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ट्रंप की अफगान नीति पर सुस्त अमल
कुलदीप तलवार
Updated Mon, 02 Oct 2017 05:57 PM IST
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कुलदीप तलवार
डोनाल्ड ट्रंप ने जब से अफगान-दक्षिण एशिया की नई नीति घोषित की है और पाकिस्तान को आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने के लिए चेतावनी दी है, तब से पाकिस्तान अमेरिका से सख्त नाराज है। नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि पाक ने अपनी विदेश नीति में बदलाव लाने के लिए कमर कस ली है। ऐसा लगता है कि अमरिका पाकिस्तान को अपना प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का ओहदा घटा सकता है। ऐसे में, पाक सरकार ने भी अमेरिका के खिलाफ सख्त नीति तैयार की है, जिनमें उसके साथ राजनायिक संबंध सीमित करना, आतंक-विरोधी मुद्दों पर साझा सहयोग कम करना तथा अफगानिस्तान पर अमेरिकी रणनीति में असहयोग करना और जरूरत पड़ने पर अफगानिस्तान को सड़क मार्ग से होने वाले साजो-सामान की आपूर्ति पर रोक लगाना शामिल है।
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पाक प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन पाकिस्तान की सैनिक मदद बंद या कम करता है या फौज व खुफिया एजेंसियों के अफसरान पर पाबंदी लगाता है, तो दहशतगर्दी के खिलाफ उसकी लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। उनके मुताबिक, अगर अमेरिका इस्लामाबाद को एफ-16 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति रोक देता है, तो उसे मजबूरी में रूस और चीन से जंगी सामान हासिल करना होगा। पाक विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले वाशिंगटन जाना चाहते थे, पर अचानक अपना इरादा बदलकर वह चीन चले गए, जहां उन्होंने ट्रंप की नई अफगान नीति की जमकर नुक्ताचीनी की। उनका चीन दौरा ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र सामने आने के बाद हुआ, जिसमें लश्कर, जैश, तहरीक-ए-तालिबान और हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने और ऐसे संगठनों को शह देने वाले देशों पर शिकंजा कसने का आह्वान किया गया था। हालांकि ख्वाजा आसिफ ने माना कि पाकिस्तान में ऐसे संगठन हैं, जो पड़ोसी देशों में आतंक फैला रहे हैं। चीन के बाद उन्होंने ईरान और तुर्की का दौरा किया। इससे पता चलता है कि इस्लामाबाद की विदेश नीति पाकिस्तान को अमेरिकी छतरी से बाहर निकालकर चीन, रूस, ईरान व तुर्की के नए पावर ब्लॉक का हिस्सा बनने की कोशिश करेगी।
ट्रंप की अफगान नीति के सामने आने के बाद अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने की उम्मीद थी। पर अमेरिका में हबीब बैंक की शाखा बंद करने के सिवा और कुछ नहीं हुआ है। अमेरिका ने पाक को 25.5 करोड़ डॉलर की सशर्त सैन्य मदद दी है कि इसका प्रयोग आतंकी संगठनों के खिलाफ किया जाए, जबकि पूरी मदद बंद करने की बात थी। ट्रंप प्रशासन ने तीन हजार अतिरिक्त अमेरिकी फौज अफगानिस्तान भेजने का आदेश जारी किया है। पर इससे काम नहीं चलेगा, क्योंकि तालिबान काफी मजबूत हो चुके हैं। ट्रंप की नई नीति को अमली जामा पहनाने की रफ्तार काफी धीमी है। दरअसल अमेरिका में एक ऐसी लॉबी है, जो पाक के प्रति नर्म रुख रखती है, जबकि ट्रंप समझ चुके हैं कि पाकिस्तान अब तक अमेरिका को ठगता रहा है। इसलिए वह बुश और ओबामा की नीतियों पर चलना नहीं चाहते।
ट्रंप नीति की घोषणा के बाद भारत ने अफगानिस्तान के साथ नई साझेदारी की है, जिसके तहत अफगानिस्तान के 31 प्रांतों में 116 नई परियोजनाएं चलाए जाने की बात कही गई है। नई दिल्ली ने कहा है कि अफगानिस्तान को प्रशासनिक व सामाजिक मदद बढ़ाने के साथ ही दोनों देश सुरक्षा में और बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। ट्रंप की नई अफगान व दक्षिण एशिया नीति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।