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Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   PM Modi arrival in Oman is not just diplomatic stop sign of continuity-maturity of India's neighborhood policy

नीति: 'पड़ोस' का विस्तार, बहुध्रुवीय दुनिया में प्रगाढ़ रिश्तों की पहचान

Fri, 19 Dec 2025 07:28 AM IST
लव गौर अमर उजाला
अमर उजाला Published by: लव गौर Updated Fri, 19 Dec 2025 07:28 AM IST
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सार
ओमान में पीएम मोदी का आगमन सिर्फ एक औपचारिक राजनयिक पड़ाव नहीं है, बल्कि यह भारत की पड़ोसी नीति की निरंतरता और परिपक्वता का संकेत है।
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PM Modi arrival in Oman is not just diplomatic stop sign of continuity-maturity of India's neighborhood policy
पीएम मोदी को ओमान का सर्वोच्च सम्मान - फोटो : PTI

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी का तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में ओमान पहुंचना केवल एक औपचारिक राजनयिक पड़ाव नहीं, बल्कि भारत की विस्तारित पड़ोस नीति की निरंतरता और परिपक्वता का भी संकेत है। ओमान ऐतिहासिक रूप से भारत का विश्वसनीय साझेदार रहा है और ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा बाजारों की अनिश्चितता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसी चुनौतियों से गुजर रहा है, तो इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत ओमान के तेल का चौथा सबसे बड़ा खरीदार है।


इसके अतिरिक्त, ओमान की विशिष्टता उसकी संतुलित विदेश नीति में निहित है। खाड़ी की अक्सर ध्रुवीकृत राजनीति के बीच ओमान ने मध्यस्थता और संवाद का रास्ता चुना है, जो भारत के लिए मूल्यवान है, क्योंकि नई दिल्ली भी रणनीतिक स्वायत्तता, संवाद और बहुपक्षीयता पर जोर देती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को ऑर्डर ऑफ ओमान का सम्मान तो मिला ही, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर भी मुहर लगी, जिस पर 2023 से ही वार्ता हो रही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे उचित ही दोनों देशों के साझा भविष्य का खाका बताया है, क्योंकि इससे दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं को कई क्षेत्रों में फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


ओमान के साथ भारत के संबंध केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और सांस्कृतिक भी हैं। यहां लगभग सात लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों के पुल का काम करते हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी जॉर्डन और इथियोपिया की यात्रा पर थे। इथियोपिया अफ्रीका की सबसे तेजी से वृद्धि कर रही अर्थव्यवस्था  है और अफ्रीकी संघ का मुख्यालय भी यहीं है। यह भी नहीं भूला जा सकता कि इथियोपिया उन पहले कुछ देशों में था, जिन्होंने पहलगाम हमले की निंदा की थी और भारत से एकजुटता का संदेश दिया था। दूसरी ओर जॉर्डन है, जो अरब देशों में अपेक्षया नर्म रुख अपनाने वाला देश है।

लिहाजा, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा अफ्रीका और पश्चिम एशिया में अपने संबंधों और ग्लोबल साउथ में भारत की स्थिति को मजबूत करने को लक्षित है। इसका महत्व प्रतीकात्मक से कहीं अधिक है। यह भरोसे, निरंतरता और साझा हितों की कूटनीति है। इस दौरान जो समझौते हुए, वे महत्वपूर्ण तो हैं ही, ऐसे समय में जब पूरी दुनिया बहुध्रुवीय हो रही है, तब इन तीन देशों से प्रगाढ़ रिश्ते पश्चिम एशिया व अफ्रीका में भारत की कूटनीतिक मौजूदगी को और मजबूत व विश्वसनीय ही बनाएंगे।
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