{"_id":"61ecb65b435e1f390952cb00","slug":"russia-ukraine-tensions-why-vladimir-putin-aggressive-over-ukraine","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूक्रेन पर हमलावर क्यों हैं पुतिन? ","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
यूक्रेन पर हमलावर क्यों हैं पुतिन?
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
वर्ष 2014 में क्रीमिया पर कब्जा जमा चुकने के बाद व्लादिमीर पुतिन अब यूक्रेन पर कब्जा करना क्यों चाहते हैं? इसका उत्तर आसान नहीं है, क्योंकि पुतिन हमेशा अमेरिका के सामने हीन ग्रंथि से ग्रस्त रहते हैं। वह खुद को आधुनिक पीटर महान मानते हैं, जिन पर रूस को फिर से महान देश बनाने की भारी जिम्मेदारी है। रूस के सम्राट पीटर महान ने 18वीं सदी में रूस का विकास सुनिश्चित किया था। पुतिन रूसी जासूसी एजेंसी केजीबी के एजेंट रह चुके हैं, लिहाजा शीतयुद्धकालीन सोच से बाहर न आ पाना उनकी मजबूरी है।
वह अमेरिका के पूर्व बॉयफ्रैंड की तरह हैं, जो अमेरिका द्वारा 'मुझे भूल जाओ' कहने के बावजूद महाशक्ति देश को भूल नहीं पा रहे। पुतिन को ईर्ष्या होती है कि अमेरिका चीन जैसे देशों के साथ अपने संबंध बढ़ा रहा है। पुतिन की मुश्किल यह है कि वह दुनिया में अपने कद को अमेरिका के साथ अपने रिश्ते के आलोक में देखते हैं। वह इसकी हरसंभव कोशिश में हैं कि 2024 के चुनाव में जीतकर या धोखाधड़ी कर जीवन पर्यंत राष्ट्रपति बने रहें, क्योंकि जब आप शीर्ष पद पर रहकर तमाम छल-छद्म करते हैं, तब आपको यह डर रहता है कि आपके बाद सत्ता में आने वाला आपके छल-छद्म की सजा आपको दे सकता है। इसलिए पुतिन के लिए सत्ता में बने रहना जीवन-मरण का प्रश्न है।
यूक्रेन के प्रति पुतिन के रवैये का जवाब इन्हीं सब स्थितियों के बीच कहीं है। अगर मैं पुतिन का आलोचक होता, तो कहता कि आगे बढ़कर कीव (यूक्रेन की राजधानी) पर कब्जा कर लो। पर इसकी मानवीय कीमत असहनीय हो सकती है। सच यह है कि पुतिन जिस पेड़ पर चढ़े हुए हैं, उससे उतरने के लिए या तो उन्हें कूदना होगा या फिर उतरने की सीढ़ी खुद ही तैयार करनी पड़ेगी। पुतिन ने मौजूदा संकट की पूरी तरह अनदेखी की है, इसलिए उनके अदूरदर्शी कदम पर कोई चुप नहीं बैठेगा।
पुतिन ने यह आक्रामक रुख क्यों अख्तियार किया है? उन्होंने यूक्रेन पर हमला करने के बारे में इसलिए सोचा है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह रूस की सत्ता पर उन्हें बनाए रखने में मददगार साबित होगा। यह समझने के लिए हमें पुतिन की राजनीति को समझना होगा। पिछले दशक में उन्होंने रूसी जनता के सामने खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश किया था, जो देश को शीतयुद्धोत्तर काल में उसकी गरीबी से छुटकारा दिला सकता है। अब पुतिन खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं, जो शीतयुद्धोत्तर काल में देश को उसकी खोई हुई गरिमा लौटा सकता है।
मुझे यह जानकारी रूस के विशेषज्ञ लियेन एरॉन से मिली, जो येल्तसिन : ए रेवोल्यूशनरी लाइफ के लेखक हैं, और अब पुतिन के रूस के भविष्य पर एक किताब लिख रहे हैं। एरॉन के मुताबिक, 1999 के अंत में रूस की सत्ता में आने वाले पुतिन को बोरिस येल्तसिन द्वारा अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण का लाभ मिला। येल्तसिन द्वारा उठाए गए कदमों के कारण तेल, गैस व धातुओं की कीमत बढ़ने के साथ विदेशी निवेश बढ़ा और राजनीतिक स्थिरता भी आई। रूस के मतदाताओं ने पुतिन को 2000 से 2008 तक दो बार चुना, क्योंकि इस दौर में आधुनिक रूस के इतिहास में सर्वाधिक पूंजी निर्माण संभव हुआ।
पर ऊर्जा की कीमत घटने और सुधारों के रास्ते में बाधाएं खड़ी करने के कारण 2011 से 2019 तक रूस की अर्थव्यवस्था स्थिर रही। पुतिन ने रूस के मानव संसाधन का इस्तेमाल करने के बजाय प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया। आर्थिक चुनौतियों का हल निकालने के बजाय पुतिन ने खुद को पश्चिमी हमलों से रूस को बचाने वाले नेता के रूप में पेश किया। पुतिन ने एलान किया कि अगर उन्हें जीवन भर राष्ट्रपति बनाए रखा जाए, तो वह रूस के लिए लगातार युद्ध लड़ते रहेंगे।
पुतिन एक क्रूर नेता हैं, पर उनकी हिंसक मानसिकता रूसी संस्कृति से घुली-मिली है। पूर्व सोवियत संघ का मोह उनमें और उनकी पीढ़ी में बहुत ज्यादा है। वर्ष 2005 में पुतिन की वह टिप्पणी अतिशयोक्ति भरी नहीं थी कि सोवियत रूस का विघटन 20 वीं सदी की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक तबाही था। और चूंकि यूक्रेन का सोवियत संघ से रिश्ता रहा है, और आज भी वहां आठ लाख रूसी रहते हैं, इसलिए यूक्रेन को रूस में मिलाना पुतिन अपना कर्तव्य मानते हैं। वह भूलते हैं कि यूक्रेन की अलग भाषा और संस्कृति है। चूंकि यूक्रेन में राष्ट्रवादी भावना मजबूत हुई है, वहां के स्कूलों से रूसी भाषा हटा दी गई है, इसलिए भी पुतिन को लगता है कि इससे पहले कि यूक्रेन की सेना मजबूत बने और वहां के लोगों में रूस-विरोध की भावना बलवती हो, उसे रूस में मिला लेना ठीक रहेगा। यह इसका उचित समय इसलिए भी है कि कोविड के कारण अमेरिका और दूसरे देश युद्ध के मूड में नहीं हैं।
पुतिन देख रहे हैं कि यूरोपीय संघ में शामिल होता यूक्रेन रूस के अधिनायकवादी शासन और सामाजिक-आर्थिक गतिरोध के बरक्स विकसित हो रहा है। वह चाहते हैं कि यूक्रेन विफल हो, यूरोपीय संघ विखंडित हो और अमेरिकी राष्ट्रपति के पद पर डोनाल्ड ट्रंप हों, ताकि वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल की स्थिति बनी रहे। पुतिन हमेशा ही गलत जगह पर गरिमा पाने की कामना करते रहे हैं। इस लिहाज से वह दयनीय हैं, लेकिन सशस्त्र और खतरनाक भी उतने ही हैं।