आराम बड़ी चीज है

प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 30 Jan 2014 06:29 PM IST
Rest is big thing
इस मैच में तुम्हें आराम दे रहे हैं...!

मगर मैंने मेहनत की ही कहां है कि मुझे आराम देने लगे?

दो मैच खेल चुके, अब तुम्हें आराम करना चाहिए।

मगर मैं अच्छे रन बना रहा हूं। फील्डिंग भी अच्छी कर रहा हूं, कैच भी नहीं टपकाए हैं। फिर मुझे आराम क्यों दिया जा रहा है?

इसीलिए कि तुम इतना अच्छा खेल रहे हो। यानी अपना पूरा दमखम तुम लगा रहे हो। अब तुम्हें आराम करना चाहिए।

अगर मेरे रन नहीं बन रहे होते, कैच भी छूट रहे होते, तो क्या मुझे इस मैच में शामिल किया जाता?

नहीं...तब तो तुम्हें आराम की और ज्यादा जरूरत होती। आराम सिर्फ शारीरिक ही नहीं होता, मानसिक भी होता है। जब अच्छा खेल रहे होते हैं, तो शारीरिक थकान होती है, यानी आराम जरूरी है। और जब बुरा खेल रहे हैं, तो मानसिक रूप से थके हैं, यानी आराम नहीं, डबल आराम की जरूरत है।

पर मुझे भी तो लगना चाहिए कि थक रहा हूं और मुझे आराम चाहिए। मैं तो तरोताजा हूं- लगातार छह मैच खेल सकता हूं।

यही तो बात है! खिलाड़ी को खेलने का नशा होता है, तब उसे यह भी याद नहीं रहता कि उसका शरीर कहीं से चोटिल भी है। हम यह नहीं कहते कि खिलाड़ी अपनी चोट छिपाते हैं, मगर यह सच है कि उन्हें अपनी चोट के बारे में भी पता नहीं रहता। वह तो जब उसे मैदान से उठाकर लाना पड़ता है, तब समझ में आता है कि चोट कितनी गहरी थी।
आखिर आप कहना क्या चाह रहे हैं?

यही कि जब खिलाड़ी को अपने शरीर के दर्द का भी पता नहीं रहता है, तो उससे यह उम्मीद कैसे की जाए कि वह खुद कह दे कि मैं थक गया हूं।

ऐसा कहेगा, तो उसे घर बैठा देंगे हमेशा के लिए।

इसीलिए हम कह रहे हैं कि आराम कर लो, तुम बहुत थक गए हो! हमारे कहने पर आराम कर लोगे, तो आगे भी खेलते रहोगे। वरना हमेशा के लिए आराम हो जाएगा। बोलो...थके हो या नहीं? आराम चाहिए या नहीं?

हां, मैं बहुत थक गया हूं। यदि एक भी मैच और खेल लिया, तो जरूर घायल हो जाऊंगा। मुझे आराम की बहुत जरूरत है। मुझे अब आराम कर ही लेना चाहिए। इसी में मेरी भलाई है। थैंक्स...मुझ जैसे थके हुए को आराम देने के लिए। आप महान हैं कि मेरी थकान भांप ली और मुझे एक मैच का आराम दे दिया...अब मैं आराम करूंगा...हां, आराम!

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