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खजाने में रुपये पूरे निकले
शिवकुमार गोयल
Updated Mon, 29 Jul 2013 08:32 PM IST
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लगभग सौ वर्ष पहले की बात है। संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) के इटावा जिले में ओरैया के तहसीलदार थे लाला जयनारायण। वह अपने वेतन का कुछ भाग गरीबों और पशु-पक्षियों के पालन-पोषण के कार्य में खर्च किया करते थे।
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उन्हीं दिनों क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा। तहसीलदार के पास कुछ ग्रामीण पहुंचे। उन्होंने बताया कि गांव में भूख से अनेक वृद्ध, महिलाएं और बच्चे मर चुके हैं। यदि ग्रामीणों को जल्दी ही भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया, तो असंख्य व्यक्ति मर जाएंगे। यह सुनकर तहसीलदार साहब ने खजांची से कहा, इन्हें पांच सौ रुपये खजाने से दे दो। खजांची ने रुपये दे दिए, पर वह तहसीलदार की दयालुता से चिढ़ गया। उसने तहसीलदार के खिलाफ प्रशासन में शिकायत दर्ज करवा दी।
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एक दिन लाला जयनारायण सुबह की पूजा के लिए बैठे थे, तभी चपरासी ने आकर कहा कि कलेक्टर साहब आए हैं और आपको तुरंत बुलवाया है। तहसीलदार साहब ने शांति से कहा, उन्हें जाकर कहो कि मैं पूजा-अर्चना के बाद ही आऊंगा। फिर उन्होंने भगवान से कहा, मैंने खजाने के एक भी पैसे का दुरुपयोग नहीं किया। लोगों की जान बचाने के लिए ही रुपये दिलवाए हैं। आप मेरी रक्षा करें।
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कलेक्टर ने खजाने का निरीक्षण किया, तो रुपये पूरे निकले। उसके कुछ ही महीने बाद लाला जयनारायण तहसीलदार का पद त्यागकर वृंदावन चले गए।