मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाएंगे। सुकन्या समृद्धि योजना की अच्छी सफलता को देखते हुए इसे और आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

लेकिन सरकार ने आर्थिक विकास दर को आगे बढ़ाने के लक्ष्य की अनदेखी नहीं की है। छोटे एवं मंझोले उद्योग क्षेत्र की 250  करोड़ रुपये वार्षिक टर्न ओवर वाली कंपनियों की टैक्स दर को तीस फीसदी से घटाकर पच्चीस फीसदी कर दिया गया है। यह बड़े उद्योगपतियों को राहत देना नहीं है, बल्कि निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में सीमा शुल्क बढ़ाने से घरेलू उद्योगों को फायदा पहुंचेगा। विकास दर में तेजी लाने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर काफी बल दिया है, जो उम्मीदें जगाता है। लेकिन सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ गया है। राजकोषीय घाटे में जो सरकार ने ढील दी है, वह आगे सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकती है और इससे वित्तीय संतुलन गड़बड़ा सकता है।

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