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मिथक और विज्ञान: इंद्रधनुष और नॉर्दन लाइट्स के पीछे भौतिकशास्त्र के सिद्धांत... फिर भी यह जादू तो है ही
Sun, 08 Dec 2024 06:08 AM IST
ज्योति भास्कर
इलोइज स्टीवंस
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Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 08 Dec 2024 06:08 AM IST
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इंद्रधनुष के पीछे वैज्ञानिक कारण
- फोटो :
एएनआई
विस्तार
लंदन में रहने वाली सात वर्ष की जूलिया सोचती है कि क्या इंद्रधनुष जादुई है। सवाल यह है कि अगर वैज्ञानिक उसे समझाएं कि इंद्रधनुष कैसे बनता है, तो क्या वह उनकी बातों पर भरोसा करेगी। एक पोडकास्ट में सात साल की जूलिया और 70 साल के भौतिकशास्त्री प्रो. पार्थ चौधरी के बीच इस विषय पर रोचक चर्चा हुई। जूलिया के सवाल भी आकाश में भरे रंगों की तरह थे। क्या इंद्रधनुष वाकई जादुई होता है? वह हमारे सामने तैरता है, बहुत सुंदर व चमकदार भी होता है। शुरू से ही लोग इंद्रधनुष को जादू समझते रहे हैं।इंद्रधनुष कैसे बनता है? गणितज्ञ अलीन ने पहली बार समझाया
यूनानी मिथक है कि इंद्रधनुष देवी आईरिस एम थी। आईरिस एम मानवीय दुनिया के लिए भगवान का संदेश लेकर आती थी। एक किंवदंती यह भी है कि यदि आप इंद्रधनुष के ऊपर कूदेंगे, तो लड़के से लड़की और लड़की से लड़के बन जाएंगे, क्या हकीकत में ऐसा होता है? लेकिन 13वीं शताब्दी में फारसी गणितज्ञ कमाल अलीन अल्फारिसी ने लोगों को पहली बार समझाया कि इंद्रधनुष कैसे बनता है?
कभी बगीचे में पानी की बूंदों को छिड़कते हुए देखा है?
प्रो. चौधरी, जूलिया से पूछते हैं क्या तुम्हें इंद्रधनुष पसंद है? वह कहती है, बहुत पसंद है, यह जादुई है। प्रो. चौधरी कहते हैं कि जादू हमारे दिमाग में है। उन्होंने कहा कि वह थोड़ा बहुत जानते हैं कि इंद्रधनुष कैसे बनता है? उन्होंने जूलिया से पूछा-क्या तुमने कभी बगीचे में पानी की बूंदों को छिड़कते हुए देखा है? वह कहती है, कभी-कभी और अलग-अलग रंग के होते हैं। प्रो. चौधरी ने कहा-बिल्कुल ठीक। ऐसे ही इंद्रधनुष भी बनता है। वह कहते हैं कि बारिश की बूंदों पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तब प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन से इंद्रधनुष बनता है। वह जूलिया से पूछते हैं कि इंद्रधनुष के रंग किस क्रम में होते हैं, तो वह बताती है कि सबसे ऊपर लाल फिर नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी व सबसे नीचे बैंगनी रंग होता है। हाल ही में कुछ अन्य रंगों के बारे में भी पता चला है।
फिर भी यह जादू तो है ही!
प्रो. चौधरी कहते हैं कि हमारा शरीर एक मशीन है, जो देखने, सूंघने, सुनने और स्वाद लेने में अच्छे से काम करती है। वह जूलिया से कहते हैं कि नॉर्दर्न लाइट्स भी जादुई रूप में काम करती हैं। यह पृथ्वी के उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव पर दिखाई देने वाले प्रकाश का प्राकृतिक प्रदर्शन है और कई रंगों में दिखाई देता है, हालांकि हल्के हरे और गुलाबी रंग सबसे आम हैं। इसकी उत्पत्ति सूर्य से उठने वाली सौर आंधियों या लपटों से होती है, जोकि एक प्रकार की प्राकृतिक घटना है। जूलिया इंद्रधनुष और नॉर्दर्न लाइट्स के निर्माण की प्रक्रिया को जानकर कहती है, ‘फिर भी यह जादू तो है ही।’
(द कन्वर्सेशन से)