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यादें: ऑपरेशन क्रॉसरोड्स के 75 साल और परमाणु इतिहास खंगालने की यात्रा

Timothy Neal Peacock टिमोथी नॉयल पिकॉक
Updated Mon, 26 Jul 2021 09:05 AM IST
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Seventy-five years of Operation Crossroads
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

वर्ष 1998 में एक अंधेरे सिनेमा हॉल में रोलां इमेरिख की गॉडजिला फिल्म देखते हुए शुरुआती परमाणु बम विस्फोटों के दृश्य देख मैं हैरान और स्तब्ध हो गया था, जैसे कि मैं इतिहास के सबसे महंगे स्पेशल इफेक्ट्स देख रहा हूं। मैं बीती सदी के 90 के दशक की फिल्मों का प्रशंसक रहा हूं, जिनमें उभरती कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के जरिये फिल्मों के दृश्यों को प्रभावशाली बनाने की कोशिश होती थी। पर गॉडजिला के दृश्य अलग ही थे। बाद में मुझे पता चला कि उसकी फुटेज वास्तविक थी। उस फिल्म को उसके स्पेशल इफेक्ट्स के लिए पुरस्कार मिला, हालांकि वह पुरस्कार उस विशाल छिपकली और न्यूयॉर्क की उन प्रसिद्ध जगहों के कारण मिला, जो छिपकली के कहर से तबाह हो गई थीं, विस्फोटों के धुएं की मशरूम डिजाइनिंग के कारण नहीं। 


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वस्तुतः उस फुटेज के कारण ही परमाणु इतिहास को खंगालने की मेरी यात्रा शुरू हुई और मैं ब्रिटिश लाइब्रेरी के एकलेस सेंटर फॉर अमेरिकन स्टडीज का सदस्य बना, जहां मैंने शुरुआती परमाणु परीक्षण समेत उनके तमाम संग्रहों का अध्ययन किया। उस फिल्म के जिन दृश्यों ने मुझे स्तंभित कर दिया, उन्हें ऑपरेशन क्रॉसरोड्स से लिया गया था। वह 75 साल पहले 1946 में अमेरिका सेना और नौसेना द्वारा प्रशांत स्थित बिकिनी एटॉल में किया गया सैन्य प्रशिक्षण था। विश्वयुद्धों के बाद वह ऐसा पहला सैन्य प्रशिक्षण था, जिसमें परमाणु हथियारों के परीक्षण किए गए थे। उस ऑपरेशन में 42,000 लोगों, करीब 150 वाहनों और 90 से अधिक लक्षित जहाजों और पनडुब्बियों की हिस्सेदारी थी।

तब सैकड़ों कैमरों ने परमाणु हथियारों के परीक्षण से जुड़े दृश्यों को कैद किया था। अमेरिकी सैन्य नीति और वैज्ञानिक अध्ययन के लिहाज से व्यापक पैमाने पर उन परीक्षणों को कैमरों में कैद किया गया था। उस परीक्षण के फिल्मांकन का एक उद्देश्य दुनिया को अमेरिका शक्ति के बारे में बताना भी था। ऑपरेशन क्रॉसरोड्स से परमाणु परीक्षणों से संबंधित भाषा और शब्दावली भी तैयार हुई, जैसे-कॉलीफ्लावर क्लाउड (फुलगोभी की शक्ल में धुएं के गुबार का ऊपर उठना)। ऑपरेशन क्रॉसरोड्स की तस्वीरें और फुटेज 75 साल बाद भी प्रासंगिक हैं। इनका इस्तेमाल प्रोपोगेंडा से लेकर पॉपुलर कल्चर तक, गॉडजिला जैसी फिल्म से इंटरनेट मीम्स बनाने तक में हुआ। इन फुटेजों का इस्तेमाल सूचित करने और विरोध करने के रूप में तो होता ही है, ये सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर प्रयुक्त होते रहे हैं और इन्होंने परमाणु इतिहास के विविध पहलुओं को भी पुनर्परिभाषित किया है। दैत्य को मारने की बमबारी से लेकर (जैसा कि फिल्म में हुआ) मशरूम के आकार के धुएं आदि का स्रोत ऑपरेशन क्रॉसरोड्स ही है।

क्रॉसरोड्स ने एटम बम से जुड़ी फिल्म प्रोफाइल को बुनियादी तौर पर बदल दिया। वर्ष 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए एटम बम की तस्वीरें अनेक अखबारों में प्रकाशित हुई थीं, लेकिन उनके कैमरा फुटेज बेहद सीमित थे। फिर वर्ष 1946 में पूरे अमेरिका में कुछ हजार टेलीविजन सेट्स ही थे। इसलिए सिनेमा न्यूजरील में दिखाए गए क्रॉसरोड्स से जुड़े फुटेजों के जरिये ही अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लोगों ने परमाणु बम की विनाशक क्षमता देखी। 

ऑपरेशन क्रॉसरोड्स का उद्देश्य यह जानना था कि परमाणु हमले का नौसैनिक जहाजों पर कैसा असर पड़ता है, ताकि भविष्य के परमाणु हमलों से बचने के लिए नौसैनिक जहाजों का निर्माण उसके अनुरूप किया जा सके-हालांकि उस समय सिर्फ अमेरिका के पास ही परमाणु बम था। बाद में पशुओं पर परमाणु हमले के असर को भी देखा गया। इसके लिए नौसैनिक वाहनों में सूअर, बकरे और चूहे वहां ले जाए गए थे। क्रॉसरोड्स को आज भी दुनिया में फोटोग्राफी से जुड़े सबसे बड़े आयोजन के रूप में याद किया जाता है। चूंकि फिल्म फुटेज के दुनिया भर में उपलब्ध स्टॉक का लगभग आधा ऑपरेशन क्रॉसरोड्स के फिल्मांकन के लिए लाया गया था, इस कारण हॉलीवुड समेत दुनिया के दूसरे स्टूडियो को महीनों तक फुटेज की कमी से जूझना पड़ा था। उस अभियान में पहली बार ड्रोन कैमरे भी विकसित और इस्तेमाल किए गए।

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एटम बम का आविष्कार इतनी गोपनीयता के बीच किया गया था कि आम जनता तो दूर, हिरोशिमा पर बमबारी तक अमेरिकी कांग्रेस के ज्यादातर सदस्यों तक को इसके बारे में पता नहीं था। अमेरिका के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति हैरी ट्रुमैन को भी इस बारे में अप्रैल, 1945 में तब जाकर पता चला, जब उन्होंने बतौर राष्ट्रपति रूजवेल्ट की जगह ली। इस कारण भी उसके एक साल बाद हुए ऑपरेशन क्रॉसरोड्स को व्यापक प्रचार मिला, जिसमें तत्कालीन सोवियत संघ से भी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था। ऑपरेशन क्रॉसरोड्स के फुटेज की तरह उसकी ध्वनियों को भी उतना ही महत्व मिला। हालांकि अमेरिकी सेना द्वारा बाद में भी कई अभियान चलाए गए, इस बीच परमाणु हथियारों की ताकत भी कई गुना बढ़ गई, लेकिन ऑपरेशन क्रॉसरोड्स के वक्त जितने सैनिक, सैन्य उपकरण और कैमरे थे, बाद में उतने कभी एक साथ इकट्ठा नहीं किए गए। फिल्मों में बमबारी का प्रभाव दिखाने के लिए मशरूम की तरह धुएं का जो गुबार दिखाया जाता है, उसका स्रोत, जाहिर है, ऑपरेशन क्रॉसरोड्स ही है।
 

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