फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   RBI Repo relief decision supports Indian economy Trade war looms over the world in Donald Trump era

रेपो और राहत: RBI के फैसले से घरेलू अर्थव्यवस्था को सहारा..; 'ट्रंप काल' में दुनिया पर 'व्यापार युद्ध' का साया

Sat, 08 Feb 2025 05:56 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 08 Feb 2025 05:56 AM IST
विज्ञापन
सार
ट्रंप की नीतियों से पूरी दुनिया में व्यापार युद्ध की आशंकाएं भी पैदा हो गई हैं, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता, तो वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता भी पैदा हुई है। ऐसे में, मौद्रिक नीति में बदलाव के पीछे घरेलू अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के उद्देश्य को समझा जा सकता है।
loader
RBI Repo relief decision supports Indian economy Trade war looms over the world in Donald Trump era
आरबीआई - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा पांच वर्ष में पहली बार रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 6.25 फीसदी करने का निर्णय धीमी हो रही अर्थव्यवस्था को तो प्रोत्साहित करेगा ही, इससे कर्ज की किस्त चुका रहे एक बड़े ग्राहक वर्ग को भी राहत मिलेगी।



दरअसल, यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार बजट में व्यक्तिगत आयकर में कटौती की घोषणा कर आम जनता के हाथों तक अधिक पैसा पहुंचाने का इरादा जता चुकी है। जाहिर है कि दोनों ही कदम उपभोग को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास की गति को तेज करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।


रेपो दर में कटौती का मतलब है कि बैंकों के लिए शीर्ष बैंक से और ग्राहकों को अपने बैंक से उधार लेना सस्ता हो जाएगा। इससे घर, वाहन और दूसरे व्यक्तिगत कर्जों की मासिक ईएमआई में कमी आएगी, जिससे उपभोक्ता खर्च को प्रोत्साहन मिलेगा। यह ऐसे वक्त में बेहद महत्वपूर्ण है, जब अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत दिख रहे हों और घरेलू मांग को पुनर्जीवित करने की जरूरत महसूस की जा रही हो।

दरअसल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, जैसा शीर्ष बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कहते हैं, अपने चरम पर हैं, जिन्होंने भारत की विकास-संभावनाओं पर दबाव बनाया हुआ है। असामान्य मौसमी घटनाएं पहले ही विकास के प्रयासों को कमजोर बना रही थीं, अब ट्रंप की नीतियों से पूरी दुनिया में व्यापार युद्ध की आशंकाएं भी पैदा हो गई हैं, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता, तो वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता भी पैदा हुई है। ऐसे में, मौद्रिक नीति में बदलाव के पीछे घरेलू अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के उद्देश्य को समझा जा सकता है। हालांकि, यह अवश्य है कि सस्ते कर्ज से अगर बाजार में मांग बढ़ती है, तो यह अर्थव्यवस्था के लिहाज से फायदेमंद है, लेकिन अत्यधिक नकदी प्रवाह से पहले से संकट बनी महंगाई बढ़ भी सकती है, जिस पर केंद्रीय बैंक को नजर रखनी होगी।

इसके अतिरिक्त, अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती देने के लिए जरूरी है कि लंबे समय से फंडिंग और कर्ज न मिल पाने की समस्या से जूझ रहे देश के छोटे व मध्यम उद्योग (एमएसएमई) को ताकत मिले। रेपो दर में कटौती सही दिशा में उठाया गया एक कदम भर है। आर्थिक सुधारों को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को संरचनात्मक नीतियों पर अधिक ध्यान देना होगा, ताकि उपभोग व निवेश, दोनों को मजबूती मिले।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed