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निचले स्तर पर पाकिस्तान की सियासत, संसद के बाहर ऐसा था नजारा
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पाक संसद (File photo)
सीनेट के चुनाव के दौरान वित्त मंत्री हाफिज शेख की हार पर नेशनल एसेंबली में राजनीतिक अपमान झेलने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने विश्वास मत प्राप्त करने का फैसला किया। इमरान खान को कम से कम उनके पंद्रह सांसदों ने धोखा दिया, लेकिन अंततः वह विश्वास मत हासिल करने में सफल रहे। इससे पहले राजधानी इस्लामाबाद में सीनेट की एक सीट के लिए गुप्त मतदान के जरिये चुनाव हुआ, जिसमें निचले सदन में इमरान खान के अपने सदस्यों ने विपक्षी उम्मीदवार पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को वोट दिया। इमरान खान को मिले इस सबसे गंभीर झटके के कई कारण बताए जाते हैं।
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पहला, हाफिज शेख अमेरिका में रहते हुए विश्व बैक के लिए काम कर रहे थे, जब उन्हें वतन लौटकर वित्त मंत्रालय में विशेष सहयोगी के रूप में काम करने के लिए कहा गया था। मंत्रिमंडल में शामिल लोगों सहित पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के कई सदस्यों ने इस पर नाराजगी जताई थी, क्योंकि पार्टी के किसी व्यक्ति को नामित करने के बजाय एक बाहरी व्यक्ति को बहुत महत्वपूर्ण कैबिनेट सीट दी गई थी। पीटीआई के कई सांसद प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से नाराज थे, क्योंकि उनकी अनदेखी की जा रही थी और कोई बैठक आयोजित नहीं की जा रही थी, जिससे कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा कर सकें।
नहीं भूलना चाहिए कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएलएन) ने एक बार फिर पंजाब में लोकप्रियता हासिल की है, जो उसका मजबूत गढ़ है, क्योंकि पंजाब की पीटीआई सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है। माना जा रहा है कि पीटीआई के जिन पंद्रह सांसदों ने यूसुफ रजा गिलानी को वोट देने का फैसला किया, उन्हें अगले चुनाव में पीएमएलएन से टिकट दिए जाने का आश्वासन दिया गया था। गिलानी बेशक पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सदस्य हैं, पर वह संयुक्त विपक्षी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के संयुक्त उम्मीदवार थे। एक तरफ इमरान खान जहां विश्वास मत जीतने के बाद अपने सदस्यों का शुक्रिया अदा कर रहे थे, वहीं संसद के बाहर बहुत गलत दृश्य देखने को मिल रहा था, जिसमें पीएमएलएन के कुछ सदस्यों ने, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी भी शामिल थे, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था, जिसमें वे इमरान खान और उनकी सरकार की आलोचना कर रहे थे।
पीटीआई समर्थकों की भारी भीड़ अचानक उस क्षेत्र में आ गई, जो रेड जोन का हिस्सा है और जहां भीड़ को प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं है। हैरानी की बात है कि राजधानी की पुलिस भी वहां नदारद थी। पीटीआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे विश्वास मत जीतने का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। जल्दी ही भीड़ ने नारे लगाना और कम संख्या में उपस्थित पीएमएलएन सांसदों को धक्का देना शुरू कर दिया। उनमें मरियम औरंगजेब भी थीं, जो पीएमएलएन की प्रवक्ता हैं। अचानक भीड़ में से किसी ने आकर उन्हें लात मारी, जबकि दूसरे ने उन्हें जोर से धक्का दिया।
गौरतलब है कि इस पर मरियम ने बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं दी और बहादुरी से अपनी जगह पर खड़ी रहीं। लेकिन जब इस बात की जानकारी उनके सहयोगियों को मिली, तो उन्होंने भीड़ में से दो को पकड़ लिया और मारने-पीटने की कोशिश की, लेकिन वे भाग गए। संसद के निचले सदन में चल रही कार्यवाही रोककर अनियंत्रित भीड़ के फुटेज को टीवी पर लाइव दिखाया गया। हर कोई भयभीत था और सबने इस गुंडागर्दी की निंदा की और सोशल मीडिया ने सरकार की आलोचना शुरू कर दी। हैरानी की बात तो यह है कि विपक्षी सदस्यों के वहां से जाने के बाद मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों ने आकर अपने कार्यकर्ताओं को बधाई दी। अफसोसनाक तरीके से यह अब सत्तारूढ़ पीटीआई की संस्कृति ही बन गई है कि उसके कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर पर पीटीआई के ऐसे हजारों अनुयायी हैं, जिनका एकमात्र काम विरोधियों को गाली देना और उन्हें ट्रोल करना है।
पाकिस्तान की सियासत में यह असभ्य संस्कृति नई बात है। पीपीपी जैसी पुरानी पार्टियां हजारों अनुयायियों के साथ रैलियां और विरोध प्रदर्शन करती हैं और यह कहावत प्रसिद्ध हो गई है कि 'पीपीपी की शांतिपूर्ण रैलियों के दौरान किसी पेड़ की एक भी टहनी का नुकसान नहीं हुआ है।' इमरान खान और उनकी पार्टी के करीबी कार्यकर्ताओं ने कुछ साल पहले इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन के दौरान नवाज शरीफ की सरकार के दौरान ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया था, जो आमतौर पर राजनेताओं द्वारा इस्तेमाल नहीं की जाती। इस हफ्ते उनके सूचना मंत्री फराज शिबली ने एक टीवी शो में यह कहकर लोगों को चौंका दिया कि सीनेट के नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए होने वाले चुनाव में पार्टी जीतने के लिए हरसंभव हथकंडे का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने कहा, 'सीनेट अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के लिए हम हर दांव आजमाएंगे। यह संभव नहीं है कि विपक्ष को कानून तोड़ने की अनुमति दी जाए और हम नियम-कानूनों से बंधे रहें। ऐसा नहीं हो सकता कि सरकार ‘शरीफ’ बनकर कानून के मुताबिक हर काम करे।' किसी को याद नहीं होगा कि कभी किसी मौजूदा मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर कानून तोड़ने की बात कही हो।
इमरान खान पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि विपक्षी गठबंधन पीडीएम की लोकप्रियता बढ़ रही है और मौजूदा वित्त मंत्री की हार ने उन्हें और अधिक आत्मविश्वास दिया है। मरियम नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जरदारी, दोनों लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे हैं। पीडीएम ने देश के हर कोने से लांग मार्च का एलान किया है, जिसके तहत वे 26 मार्च को इस्लामाबाद पहुंचेंगे और सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब तक सुरक्षा प्रतिष्ठान (सेना) इमरान खान के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं और उनके समर्थन के कारण इमरान खान ने करीब तीन साल बिता दिए हैं। यह देखना होगा कि सीनेट के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में सुरक्षा प्रतिष्ठान तटस्थ रहता है या सरकार के उम्मीवार की जीत सुनिश्चित कराता है।