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जीवन की गुणवत्ता: दुबई का इतना आकर्षण क्यों है? नई गोल्डन वीजा योजना की खबर कुछ शर्तों के अधीन
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अमर उजाला
विस्तार
भारत में जिस एक तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, वह है प्रमुख शहरों में खराब जीवन गुणवत्ता। निस्संदेह सरकार की तरफ से काफी काम किए गए हैं, लेकिन अगर दुनिया के प्रमुख शहरों से तुलना की बात हो, तो हमारे यहां गुणवत्तापूर्ण सड़कों, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, खुली जगहों तक पहुंच, पर्याप्त स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के मामले में कई चुनौतियां दिखती हैं। गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू और अन्य भारतीय शहरों में उच्च-स्तरीय अपार्टमेंट और विला तो उपलब्ध हैं, लेकिन महंगे होने के बावजूद वे वैश्विक मानकों पर खरे नहीं उतरते।
चूंकि धनी भारतीय काम और छुट्टियों के लिए विश्व भर में यात्रा करते हैं, इसलिए जब कोई सिंगापुर, बैंकॉक, यूरोप और यहां तक कि दुबई या मस्कट जैसी जगहों की यात्रा करके वापस आता है, तो यह तुलना बहुत स्पष्ट हो जाती है। मैं अपने बड़े शहरों की तुलना पेरिस, लंदन या न्यूयॉर्क से नहीं कर रहा हूं, जो जीवन स्तर के लिए उच्च-गुणवत्ता के मामले में बहुत आगे हैं। इसलिए, जब यूएई में प्रवेश के लिए एक नई गोल्डन वीजा योजना की खबर आई, तो इंटरनेट पर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। गोल्डन वीजा कार्यक्रम 2019 से चल रहा है, जिसमें एक ऐसा वीजा भी शामिल है, जिसकी कीमत करीब 23 लाख रुपये के बराबर है और जो फिलहाल सुर्खियों में भी आ गया है। इसमें निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले भारतीय नागरिक अब दुबई में आजीवन निवास प्राप्त कर सकेंगे, बिना महंगी अचल संपत्ति खरीदे या व्यावसायिक उपक्रमों में पूंजी निवेश की जरूरत के, जो पहले लागू थी। नियम में यह बदलाव उन पेशेवरों के लिए प्रतीत होता है, जो समृद्ध नहीं हैं, और यह सही भी है।
ऐसे समय में, जब वेतनभोगी भारतीय 30 फीसदी आयकर देते हैं, यानी 30 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्ति की कर-पश्चात आय 21 लाख रुपये होती है। अब, कई परिवार ऐसे हैं, जहां दंपति की संयुक्त आय 50 लाख रुपये है, यानी कर के बाद उनके पास 35 लाख रुपये बचते हैं, जो एक अच्छी रकम है। अगर यही जोड़ा किसी बड़े शहर में 2.5 करोड़ रुपये के अपार्टमेंट का लोन चुका रहा होता, तो उनके पास बाकी खर्चों के लिए सालाना 10-15 लाख रुपये से थोड़ा ही ज्यादा बचता। ज्यादा आमदनी और रहने की बड़ी जगह का फायदा उठाने के बावजूद, ये करदाता जरूरी नहीं कि खुद को अमीर समझें।
अब उन कामकाजी पेशेवरों से तुलना करें, जिनके पास साल के ज्यादातर समय घर से काम करने की सुविधा है। वे आसानी से दुबई जाकर पूरे साल काम कर सकते हैं, बशर्ते उनका नियोक्ता उन्हें दुबई में वेतन देता हो। चूंकि दुबई में अभी आयकर प्रणाली नहीं है, इसलिए उपरोक्त दंपति को पूरी राशि अपनी इच्छानुसार खर्च करने और निवेश करने की छूट होगी। इसके पीछे एक वित्तीय तर्क है, भले ही कोई किसी प्रमुख भारतीय शहर के बजाय दुबई में घर खरीदने पर विचार कर रहा हो, क्योंकि दुबई में गृह ऋण पर ब्याज दर आमतौर पर 2-5 फीसदी के बीच होती है, जबकि भारत में यह लगभग 8-10 फीसदी है। अगर कोई हर महीने एक हफ्ते से दस दिन के लिए काम पर जाने का विचार करे, तो भी कुछ भारतीयों के लिए दुबई से काम करना फायदेमंद हो सकता है।
दुबई के कई स्कूल और कॉलेज, भारत के प्रमुख शहरों के कुछ निजी स्कूलों जितने ही अच्छे या उनसे बेहतर हैं। इसके अलावा, दुबई भारत की तुलना में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर संभावनाओं का प्रवेश द्वार बन सकता है। हां, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दुबई में भारतीय नियोक्ता के साथ निवासी के रूप में रोजगार पाने में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति को इसका सामना करना पड़ता है। हालांकि, इन दिनों, जब अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी के बजाय सलाहकार के रूप में काम करते हैं, तो कई लोगों के पास इस पर विचार करने का अवसर है।
संभवतः भारत में एक बड़ी आबादी की गुणवत्तापूर्ण जीवन स्तर पाने की आवश्यकता को महसूस करते हुए, जो पूरी नहीं हो पा रही है, यूएई सरकार ने यह आकर्षक योजना शुरू की है। अगर किसी को 23 लाख रुपये का वीजा शुल्क ज्यादा लग रहा हो, तो भी वे इसे लगभग दो लाख रुपये वार्षिक वीजा शुल्क मान सकते हैं, जो ज्यादा नहीं लगता। इसके अलावा, परिवार के सदस्यों के लिए आजीवन गोल्डन वीजा प्रदान करके यह योजना काफी कारगर साबित हो रही है। यूएई सरकार की इस योजना को प्रतिभाशाली भारतीयों को दुबई में रहने के लिए आकर्षित करने का एक जरिया माना जा सकता है।
प्रमुख भारतीय शहरों और दुबई के बीच की दूरी 4-5 घंटे की है और दोनों जगहों के बीच रोजाना कई उड़ानें हैं। चूंकि दुबई एक वैश्विक केंद्र है, यदि बड़ी संख्या में भारतीय वहां जाते हैं, तो इससे दुबई की छवि कम श्रम-प्रधान से वास्तविक महानगरीय और वैश्विक रूप से विविधतापूर्ण स्थान की बन सकती है। ज्यादा लोगों के दुबई में बसने से यूएई की अर्थव्यवस्था के बढ़ने की उम्मीद है। स्वाभाविक रूप से, लोग घूमने-फिरने, बाहर खाने-पीने, घर खरीदने और ईंधन की खपत पर पैसा खर्च करेंगे। भारत से दुबई और दुबई से भारत में पैसा भेजना भी आसान है, क्योंकि कई भारतीय बैंकों की इस खाड़ी देश में महत्वपूर्ण उपस्थिति है।
अगर आपके पास घर से काम करने और दुबई में अपने भारतीय नियोक्ता से भुगतान पाने की सुविधा है, तो यह नया वीजा नियम आकर्षक और विचारणीय है। यह कदम सिर्फ व्यावसायिक पेशेवरों के लिए ही नहीं है, कई अन्य पेशेवर भी इस विकल्प पर विचार कर सकते हैं। जैसे, अभिनेता माधवन को ही लीजिए, जो अपने बेटे के तैराकी में कॅरिअर को आगे बढ़ाने के लिए दुबई चले गए हैं। उन्हें बेटे के लिए मुंबई की तुलना में दुबई की सुविधाएं ज्यादा उपयुक्त लगती हैं, जहां वह पहले रह रहे थे। इसके अलावा, वह दुबई में एक निवासी के रूप में फिल्म साइन कर सकते हैं, फिल्म के कुछ हिस्से वहां शूट कर सकते हैं, और बाकी समय में भारत में शूट कर सकते हैं। सिनेमा की शूटिंग अक्सर वैश्विक स्थानों पर होती है, इसलिए उन्हें बार-बार भारत आने की जरूरत नहीं पड़ती। जरूरी है कि भारतीयों के भारत से पलायन के पीछे के असली कारण को समझा जाए। यूएई की यह योजना अगर काम करती है, तो वहां भारतीयों का अगला दौर आ सकता है, इस बार वे लोग जाएंगे, जो योग्य, कुशल और बेहतर जीवन स्तर के इच्छुक हैं।