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पाकिस्तान की तिलमिलाहट: कश्मीर पर पुराना राग, भारत की फटकार; रवैये में सुधार की उम्मीद बेकार

Sat, 28 Feb 2026 07:21 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Sat, 28 Feb 2026 07:21 AM IST
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सार
भारत ने यूएनएचआरसी में एक बार फिर से पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है। दरअसल, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाए, इस पर लताड़ लगाते हुए भारत ने कहा कि पाकिस्तान के रवैये में सुधार की उम्मीद रखना बेमानी ही होगा। 
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Pakistan's Old Kashmir rant, India's rebuke; hope for improvement in attitude futile
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के इकसठवें नियमित सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भारत ने उचित ही उसे जमकर लताड़ लगाई है, हालांकि इससे उसके रवैये में सुधार की उम्मीद रखना बेमानी ही होगा। दरअसल, वैश्विक मंचों पर बार-बार विफल होने के बावजूद पाकिस्तान की जिद दर्शाती है कि वह यथार्थ से अधिक भ्रम की राजनीति में ही विश्वास करता है।


कश्मीर पर उसकी बयानबाजी भी अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक घिसी-पिटी कहानी बन चुकी है, जिसका तथ्यात्मक आधार कमजोर और राजनीतिक उद्देश्य स्पष्ट है। जबकि सच तो यह है कि अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद से कश्मीर में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। हालिया चुनावों में रिकॉर्ड मतदान जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक भागीदारी और स्थिरता का ही प्रमाण है। सम्मेलन में भारतीय राजनयिक की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर का विकास-बजट पाकिस्तान द्वारा हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मांगे गए बेलआउट पैकेज के दोगुने से भी अधिक है।


अलबत्ता, यह तथ्य पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और जम्मू-कश्मीर की प्रगति के बीच स्पष्ट विरोधाभास को उजागर करता है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिस देश की अपनी सीमाएं अस्थिरता से जूझ रही हों, वह दूसरों पर आरोप लगा रहा है। अफगानिस्तान पर हो रहे पाकिस्तानी हमले यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि इस्लामाबाद अपने ही पड़ोस में शांति स्थापित करने में विफल रहा है। पाकिस्तान की मनोदशा इससे ही समझी जा सकती है कि जब भारत ने इस हमले के लिए उसकी निंदा की, तब इस्लामाबाद बगैर किसी साक्ष्य के भारत पर ही पाकिस्तान-विरोधी गतिविधियों के समर्थन का आरोप लगाने लगा।

मानवाधिकारों के मोर्चे पर भी देखें, तो पाकिस्तान के अपने रिकॉर्ड पर गंभीर प्रश्नचिह्न दिखते हैं। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में जबरन गुमशुदगियों, अल्पसंख्यकों पर हमलों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ती महंगाई के खिलाफ भी लोग सड़कों पर आए-दिन उतरते रहते हैं। ऐसे में, भारत पर आरोप लगाना पाकिस्तान की तिलमिलाहट को ही अधिक दर्शाता है, जिस पर भारत का यह कहना बिल्कुल वाजिब है कि पाकिस्तान के लिए बेहतर यही होगा कि वह वैश्विक मंचों पर दिखावा करना छोड़, अपने अंदरूनी संकटों पर ध्यान दे।
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