अपना घर देखे पाकिस्तान
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पाकिस्तान में इन दिनों बहुत-सी आवाजें सुनाई दे रही हैं कि दूसरे मुल्क में रहने वाले लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय हमें सबसे पहले अपने घर को व्यवस्थित करने का यह सबसे अच्छा समय है। हालांकि नॉन-स्टेट ऐक्टर्स (गैर-सरकारी तत्वों) की अब तक नकेल नहीं कसी जा सकी है और वे न केवल सीमा पर मौत और विध्वंस कर रहे हैं, बल्कि मुल्क के भीतर भी। पंजाबी जेहादी और पाकिस्तान तालिबान ने मुल्क के भीतर इतनी हत्याएं की हैं कि हमने उनकी गिनती छोड़ दी है। उनके निशाने पर शिया और अहमदी मुसलमानों समेत अल्पसंख्यक समुदाय होते हैं।
सीमा पार भी उनके द्वारा अंजाम दी गई वारदातों के सबूत पाए गए हैं, जिनमें से नई दिल्ली के संसद भवन पर आतंकी हमला, मुंबई आंतकी हमला, पठानकोट आतंकी हमला और पाकिस्तानी सेना द्वारा कारगिल पर हमला प्रमुख हैं। पूर्व आर्मी मेजर और अब प्रमुख टिप्पणीकार और विश्लेषक अयाज अमीर, जो नवाज शरीफ की पार्टी से कभी सांसद भी रह चुके हैं, कहते हैं, 'हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान के मुस्लिम जेहादी, कराची के मुस्लिम गिरोह, नवाज शरीफ का घटिया शासन और उनकी सरकार के ऊपर भारी कर्ज है।'
पिछले हफ्ते ठुमके लगाते नजर आए जनरल परवेज मुशर्रफ पीठ दर्द की वजह से मुल्क से बाहर हैं, इसके बावजूद मीडिया के सामने उन्होंने बड़ी बेशर्मी के साथ कहा कि पंजाबी जेहादी पाकिस्तान के लिए रणनीतिक परिसंपत्ति हैं। पंजाब के गृह मंत्री राणा सनानुल्लाह ने, जिनके प्रांत में सबसे ज्यादा पंजाबी जेहादी हैं, जेहादियों को गिरफ्तार करने में अपनी अक्षमता जताई, क्योंकि वे मुल्क की हिफाजत करते हैं। एक समय पाकिस्तान के दिग्गज पुलिस अधिकारी रहे तारिक खोसा ने, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, पिछले हफ्ते टिप्पणी की कि 'कोई भी नॉन-स्टेट ऐक्टर सरकार और कुछ बाहरी तत्वों के प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के बिना नहीं टिक सकता। संस्थाओं को पद और अधिकार की परवाह किए बगैर ऐसे नॉन स्टेट ऐक्टर के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।'
चीन पाकिस्तान का दोस्त है या दुश्मन? उसने फिर से क्यों पंजाबी जेहादी जैश-ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकवादी करार दिए जाने से बचाया? पंजाबी जेहादी पाकिस्तान, अफगान तालिबान, अल कायदा, इस्लामिक स्टेट और असंख्य आतंकी संगठनों के साथ मिलकर काम करता है। इनमें से कुछ को चीन के उत्तरी प्रांत के पहाड़ी इलाकों में शरण मिल गई है, जो पाकिस्तान से सटे होने के साथ ही काराकोरम हाईवे से जुड़ा हुआ है। दशकों से इस्लामवादी चीन के मुस्लिम बहुल इलाकों में घुसपैठ करते रहे हैं और आतंकवादी गतिविधियां चलाते रहे हैं। जैसा कि हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि 'आप सांप को अपने पिछवाड़े में पालकर उससे यह अपेक्षा नहीं कर सकते कि वह आपको नहीं काटेगा।' अफगानिस्तान और अमेरिका ने हक्कानी नेटवर्क को खत्म करने के लिए काफी शोर मचाया, जिन्हें उत्तरी वजीरिस्तान से उखाड़ फेंका गया, पर वे बलूचिस्तान प्रांत में फल-फूल रहे हैं।
पाकिस्तान कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन की दुहाई दे रहा है, लेकिन विशेषज्ञ पाकिस्तान को भी सलाह दे रहे हैं कि वह अपने घर को देखे और अपने उन दोषों को सुधारे, जिसने उसे इस क्षेत्र में इतना अलोकप्रिय बना दिया है। पांच राष्ट्रों की अपील पर सार्क सम्मेलन का स्थगित होना पाकिस्तान के लिए चेतने का मौका होना चाहिए। यदि पाकिस्तान भारत की शिकायत करता है, तो उससे जरूर यह पूछा जाएगा कि बाकी पड़ोसी भी उससे इतनी नफरत क्यों करते हैं। भारत, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान-सबने उड़ी हमले के बाद आतंकवाद के प्रति चिंता जताई और पाकिस्तान की निंदा करते हुए शिकायत की कि माहौल सार्क सम्मेलन आयोजित करने के अनुकूल नहीं है।
इन सभी घटनाओं की पृष्ठभूमि में द डेली टाइम्स ने लिखा कि यह पाकिस्तान के लिए आत्मनिरीक्षण और यह निर्धारित करने का अवसर होना चाहिए कि वह कैसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को पेश करेगा। एयाज अमीर ने सरकार को चेताया कि पाकिस्तान के लिए यह अपने घर को व्यवस्थित करने का वक्त है, भारत से निपटने का नहीं। उन्होंने लिखा है कि वैश्विक मंचों पर धारणाओं का काफी असर पड़ता है और दुर्भाग्य से पाकिस्तान की छवि आतंकवाद के कारण खराब है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उसकी बातें अनसुनी कर दी। उन्होंने सलाह दी कि पाकिस्तान को तत्काल अपनी छवि सुधारने की जरूरत है और यह तब तक नहीं होगा, जब तक कि सरकार गंभीरता से अपनी विदेश नीति नहीं तैयार करेगी, पाकिस्तान के मुद्दों को प्रमुखता से नहीं उठाएगी और अपनी क्षमता और वायदे को ईमानदारीपूर्वक नहीं निभाएगी।
इसी बीच पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर हिज्ब-ए इस्लामी के गुल्बुद्दीन हिकमतयार ने अफगान सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस सौदे को अफगान तालिबान और अन्य आतंकी समूहों को उसी तरह के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए आकर्षित करने रूप में देखा जा रहा है। इससे यह सवाल पैदा होता कि क्यों अमेरिका अपने हित देखकर उन आतंकवादी समूहों से भी आसानी से सौदा कर लेता है, जो उसकी आतंकी सूची में शामिल हैं। अफगान राष्ट्रपति असरफ गनी अब संयुक्त राष्ट्र से कहेंगे कि विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची से हिज्ब-ए इस्लामी को हटा दें और उसके सदस्यों पर लगे तमाम प्रतिबंध उठा लें।
यह बहुत गलत है। ऐसे में, वह दिन दूर नहीं, जब अमेरिका भी संयुक्त राष्ट्र की सूची से हक्कानी नेटवर्क का नाम हटा लेगा और यहां तक कि शीघ्र ही पंजाबी जेहादी संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्दोष साबित हो जाएंगे। क्या इससे पाकिस्तान और इस क्षेत्र में आतंकवाद को खत्म करने में मदद मिलेगी? निश्चित रूप से नहीं।
पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार