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पुतिन की फर्जी डायरी के अंश
डेविड ब्रूक्स
Updated Tue, 25 Feb 2014 07:28 PM IST
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प्रिय डायरी,
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मैं मूर्खों से घिरा हुआ हूं। मैंने मानव इतिहास के सबसे बड़े ओलंपिक का आयोजन किया। मैंने जिस रूसी टीम का इसके लिए चयन किया, उसने काफी मेडल जीते। मैंने यह सब सीरिया में असद को समर्थन देते और ओलंपिक विलेज के आधे एथलीटों को मोबाइल पर अश्लील संदेश भेजते हुए किया। यह अलग बात है कि इस बीच मेरा वह पिछलग्गू यांकोविच कीव में अपनी सत्ता तक नहीं बचा सका।
ऐसा क्यों है कि मुझे छोड़कर हर तानाशाह सही वक्त पर सही कदम उठाने में हमेशा विफल रहता है? वे कभी उदार, तो कभी कठोर बनने की कोशिश करते हैं और अंततः सबको नाराज कर देते हैं, किसी को डरा भी नहीं पाते। वह बेवकूफ यांकोविच अपने चिड़ियाघर और दुर्लभ बकरों में ही मस्त था। उसके डेंटिस्ट पुत्र ने पिछली जनवरी में जारी आधे सरकारी ठेके हथिया लिए। ऐसे ही लोग राजनीतिक भ्रष्टाचार को बदनाम करते हैं।
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उस मूर्ख ने मेरे लिए दो संकट पैदा कर दिए हैं- एक, क्षेत्रीय और दूसरा, घरेलू। मेरी संपूर्ण विश्वदृष्टि इस धारणा पर टिकी है कि समाज या तो केंद्रीकृत नियंत्रण से या फिर आतंकवाद और अराजकता से ही बचा रह सकता है। मेरे जीवन का एकमात्र लक्ष्य पूर्ण सत्ता हासिल करना है, तभी रूस अपने पूर्व वैभव को हासिल कर सकता है। क्षेत्रीय स्तर पर इसका मतलब है, रूसी साम्राज्य के पुनर्गठन के जरिये यूरेशियन संघ की स्थापना। घरेलू स्तर पर इसका आशय है, तानाशाही शासन की वैधानिकता को बहाल करना।
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लेकिन यूक्रेन के दस्युओं ने अचानक ही इन दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर यूक्रेन मेरे नियंत्रण में नहीं होगा, तो मैं अपना साम्राज्य खड़ा नहीं कर पाऊंगा और मेरी यूरेशियन संघ की परियोजना खटाई में पड़ जाएगी। इस बीच अपने पड़ोस में एक तानाशाह को इस तरह अपदस्थ होते देखना अच्छा अनुभव नहीं था। यह मेरी प्रजा के लिए एक बुरा उदाहरण स्थापित करेगा।
अचानक ही मैं खुद को काफी कमजोर अवस्था में पाता हूं। सौभाग्य की बात है कि मानव इतिहास का सबसे महान नेता मेरी तरफ है यानी मैं खुद। मैकियावेली ने ठीक ही कहा था, सौभाग्य वह औरत है, जिसका प्यार केवल दुस्साहसी लोगों को ही हासिल होता है। यही वजह है कि मैं जमीनी स्तर पर काम करने में यकीन करता हूं। जब हर कोई दुविधा में हो, तो सबसे पहले कार्रवाई करो और उन्हें प्रतिक्रिया के लिए मजबूर करो। यही वजह है कि विश्व मंच पर मैं अकेला 'मिस्टर बिग' हूं। नायक ही इतिहास को संचालित करते हैं और लगता है कि मुझे नजरंदाज नहीं किया जाएगा!
नादान पश्चिमी देश (गुस्ताखी माफ) समझते हैं कि यूक्रेन की उथल-पुथल लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए है। संभव है वे अटकलें लगा रहे हों कि यूक्रेन आखिर जाएगा किधर, पश्चिम या पूर्व की ओर। नहीं, मेरी विश्वदृष्टि में आदर्शों के लिए कोई जगह नहीं है। लोग पैसे और भय से संचालित होते हैं। सबसे पहले मैं यूक्रेन से पश्चिम के लोगों को बेदखल करूंगा। पश्चिमी देश पहले सैन्य कार्रवाई के जरिये दूसरे देशों पर फतह करते थे और अब अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के जरिये। एक विशेषज्ञ ने ठीक ही कहा, वे चाकू की लड़ाई में खीरे का इस्तेमाल करते हैं।
वास्तव में पश्चिमी देश यूक्रेन को दीवालिया होने से बचाने के लिए आवश्यक धन खर्च नहीं करेंगे। यूक्रेन के पास पैसा नहीं है और जिस देश के पास पैसा नहीं होता, उसके पास कोई विकल्प नहीं होता है। वे खुद को बिक्री के लिए प्रस्तुत करने जा रहे हैं और मैंने दिखा दिया है कि मैं ऊंची कीमत अदा कर सकता हूं। इसके अलावा इस देश की राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था रूस जैसी ही है। अर्थव्यवस्था के लगभग 80 फीसदी हिस्से पर कुछेक व्यावसायिक घरानों का नियंत्रण है। अगर मौजूदा व्यावसायिक घराने मेरी इच्छा के मुताबिक काम नहीं करेंगे, तो मैं उनकी जगह पर कुछ अच्छे रूसियों को ले आऊंगा। कुछ राजनेता गठबंधन बनाने के लिहाज से अच्छे होते हैं, मैं भ्रष्टाचार करने के लिहाज से अच्छा हूं।
फिर मैं अपने लिए जगह बनाऊंगा और चुनाव सुधार कानून में बदलाव करूंगा। मैं तेल एवं गैस आपूर्ति के जरिये उनका दोहन कर सकता हूं। मैंने पहले ही क्रीमिया के संरक्षण के लिए रूसी सैन्य दस्ते की भर्ती की है। अगर यूक्रेन के विभाजन का खतरा पैदा होता है, तो जॉर्जिया वाला समाधान तो हमेशा से है ही-वहां सेना भेज दूंगा। बेशक पश्चिमी देश इसे पसंद नहीं करेंगे, लेकिन वे कर भी क्या सकते हैं? यदि उन्होंने मुझे हानि पहुंचाने की कोशिश की, तो सीरिया, ईरान और उन तमाम मुद्दों पर, जो उनके लिए महत्वपूर्ण है, मैं सहयोग बंद कर दूंगा।
मैंने पहले ही सिविल सोसाइटी की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। यहां तक कि मैंने स्वतंत्र मतदान सर्वेक्षकों को प्रतिबंधित कर दिया है और भ्रष्टाचार से लड़ने वाले अधिकारियों पर मुकदमा दायर कर दिया है। (यह सही है। मैंने ईमानदारी को अपराध घोषित कर दिया है।)
जब अतीत आपके साथ हो, तो शासन करना आसान होता है। मैंने अराजकता को आत्मसात कर लिया है। पूंजी छलांग लगा रही है। रूबल बदहाल हो चुका है। सोशल मीडिया, युथ कल्चर, जनांदोलन, लोकतंत्र और पूंजीवाद निरंकुश मानसिकता को कुंद कर रहे हैं। फिर भी मैं अपनी इच्छाएं थोप रहा हूं। मैंने देश का उस तरह विकास नहीं किया, जैसा सभी सुझाते हैं। विकास अराजकता की तरफ ले जाता है, यह मैंने गोर्बी से सीखा है!
1990 के दशक की घटनाओं ने दुनिया को एक किस्सा दिया, मखमली क्रांति का किस्सा। लेकिन मैं दूसरा किस्सा सिखाना चाहता हूं, जो शहर के चौराहे पर लोगों के प्रदर्शन से शुरू होता और एक दिग्गज के पतन के साथ समाप्त होता है।