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पड़ोस: बारूद के मुहाने पर बैठा पाकिस्तान; बढ़ती आतंकी घटनाओं के बीच ग्वादर में हमले से हाहाकार

Mon, 25 Mar 2024 07:21 AM IST
ravindar dubey रवींद्र दुबे
Updated Mon, 25 Mar 2024 07:21 AM IST
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सार
ग्वादर पर यह हमला बलूच समूहों की बढ़ती हुई आक्रामक क्षमता को ही इंगित करता है। ग्वादर बंदरगाह में चीन का अच्छा खासा निवेश भी है।
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Pakistan Terrorism big tension Gwadar Attack raised concern Baloch Militants
ग्वादर पोर्ट पर हमले से बढ़ी चिंता (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ani

विस्तार

हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी काम्प्लेक्स पर हुए एक जटिल हमले का मुकाबला करने में दो घंटे तक काफी परेशानियों से जूझना पड़ा। इस जंग में आठ हमलावर और दो सिपाही मारे गए। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की मजीद ब्रिगेड ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने जोर देकर यह दावा किया कि पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस और मिलिटरी इंटेलिजेंस के ठिकाने उनके लड़ाकों के निशाने पर थे।



अभी दो हफ्ते पहले ही बलूच लिबरेशन फ्रंट ने केच इलाके के कोल्वा कस्बे में भी दस सैन्य वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। पिछले दो वर्षों से पाकिस्तान में बलूच घुसपैठ बढ़ती जा रही है। घुसपैठिए हिम्मत के साथ सामने से हमला कर पाकिस्तानी सैन्य और पारा सैन्य संस्थानों की सुरक्षा की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ग्वादर का यह हमला बलूच समूहों की बढ़ती हुई आक्रामक क्षमता को ही इंगित करता है। यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ग्वादर बंदरगाह में चीन का अच्छा-खासा निवेश है, और यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। वस्तुत: इसे महज एक आतंकवादी हमला कह कर खारिज नहीं किया जा सकता। इस हमले ने पाकिस्तान के, खुद अपने देश में चीनी हितों की सुरक्षा के प्रयासों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।


बीजिंग ने बारंबार अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा के प्रयास बढ़ाए जाने पर जोर दिया है। कंगाल हो चुके पाकिस्तान को इस चीनी निवेश की जबर्दस्त जरूरत है। भू-राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में अलगाववाद की आग इस कदर पनप चुकी है कि बारूद के मुहाने पर बैठा पाकिस्तान का यह प्रांत कभी भी विस्फोट कर सकता है। यह प्रदेश तेल, कोयला सोना, तांबा और गैस भंडारों सहित प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद पकिस्तान का सबसे गरीब और सबसे कम आबादी वाला इलाका है। इसका क्षेत्रफल भी सर्वाधिक है।

यह हमला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कुर्सी संभालने के चंद हफ्तों के भीतर हुआ है। पाकिस्तान में उग्रवाद के विशेषज्ञ और स्वतंत्र विश्लेषक फाखर ककाखेल के अनुसार, प्रतीकात्मक रूप से उक्त हमला महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इस हमले से अखबारी सुर्खियां बनीं और यही बलूच घुसपैठिए चाहते भी थे। वे यह संदेश देना चाहते थे कि खासे सुरक्षा इंतजामों के बावजूद वे अपने मकसद में कामयाब रहे।
एक अन्य स्वतंत्र विश्लेषक किया बलोच का कहना है कि हमला पाकिस्तान के पुख्ता सुरक्षा इंतजामों से लैस शहर के हाई सिक्योरिटी जोन में हुआ है। इस हमले से बलूच अलगाववादियों ने पूरी दुनिया को संदेश दिया है कि चीन या किसी अन्य विदेशी दल के लिए निवेश के लिए ग्वादर बंदरगाह सुरक्षित नहीं  है।

बात केवल पाकिस्तान द्वारा चीनी हितों की सुरक्षा बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बलूच घुसपैठिए और पाकिस्तानी तालिबान उस इलाके को निशाना बना रहे हैं, जहां से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा गुजर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, इस क्षेत्र की शांति उक्त गलियारे के पूरा होने की दिशा में एकमात्र हल है और यह तभी हो सकता है, जब सरकार बलूचिस्तान की जरूरतें पूरी करने के लिए बातचीत की शुरुआत करे, बजाय कड़ा रुख अख्तियार कर तनाव बढ़ाने के। यह संवाद बलूच युवकों के साथ शुरू किया जाना चाहिए। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि चीन अब खुद के सुरक्षाकर्मी रखने का प्रस्ताव दे सकता है, जिसे पाकिस्तान ने दो साल पहले खारिज कर दिया था। शुरुआती तौर पर बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे बलूच अलगाववादी समूह प्रांतीय संसाधनों में अपना हिस्सा मांग रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी आजादी के लिए आंदोलन छेड़ दिया। ईरान और अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित बलूचिस्तान में उपेक्षा का इतिहास रहा है। वर्ष 1948 में पाकिस्तान ने भारत से अलग होते ही इस प्रांत पर कब्जा कर लिया था और अलगाववादी आंदोलन तभी से चला आ रहा है।

इसके अलावा, पाकिस्तान में आतंकवाद की घटनाएं काबुल में तालिबान सरकार बनने के बाद बढ़ गई हैं। इससे पाकिस्तान की यह उम्मीद भी खत्म हो गई है कि अफगानिस्तान में दोस्ताना सरकार बनने से आतंकवाद से निपटने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान के सेंटर फॉर रिसर्च ऐंड सिक्योरिटी स्टडीज की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में पाकिस्तान में हुए 789 आतंकवादी हमलों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में 1,524 लोग मारे गए और 1,463 लोग घायल हुए।

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