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पाकिस्तान भी जूझ रहा है शराब से

Tue, 16 May 2017 07:55 PM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Tue, 16 May 2017 07:55 PM IST
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Pakistan is also fighting with alcohol
कुलदीप तलवार

पाकिस्तान में इन दिनों जहरीली शराब पीने से मरने वालों का सिलसिला जारी है। एक के बाद एक ऐसी दर्दनाक घटनाएं हो रही हैं। हाल ही में टोबा टेक सिंह इलाके में जहरीली शराब पीने से ईसाई बिरादरी के कम से कम 39 लोग अपनी जान गंवा बैठे। ये लोग जहरीली शराब पीकर जश्न मना रहे थे। जो शराब पीकर घर चले गए, वे सोकर नहीं उठ सके। पेशावर शहर में भी जहरीली शराब पीने से पांच लोगों के मरने की खबर है। इस घटना में भी मरने वालों का संबंध ईसाई बिरादरी से था। जब किसी घर का मुखिया शराब का आदी हो जाता है, तो उस घर के तमाम सदस्यों का जीना हराम हो जाता है। लेकिन यह जानते हुए भी शराब पीने वाला शराब से परहेज नहीं करता।

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इस्लामी प्रजातांत्रिक देश पाकिस्तान में शराब पीने पर पाबंदी है। लेकिन यह पाबंदी अल्पसंख्यक ईसाइयों व हिंदुओं पर लागू नहीं होती। ये लोग परमिट पर लाइसेंसधारी शराब की दुकान से अंग्रेजी शराब खरीद सकते हैं। अमीर मुसलमान ईसाईयों व हिंदुओं से परमिट खरीद कर शराब खरीदते हैं। आमतौर से दुकानदार इस बात की पूछताछ नहीं करते कि परमिट लेकर आने वाला व्यक्ति ईसाई है या हिंदू या मुसलमान है। उसको तो शराब बेचनी है और पैसा कमाना है। शराब की दुकानों के आस-पास तैनात पुलिस भी खरीदार से नहीं पूछती कि वह कौन है। दुकानदार ने पहले ही भत्ता देकर पुलिस को खुश रखता है। जब जुल्फिकार भुट्टो ने शराब पर पाबंदी लगाई थी, तो उस समय अमीर लोग ही अंग्रेजी शराब खरीदते थे। हालात ने कुछ ऐसी करवट ली कि सरकार ने दुकानदारों को बेचने के लाइसेंस देने शुरू कर दिए। इससे सरकार को करोड़ों की आमदनी होने लगी। लेकिन इस बात का खुलासा नहीं किया गया। इसलिए यह कहा गया कि ये दुकानें गैर-मुसलमानों यानी ईसाई व हिंदुओं को शराब बेच सकती हैं। लेकिन शराब खरीदने वालों को परमिट दिखाना जरूरी होगा।
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इस घोषणा के बाद मुसलमान शराबियों ने खुदा का शुक्र अदा किया और गैर-मुसलमानों यानी ईसाइयों व हिंदुओं के भी मजे आ गए। इसलिए कि उन्होंने अपना परमिट मुसलमानों के हाथ बेचना शुरू कर दिया। इस तरह से दोनों को फायदा मिलना शुरू हुआ और सरकार को भी टैक्स की शक्ल में फायदा होने लगा।
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शराब जैसे-जैसे मंहगी होती जा रही है, वैसे-वैसे शहरों की गरीब बस्तियों में कच्ची शराब की भट्ठियां भी बढ़ती जा रही हैं। अवैध शराब के कारोबार को खुली छूट मिली हुई है। कभी-कभी छापे भी पड़ते हैं, लेकिन जहरीली शराब बनाने वाले और बेचने वाले पकड़े नहीं जाते। पकड़े जाने पर रिश्वत देकर छूट जाते हैं और नए सिरे से यह धंधा किसी दूसरे इलाके में शुरू कर देते हैं। ऐसा धंधा करने वालों को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है।

 
पाकिस्तान में ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जिनका मानना है कि इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने के लिए सरकार कोई कारगर रणनीति बनाए। कुछ सामाजिक संगठनों व मजहबी पार्टियों ने पाक सरकार से मांग की है कि पाकिस्तान में पूरी तरह शराबबंदी लागू की जाए। शराब की इस्लाम और पवित्र पुस्तकों व कुरान शरीफ में कोई जगह नहीं। शराब की दुकानों के लाइसेंस रद्द होने चाहिए। सरकार को ऐसा करने से राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए सुझाव दिया जा रहा है कि इस घाटे को पूरा करने के लिए राजस्व के अलग-अलग स्रोत ढूंढने चाहिए। वर्ना इस सामाजिक बुराई का खात्मा कभी नहीं होने वाला और लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।

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