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नवाचार से बदल रही है तस्वीर : नवोन्मेष शोध कार्यों पर निर्भर भारत का भविष्य, हमें तेजी से आगे बढ़ते रहना होगा

Fri, 07 Oct 2022 08:15 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Fri, 07 Oct 2022 08:15 AM IST
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सार
सरकार को विकास और आम आदमी के आर्थिक-सामाजिक कल्याण के मद्देनजर दुनिया के विभिन्न विकसित देशों की तरह भारत में भी शोध एवं नवाचार पर जीडीपी की दो फीसदी से अधिक धनराशि व्यय करने पर विचार करना चाहिए, ताकि देश में आर्थिक-सामाजिक विकास की नई संभावनाएं बनें। 
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Picture is changing with innovation: Indias future depend on innovation research, we hv to keep moving forward
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

हाल ही में 29 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी वर्ल्ड इंटलेंक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूआईपीओ) द्वारा जारी ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (वैश्विक नवाचार सूचकांक), 2022 में छलांग लगाते हुए भारत 40वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल वह 46वें पायदान पर था। वर्ष 2015 में इनोवेशन रैकिंग में भारत 81वें स्थान पर था। सबसे बड़ी बात है कि निम्न मध्य आय समूह के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत पहले स्थान पर पहुंच गया है। 



इस समूह में दुनिया के 36 देशों को शामिल किया गया है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में स्विट्जरलैंड पहले, अमेरिका दूसरे, तो स्वीडन तीसरे स्थान पर है। थाईलैंड, वियतनाम, रूस और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में नवाचार के मामले में भारत काफी आगे निकल चुका है। गौरतलब है कि डब्ल्यूआईपीओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आईटी सेवा निर्यात में लगातार आगे बढ़ रहा है। 


वेंचर कैपिटल हासिल करने के मामले में भी भारत आगे चल रहा है। स्टार्ट-अप के लिए वित्तीय इंतजाम में भी भारत की बढ़त जारी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विज्ञान और इंजीनियरिंग ग्रेजुएट तैयार करने में भी भारत सबसे आगे है और भारत के उद्योग-कारोबार तेजी से समय के साथ बदल रहे हैं। इनोवेशन की दुनिया में भारत की रैंकिंग यह दर्शा रही है कि हमारा देश इनोवेशन का हब बनाता जा रहा है। 

नए वैश्विक ग्लोबल इंडेक्स के तहत भारत ने कारोबारी विशेषज्ञता, रचनात्मकता, राजनीतिक और संचालन से जुड़ी स्थिरता, सरकार की प्रभावशीलता और दिवालियापन की समस्या को हल करने में आसानी जैसे संकेतकों में अच्छे सुधार किए हैं। साथ ही भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था, घरेलू कारोबार में सरलता, स्टार्ट-अप, विदेशी निवेश, जैसे मानकों में भी बड़ा सुधार दिखाई दिया है। 

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि विगत दिनों ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन’ के समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस समय शोध (रिसर्च) एवं नवाचार (इनोवेशन) सूचकांक में भारत की रैकिंग लगातार बढ़ रही है। शोध एवं नवाचार के कारण बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, डिजिटल, प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा, रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हो रही है। 

भारत के लोग नवाचार दुनिया में सबसे प्रतियोगी, किफायती, टिकाऊ, सुरक्षित और बड़े स्तर पर लागू होने वाले समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। मोदी ने यह भी कहा कि आज भारत में 70,000 से अधिक स्टार्ट-अप हैं, जिनमें 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। भारत का भविष्य नवाचार और शोध कार्यों पर निर्भर करेगा। इसमें कोई दो मत नहीं है कि इस समय जब दुनिया चुनौतीपूर्ण आर्थिक परिवेश का सामना कर रही है, तब भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। 

विगत दो सितंबर को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। कोविड-19 भारत में नए चिकित्सकीय शोध और नवाचार को बढ़ावा देने का भी एक अवसर बना है। यह बात महत्वपूर्ण है कि किसी देश में शोध एवं नवाचार की स्थिति के आधार पर उस देश में विभिन्न देशों के उद्यमी और कारोबारी अपने उद्योग-कारोबार शुरू करने संबंधी निर्णय लेते हैं। 

निस्संदेह भारत के तेज विकास और देश के करोड़ों लोगों के आर्थिक-सामाजिक कल्याण के लिए शोध एवं नवाचार में तेजी से आगे बढ़ना होगा। इस समय भारत में आर ऐंड डी पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 0.67 प्रतिशत ही व्यय हो रहा है। जबकि यूरोपीय संघ में इस पर जीडीपी का करीब दो फीसदी, अमेरिका और जापान तथा अन्य कई विकसित देशों में तीन फीसदी से भी अधिक व्यय किया जा रहा है। 

सरकार को विकास और आम आदमी के आर्थिक-सामाजिक कल्याण के मद्देनजर दुनिया के विभिन्न विकसित देशों की तरह भारत में भी शोध एवं नवाचार पर जीडीपी की दो फीसदी से अधिक धनराशि व्यय करने पर विचार करना चाहिए, ताकि देश में आर्थिक-सामाजिक विकास की नई संभावनाएं बनें। 

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