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पतन से बचने के उपाय

Thu, 20 Jun 2013 10:30 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Thu, 20 Jun 2013 10:30 PM IST
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shiv kumar goyal article

भगवान बुद्ध श्रावस्ती के जेतवन में निवास कर रहे थे। प्रत्येक दिन अनेक भक्तजन उनके सत्संग व दर्शन के लिए आया करते थे। एक दिन एक जिज्ञासु उनके सत्संग के लिए पहुंचा। उसने बुद्ध से पूछा, भगवन, पतन से बचने के लिए क्या-क्या उपाय किए जाने चाहिए?

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बुद्ध ने बताया, धर्म और न्याय पर हमेशा दृढ़ रहना चाहिए। धर्म के प्रति घृणा व संशय पैदा होते ही पतन शुरू हो जाता है। कुसंग करने से भी पतन होता है। अतः सत्पुरुषों का संग ही करना चाहिए। दुर्व्यसनी से दूर रहना चाहिए। जो व्यक्ति गप्प मारने में समय बिताता और क्रोध करता है, उसके पतन की आशंका बनी रहती है। अतः हमेशा कर्मठ व शांतचित्त रहने से पतन से बचा जा सकता है। जिस व्यक्ति को जन्म, जाति एवं धन का अभिमान हो जाता है, वह एक-न-एक दिन गर्त में अवश्य गिरता है। मानव को किसी प्रकार के अहंकार को पास भी नहीं फटकने देना चाहिए। जो व्यक्ति असंयमी और भोगी है, शराबी और जुआरी है, उसके पतन को कोई रोक नहीं सकता।
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भगवान बुद्ध ने पतन के ग्यारह लक्षणों का विस्तार से वर्णन करने के बाद कहा, जो व्यक्ति सत्य, संयम और अहिंसा का पालन करता है, अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करता है, अपनी कमाई का कुछ अंश गरीबों की सेवा-सहायता में खर्च करता है, उसकी सदैव उन्नति होती है।
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इस उपदेश से जिज्ञासु का चित्त शांत हो गया।

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