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खबर की कविता
नई दिल्ली
Updated Sat, 29 Jun 2013 09:55 PM IST
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खबर की कविता
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ऋषिवंश
इनकी कविताएं आसपास की घटनाओं को अपने साथ लेकर चलती हैं और बार-बार इस बात का अहसास दिलाती हैं कि ये उसी दुनिया की खबर है, जहां हम रहते हैं और जिसे बचाना जरूरी है। सतना में रहते हैं।
त्रासदी
परिन्दे विस्फोट में मारे गये।
त्रासदी भोगे शहर
आतंक वाली बार-बार
चैन और सुकून वाली
चादरें फिर तार-तार
फैलते हर ओर अंगारे गये।
शहर कोई रोज झुलसा
था बमों से
बदलता धरती का
हुलिया मातमों से
सैकड़ों निर्दोष बेचारे गये।
सुलगते आतंक की
खूनी कहानी
निशाने पर रोज
कोई राजधानी
कहां आखिर मसीहा मारे गये।
रखवाली
अंधे बहरे लोग
करेंगे अब रखवाली।
चौराहे पर देश
और मन में सन्नाटे
जहर बो रहे जालिम
क्यों फल जनता काटे
खतरनाक संयोग
दाल ही पूरी काली।
नकली से आदर्श
अहिंसा प्राय: घायल
सच को देश निकाला
झूठों के सब कायल
प्रजातंत्र के ढोंग
और मदिरा की प्याली।
नौकर बेईमान
और राजा सुखभोगी
कहलाते जनसेवक
हैं सता के रोगी
सुख से सदा वियोग
जिंदगी जैसे गाली।