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आने वाले समय का संकेत: रेपो दर बढ़ने के पीछे अर्थव्यवस्था पर आरबीआई का भरोसा, क्या मुद्रास्फीति में कमी आएगी?

Madhurendra Sinha मधुरेंद्र सिन्हा
Updated Fri, 09 Oct 2026 03:59 AM IST
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सार
त्योहारों के समय रेपो दर में बढ़ोतरी के पीछे आरबीआई का अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा है। पर, सवाल यह है कि क्या ब्याज दरें बढ़ाने से मुद्रास्फीति में कमी आएगी?
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repo rate hike sign of things to come RBI confident over Indian economy will inflation ease during festivals
आरबीआई - फोटो : एआई ग्राफिक्स

विस्तार

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके अपना दृष्टिकोण सामने रख दिया है। पौने चार साल बाद बैंक ने रेट में यह बढ़ोतरी की, जबकि पिछले साल, यानी 2025 में रेपो रेट में कटौती की थी, ताकि कर्ज सस्ते हों और उद्योग-धंधों को प्रोत्साहन मिले। अब जबकि मुद्रास्फीति की छाया गहरी हो गई है और रोजमर्रा की चीजों से लेकर औद्योगिक सामान भी महंगे हो गए हैं, रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप करना स्वाभाविक था।



देश में इस साल अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति की दर 4.82 फीसदी हो गई थी, जबकि जुलाई में यह 4.38 फीसदी थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति बढ़कर 4.84 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.96 प्रतिशत तक पहुंच गई। अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति दर पिछले महीने 5.52 प्रतिशत रही, जो उसके पिछले महीने के 5.32 प्रतिशत से अधिक है। रिजर्व बैंक के लिए यह एक बड़ी चुनौती है और वह मौद्रिक नीतियों के जरिये इस पर अंकुश लगाकर इसे सिर्फ चार फीसदी पर लाना चाहता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक मार्च, 2027 तक कुल 75 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। यानी अभी से लेकर उस समय तक कुल एक फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इससे बाजार में धन की तरलता में कमी आएगी और खर्च कम होगा।


दरअसल, रिजर्व बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के प्रति आश्वस्त है और उसका मानना है कि जीडीपी विकास की दर वित्त वर्ष 2027 में 7.1 फीसदी रहेगी। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय कारणों, जैसे कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल, इसे डगमगा सकता है। इसके अलावा, इस बार के कमजोर मानसून का अनाज उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन, इस बढ़ोतरी के दूरगामी प्रभाव भी होंगे, जैसे बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से लिए जाने वाले कर्ज महंगे हो जाएंगे। रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बड़े बैंकों ने अपनी लोन की ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। इससे कारोबारियों को पहले से ज्यादा ब्याज देना होगा। लेकिन, उससे भी ज्यादा तकलीफ ईएमआई देने वालों को होगी। मान लीजिए ग्राहक ने 7.25 फीसदी की दर से कर्ज ले रखा है, तो अब यह बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी।

यह तो अभी की स्थिति में है, लेकिन जब मार्च तक कुल एक फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी, तो अतिरिक्त भुगतान की राशि और भी बढ़ेगी। त्योहारों के आसन्न समय में इससे मकान खरीदने के इच्छुक लोगों पर भी असर पड़ेगा। फायदा अगर होगा, तो उन लोगों को, जो अपना पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखते हैं, क्योंकि उनके लिए भी ब्याज दरें बढ़ जाती हैं।

विश्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। जाहिर है कि ऐसे में केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाने का जोखिम उठा सकता है। पर, सवाल जरूर उठता है कि क्या ब्याज दरें बढ़ाने से मुद्रास्फीति में कमी वाकई आएगी?

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