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तबेले पर पुलिस पहरा

Mon, 10 Feb 2014 07:03 PM IST
अशोक गौतम
अशोक गौतम Updated Mon, 10 Feb 2014 07:03 PM IST
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Police patrol on the stall

रोज की तरह नहा-धोकर दो रोटियां थाली में डालकर गाय को देने जाने के लिए तैयार होने के बाद मैंने कल ही शहर से आए मैनेजमेंट गुरु उर्फ बेटे को जगाते हुए कहा, उठो! गाय को रोटी दे आते हैं। यह सुनकर वह चौंका, गाय को रोटी?

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हां! अपने शास्त्रों में कहा गया है कि गाय को रोटी देने से मन की हर इच्छा पूरी होती है, उसने चाहा, तो हफ्ते भर में किसी मल्टीनेशनल कंपनी में तुम्हारी नौकरी पक्की!
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आप भी न बाबा! रोटी देनी ही है, तो भैंस को दो, जहां से अधिक अर्न हो सके। आज का मैनेजमेंट कहता है कि भैंस को रोटी दोगे, तो वह दूध भी गाय से अधिक देगी और आशीर्वाद भी। गाय को रोटी देना हर लेवल पर घाटे का सौदा है, बेटे ने बिना किसी संकोच के गाय को रोटी देने पर संशय की दीवार खड़ी कर दी। तब मुझे लगा कि बेटे ने एमबीए सच्ची मेहनत करके ही की है। यह तो और भी अच्छा हो गया! इसी बहाने मंत्री जी की भैंसों से नजदीकियां तो बढ़ेंगी।
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मैं मन ही मन मंत्र उच्चारता ज्यों ही मंत्री जी के तबेले पर भैंसों को रोटी देने पहुंचा, तो वहां पर पुलिस पहरा! सोचा, चुनाव के दिन हैं, मंत्री जी को डर होगा कि विपक्ष उनके वोटरों की तरह भैंसों को भी बहला-फुसलाकर न ले जाए... एक पुलिस वाला तबेले के गेट पर बंदूक पकड़े सो रहा था, तो दूसरा बंदूक गेट के सहारे खड़ी कर हथेली पर तंबाकू बना रहा था। मैंने उसी से पूछा, और साहब कैसे हो?


वह बोला, देख नहीं रहे हो! महारानी के महल पर तैनात हूं। ज्यों ही मैं गेट से अंदर जाने को हुआ, तो वह बोला, रुको, कहां जा रहे हो?

खिलाने ही तो जा रहा हूं। खाने तो नहीं जा रहा हूं, मैंने कहा, तो वह बोला, यहां अब भैंसें नहीं रहतीं!

क्या मतलब है तुम्हारा! अंदर से बास तो गोबर की ही आ रही है, और तुम कहते हो कि...

महारानी विक्टोरिया रहती हैं!

मजाक मत करो यार! देखो, ऑफिस तो वैसे भी मैं समय पर नहीं गया, पर लगता है कि आज भी लेट हो जाऊंगा, मैंने तबेले में जाने के लिए जिद की, तो वह दोनों हाथ जोड़ता बोला, ताऊ! भीतर मत जा। ये फिर गुम हो गईं तो... बड़ी मुश्किल से मिली हैं। अगर खिलाने का इत्ता ही शौक है, तो दे ये रोटी हमें दे दे। और यह कहकर उसने मेरे हाथ से थाली छीन ली!

इन जैसों को खिलाकर भी तो पुण्य मिलता होगा बंधुओ?

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