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संकेत: तमिलनाडु की जनता तलाश रही द्रविड़ राजनीति का विकल्प; योगी-रजनीकांत की वायरल हुई तस्वीर तो यही कह रही है

Mon, 28 Aug 2023 06:38 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Mon, 28 Aug 2023 06:38 AM IST
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सार
उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि पिछले दिनों मणिपुर के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कच्चातीवू का जिक्र किया, जो तमिलनाडु के पास एक द्वीप है, और जिसे कांग्रेस की सरकार ने श्रीलंका को दे दिया था। 
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people of Tamil Nadu are looking for an alternative to Dravidian politics
सीएम योगी आदित्यनाथ, रजनीकांत - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर दक्षिण के महत्व को ही प्रतिपादित किया। उतना ही दिलचस्प यह है कि दक्षिण अफ्रीका में आयोजित ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल की बात की। अपने देश की बात करें, तो अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में भी दक्षिण भारत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। दक्षिण के छह राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मोदी-शाह और नड्डा की तिकड़ी रणनीति बनाने में लगी है। दक्षिण की 130 लोकसभा सीटों में भाजपा कितनी सीटें जीत पाती है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन भाजपा सबसे ज्यादा जोर तमिलनाडु में लगा रही है, जहां उत्तर भारतीय मतदाताओं की बड़ी आबादी है।



पिछले लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में द्रमुक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 सीटों में से 38 सीटों पर कब्जा जमाया था। भाजपा उस हार को भूली नहीं है। इसलिए इस बार तमिलनाडु में द्रमुक की राजनीति को मात देकर वहां वह हिंदुत्व का परचम लहराना चाहती है। यह लक्ष्य पाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ भी करने का संकेत दिया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी तमिलनाडु में भाजपा का प्रदर्शन अहम है। पिछले पांच साल के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से उन्होंने कम से कम 2,500 बार तमिलनाडु का उल्लेख किया है। इस दौरान विदेशी मेहमानों को सम्मानित करते समय ज्यादातर समय तमिनलाडु के कलाकारों को याद किया गया है। वाराणसी में एक महीने तक चला 'काशी-तमिल संगमम' कार्यक्रम वस्तुत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमाग की उपज था। यह आकस्मिक नहीं है कि प्रधानमंत्री ने 'सौराष्ट्र-तमिल संगमन समारोह' भी आयोजित किया। सैकड़ों साल पहले गुजरातियों और मराठियों के दक्षिण भारत के तमिनलाडु में बस जाने की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। इसे भी नहीं भूलना चाहिए कि वर्ष 2009 में श्रीलंका के जाफना में हुए तमिलों के नरसंहार के बाद वहां पहुंचने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं।


उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि पिछले दिनों मणिपुर के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कच्चातीवू का जिक्र किया, जो तमिलनाडु के पास एक द्वीप है, और जिसे कांग्रेस की सरकार ने श्रीलंका को दे दिया था। इसी तरह लोकसभा में बहस के दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 1989 में तमिलनाडु की विधानसभा में हुई उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र किया, जब द्रमुक के विधायकों ने जयललिता की साड़ी खींच ली थी। वित्तमंत्री द्वारा इस घटना के जिक्र पर क्षुब्ध होकर द्रमुक के सांसदों ने सदन से वॉकआउट करने में ही अपनी भलाई समझी। उल्लेखनीय है कि केंद्र की मोदी सरकार ने जिन दो रक्षा गलियारों (डिफेंस कॉरिडोर) को मंजूरी दी है, उनमें से एक उत्तर प्रदेश में है और दूसरा तमिलनाडु में।

भाजपा की इन राजनीतिक पहलकदमियों को आखिर क्या कहेंगे? इसका अर्थ यह है कि तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए भाजपा गंभीर है और वह तमिलनाडु के युवाओं में राष्ट्रवाद का प्रसार करना चाहती है। बिहार के एक आईपीएस अधिकारी एनआर रवि को राज्यपाल बनाकर तमिलनाडु में भेजे जाने के राजनीतिक निहितार्थ थे। और राज्यपाल काफी समय से राज्य की द्रमुक सरकार से विभिन्न मोर्चे पर टकराकर एक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। तमिलनाडु में भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई द्वारा 'एन मान-एन मक्कल' (मेरी मिट्टी-मेरी जनता) अभियान के तहत 120 दिनों की पदयात्रा का भी, जो राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों से होकर गुजरने वाली है, ठोस राजनीतिक संदेश है। तमिलनाडु में भाजपा की महत्वाकांक्षाओं पर विचार करते हुए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि योगी आदित्यनाथ की छवि वहां एक नायक की है। आज अगर वहां भाजपा के दो विधायक हैं, तो उसका श्रेय योगी को जाता है।

गौरतलब है कि जेलर तमिलनाडु के सुपर स्टार रजनीकांत की नई फिल्म है, जिसे उनकी 286वीं फिल्म बताई जा रही है। जेलर के प्रचार के लिए रजनीकांत ने हिंदी प्रदेश के लोगों के बीच जाना जरूरी समझा और इसी के तहत उन्होंने हाल ही में उत्तराखंड, झारखंड और उत्तर प्रदेश का दौरा किया। लखनऊ आने पर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और हिंदी प्रदेश की परंपरा के अनुरूप उनके पैर छुए। ट्विटर समेत दूसरे सोशल मीडिया पर यह फोटो दिखते ही द्रविड़ और वाम उदारवादी लोग रजनीकांत पर टूट पड़े।

रजनीकांत की आलोचना में नास्तिक छवि वाला द्रमुक स्वाभाविक रूप से सबसे आगे था। लेकिन रजनीकांत को जो करना था, वह उन्होंने हासिल कर लिया। उनकी जेलर फिल्म को हिंदी पट्टी से भरपूर प्यार और प्रचार मिला। सन पिक्चर्स प्रबंधन के मुताबिक, जिसका स्वामित्व द्रमुक सांसद दयानिधि मारन के पास है, जेलर फिल्म के निर्माता भी इस फोटो से खुश नहीं थे। लेकिन जेलर के प्रदर्शन पर इसका असर पड़ना तो दूर, उल्टे यह फिल्म देखने के लिए सिनेमा घरों पर भीड़ उमड़ रही है। इसी से तमिलनाडु के लोगों का मिजाज समझा जा सकता है। तमिल युवाओं के बीच रजनीकांत की लोकप्रियता किसी से छिपी हुई नहीं है। लेकिन इस तथ्य की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि जिस तमिलनाडु को आम तौर पर हिंदी-विरोधी माना जाता है, वहां अपनी फिल्म के प्रचार के लिए रजनीकांत के हिंदी प्रदेशों में आने और हिंदी पट्टी की परंपरा के अनुरूप योगी आदित्यनाथ के पैर छूने का तमिलनाडु के युवाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।

यह घटनाक्रम दक्षिण के इस राज्य में भाजपा की चुनावी संभावनाओं के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे भाजपा नेताओं में यह संदेश जा रहा है कि तमिलनाडु में डिजिटल दौर के युवाओं को द्रविड़ राजनीति आकर्षित नहीं कर रही, बल्कि वे विकास चाहते हैं। इस संदर्भ में इस तथ्य की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि तमिलनाडु की जनता अब द्रविड़ राजनीति का विकल्प तलाश रही है। तमिलनाडु की राजनीति में मोदी-शाह की उम्मीदें परवान चढ़ी हैं, तो इसका कारण यही है, जिसे अब योगी-रजनीकांत की वायरल हुई तस्वीर ने भी मजबूती दी है।

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