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यकीन मानिए, इस बात को याद रखेंगे तो कभी गुस्सा नहीं आएगा
भिक्षु धर्मरक्षित
Updated Thu, 16 Apr 2015 01:44 PM IST
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बहुत समय पहले की बात है। वाराणसी के पास गंगा किनारे किसी बस्ती में एक व्यक्ति रहता था। उसका नाम था, कश्यप घोषाल। लोग कहते थे कि उसे गुस्सा नहीं आता था। वाकई किसी ने उसे गुस्सा होते नहीं देखा था। उसी बस्ती के कुछ लोगों ने सोचा कि कश्यप को गुस्सा दिलाया जाए। उन लोगों ने एक टोली बना ली। उस टोली में से एक व्यक्ति ने कश्यप के नौकर से कहा, यदि तुम अपने स्वामी को गुस्सा दिला दो, तो तुम्हें मैं भारी इनाम दूंगा।
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नौकर तैयार हो गया। वह जानता था कि उसके स्वामी को सिकुड़ा हुआ बिस्तर अच्छा नहीं लगता है। इसलिए उसने उस रात को बिस्तर ठीक नहीं किया। सुबह होने पर कश्यप ने नौकर से केवल इतना ही कहा, कल बिस्तर ठीक नहीं था।
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नौकर ने बहाना बना दिया, और कहा, मैं ठीक करना भूल गया था। आगे मैं ध्यान रखूंगा। मगर दूसरे, तीसरे और चौथे दिन भी उसने बिस्तर ठीक से नहीं बिछाया। तब कश्यप ने नौकर से कहा, लगता है कि तुम बिस्तर ठीक करने के काम से ऊब गए हो, और चाहते हो कि मेरा यह स्वभाव छूट जाए। कोई बात नहीं। अब मुझे सिकुड़े हुए बिस्तर पर भी सोने की आदत पड़ती जा रही है। अब रोज बिस्तर ठीक करने की जरूरत नहीं है।
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यह सुनकर नौकर के हाथ के तोते उड़ गए। वह कश्यप के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और माफी मांगने लगा। बाद में उसने उन व्यक्तियों को भी बता दिया कि कश्यप को गुस्सा दिलाना संभव नहीं है। उन लोगों ने जब इसकी वजह पूछी, तो नौकर ने सारा वृत्तांत कह सुनाया। उसने कश्यप की कही वह बात भी उन्हें बताई कि जब भी कोई बुरी और अप्रिय घटना होती है, तो वह यह सोचने लगते हैं कि इससे भी बुरी बात हो सकती थी।