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गरीबी और गंदगी से दूर खुशहाल भारत का सपना

Sun, 15 Jun 2014 06:37 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 15 Jun 2014 06:37 PM IST
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Poverty and dirt away from the dream of a prosperous India

पिछले सप्ताह लोकसभा में दिए गए नरेंद्र मोदी के पहले भाषण की पंक्तियां मेरे दिल की गहराइयों को छू गईं। वह ये थीं, 'मतदान से पहले हम उम्मीदवार थे, मतदान के बाद हम उम्मीदों के रखवाले हैं। हम उम्मीदों के दूत हैं।' पहली बार किसी प्रधानमंत्री से मैंने उन उम्मीदों का जिक्र सुना है, जिनको लेकर आम मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजता है।

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अधिकतर होता यह है कि जब कोई जनप्रतिनिधि बन जाता है देश का प्रधानमंत्री, तो वह अपने-आपको इतना बड़ा राजनेता समझने लगता है कि जनता की छोटी, बुनियादी, लेकिन उसके लिए अति महत्वपूर्ण जरूरतों को भूल जाता है। वे अक्सर ऐसे विषयों पर बोलते हैं, जिनका राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर हो। ऐसे विषयों से इस देश के आम आदमी को क्या वास्ता, जब उनके जीवन में उन बुनियादी चीजों का अभाव है, जिनके बिना जीना मुश्किल है। शिक्षा, रोजगार, सड़कें, अस्पताल, रोटी, कपड़ा, मकान-इन चीजों को अहमियत देकर प्रधानमंत्री ने साफ इशारा किया है कि वह समझते हैं इस देश के विकास को। साफ इशारा यह भी किया उन्होंने कि गरीबी हटाने का काम नए सिरे से होगा। उन्होंने कहा सरकार का फर्ज बनता है गरीबों को वे औजार देना, जिनसे वे गरीबी दूर कर सकें। इनमें सबसे बड़ा औजार है, शिक्षा।
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बाद में कांग्रेस के नेताओं ने कहना शुरू कर दिया कि प्रधानमंत्री की बातों में कोई नई चीज नहीं दिखी उन्हें, क्योंकि ऐसी बातें तो कांग्रेस की सरकारें लगातार करती आई हैं। या तो फर्क उनको दिखा नहीं या उस फर्क को वे देखना नहीं चाहते हैं।
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यह सच है कि पिछले दशक में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने बहुत बार कहा कि उनकी सरकार गरीबों की सरकार है। यह भी सच है कि राहुल गांधी ने इसे आधार बनाया अपने चुनाव अभियान का, लेकिन बातें ऐसी कीं, जैसे वह एक राजा हों, जो अपनी प्रजा की चिंता व्यक्त कर रहा हो। उनकी माता जी ने गरीबों को राहत पहुंचाने की कई योजनाएं तैयार कीं, लेकिन गरीबों को राहत पहुंचाने और गरीबों की गरीबी दूर करने में शायद उन्होंने कभी अंतर नहीं समझा। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि गरीबी दूर करने के लिए हम काम करेंगे। उन्होंने गरीबों को राहत पहुंचाने का जिक्र तक नहीं किया।

न सिर्फ यह नई दिशा है, बल्कि जनता से नया रिश्ता कायम करने की भी कोशिश है, जिसे समझने वाले समझ गए हैं। शेखर कपूर जैसे प्रख्यात फिल्म निर्देशक से लेकर चांदनी चौक के एक मुस्लिम दोस्त तक में तकरीबन एक ही किस्म का प्रभाव हुआ प्रधानमंत्री के भाषण का। प्रधानमंत्री ने भारत के लिए एक नया सपना लोकसभा के सामने पेश किया है।


प्रधानमंत्री के सपने वाले भारत में न गंदगी होगी, न गरीबी और न ही कोई बेघर परिवार। हर घर में पानी आएगा नलों में, बिजली होगी और होगी 21वीं सदी की वे तमाम सुविधाएं, जिनके न होने से भारत के लोग पीछे रह गए हैं दुनिया के लोगों से। खैरात बांटने से नहीं पूरा हो सकेगा यह सपना, इसलिए उन्होंने खैरात की नहीं, विकास को एक जनांदोलन बनाने की बात कही। दुआ कीजिए कि यह जनांदोलन शक्तिशाली हो।

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