फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   P Chidambaram criticized PM Modi, know what he said

एक 'मजबूत' नेता क्यों बोलेंगे झूठ!

Sun, 12 May 2024 07:29 AM IST
Palaniappan Chidambram पी. चिदंबरम
Updated Sun, 12 May 2024 07:29 AM IST
विज्ञापन
सार
जिस प्रधानमंत्री को 370 या 400 से ज्यादा सीटें जीतने का भरोसा था, वह अपने विरोधियों के बारे में इतनी लापरवाही से झूठ नहीं बोलेगा। झूठ को लड़ाई का एक मुख्य हथियार बनाना पीएम मोदी का रिकॉर्ड नहीं है। यह एक रहस्य है, जिसे सुलझाया जाना चाहिए।
loader
P Chidambaram criticized PM Modi, know what he said
पी चिदंबरम - फोटो : X ANI @PChidambaram_IN

विस्तार

माननीय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी हमेशा खुद को एक मजबूत नेता के रूप में पेश करते हैं। वह अक्सर 56 इंच की छाती की बात करते हैं। उनके अनुयायी विरोध करने वाले पर लगाम लगाने, शहरी नक्सल को उखाड़ फेंकने, टुकड़े-टुकड़े गैंग को खत्म करने, पाकिस्तान को सबक सिखाने, अंग्रेजी को सहयोगी आधिकारिक भाषा की स्थिति से हटाने, मुख्यधारा की मीडिया को अपने इशारे पर नचाने और भारत को विश्वगुरु बनाने के उनके प्रयासों को अक्सर रेखांकित करते हैं।



जब एक मजबूत नेता, जिसके पास 330 सीटें लाने का अनुभव हो और जिसके 12 मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों में प्रचार की कमान संभाले हुए हों, ऐसे में तो भारतीय जनता पार्टी के लिए 370 और एनडीए के लिए 400 पार की ओर बढ़ना और आसान हो जाना चाहिए। हालांकि भाजपा के नेता निजी तौर पर इस बात को स्वीकार करते हैं कि 370 या 400 से ज्यादा सीटें अब हासिल करना संभव नहीं दिखता। वे तो इस बात से ही खुश हो जाएंगे कि भारतीय जनता पार्टी साधारण बहुमत से ही जीत जाए।

 
चाल क्यों बदली ?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत बहुत ही विश्वास और दृढ़ता के साथ की। कांग्रेस का घोषणा पत्र 5 अप्रैल, 2024 को जारी किया गया था, जिसे पीएम मोदी ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। भाजपा का घोषणापत्र 14 अप्रैल को जारी किया गया था, लेकिन इसमें निहित बातों के प्रचार की कोई कोशिश नहीं की गई। घोषणा पत्र का नाम ही 'मोदी की गारंटी' था। अपने घोषणापत्र की बातों को नजरअंदाज करते हुए मोदी ने जब भी किसी रैली में कोई बयान दिया, उसके साथ यह भी कहा कि 'यह मोदी की गारंटी है।' मैं मोदी की गारंटियों की संख्या गिनना भूल गया हूं। हालांकि, जो बात निकलकर सामने आई, वह यह है कि पीएम मोदी ने आम लोगों की सबसे बड़ी परेशानी कि बेरोजगारों के लिए 'रोजगार कैसे पैदा होंगे' या 'महंगाई कैसे कम होगी', इस पर कोई गारंटी नहीं दी। उन्होंने जानबूझकर सांप्रदायिक सौहार्द, विकास, कृषि संकट, बहुआयामी गरीबी, वित्तीय स्थिरता, राष्ट्रीय ऋण, घरेलू ऋण, शैक्षिक मानक, स्वास्थ्य व्यवस्था, चीन द्वारा भारतीय जमीन पर कब्जा करने के अलावा, अन्य दूसरे गंभीर मुद्दों के बारे में कोई बात नहीं की। 

19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के तहत 102 सीटों के लिए मतदान हुए। मतदान में थोड़ी गिरावट देखकर संभवत: इसलिए 21 अप्रैल को पीएम मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में हुई रैली में कांग्रेस पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि "कांग्रेस वामपंथी और शहरी नक्सल के चंगुल में फंस गई है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में जो बातें कहीं वह भी काफी गंभीर और चिंताजनक है।  कांग्रेस का कहना है कि अगर उनकी सरकार बनी तो हर व्यक्ति की संपत्ति का सर्वे कराया जाएगा। इस बात की भी जांच की जाएगी कि हमारी बहनों के पास कितना सोना है, सरकारी कर्मचारियों के पास कितना पैसा है?  उन्होंने यह भी कहा कि "हमारी बहनों के पास मौजूद स्वर्ण आभूषणों को समान रूप से वितरित किया जाएगा। क्या सरकार को आपकी संपत्ति लेने का अधिकार है?" हम सिर्फ इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि हो सकता है कि 19 से 21 अप्रैल के बीच पीएम मोदी को कोई खुफिया जानकारी मिली हो, जिसने उन्हें अपनी चाल बदलने पर मजबूर कर दिया।

झूठ पर झूठ क्यों?
ऊपर दिए गए इस अंश में जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे झूठे हैं।  जैसे-जैसे दिन बीतते गए, झूठ बड़ा और अधिक अपमानजनक होता गया। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस संपत्ति से लेकर सोने, मंगलसूत्र और स्त्री धन से लेकर मकान तक, सब जब्त कर लेगी और  उसे अधिक बच्चे पैदा करने वाले मुसलमानों और घुसपैठियों के बीच बांट देगी।   एक अन्य रैली में, वे 'धर्म-आधारित आरक्षण' और 'विरासत कर' पर कूद पड़े। झूठ बोलने का कोई अंत नहीं था। इन बातों के तात्कालिक उद्देश्य स्पष्ट थे। यह सब मुस्लिमों की छवि खराब करने और मतदान का ध्रुवीकरण करने और हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने के लिए था।

प्रधानमंत्री द्वारा झूठ बोला गया, यह सोचने की बात है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री इस तरह के झूठ बोल क्यों रहे हैं? गौरतलब कि यह कोई एक झूठ नहीं है, झूठ की पूरी श्ृंखला है और लगातार जारी है। जिस प्रधानमंत्री को 370 या 400 से ज्यादा सीटें जीतने का भरोसा था, वह अपने विरोधियों के बारे में इतनी लापरवाही से झूठ नहीं बोलेगा! वह विपक्षी दलों को अपने सबूत के साथ बहस में शामिल होने की चुनौती देंगे। झूठ को लड़ाई का एक मुख्य हथियार बनाना, पीएम मोदी का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक रहस्य है, जिसे सुलझाया जाना है।

आत्म संदेह क्यों ?
ऐसा लगता है कि पीएम मोदी को ईवीएम में बंद रहस्यों का पता था। उनकी चिंता के कई कारण हो सकते हैं, क्योंकि इस बार जमीनी हालात 2019 की स्थिति से बहुत अलग हैं। सबसे पहली बात, पीएम मोदी चुनाव का नैरेटिव तय करने में सक्षम नहीं हैं। वह बहस की शुरुआत करने के बजाय कांग्रेस के घोषणापत्र पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, भले ही वह मनगढ़ंत हों। दूसरी बात, उनके वादे, कांग्रेस के वादों के सामने कमजोर पड़ रहे हैं। तीसरी बात, लोग भाजपा के थकाऊ नारों से नाराज हैं। प्रधानमंत्री मोदी 'अच्छे दिन आने वाले हैं' जैसा कोई नया नारा गढ़ने में असमर्थ हैं। चौथी बात हो सकती है, कम मतदान प्रतिशत ने उनकी चिंता बढ़ा दी हो, क्योंकि यह इस बात का संकेत हो सकता है कि भाजपा के कट्टर मतदाता मतदान केंद्रों पर आए ही नहीं। बूथों पर आरएसएस स्वयंसेवकों की गैरमौजूदगी और उनके शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी ने भाजपा खेमे में खतरे की घंटी बजा दी होगी। ऐसा हो सकता है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों को ज्यादा फायदा हो। क्या इस तरह का 'लाभ' भाजपा के 'बड़ी हानि' होगी, यह लाख टके का सवाल है। यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री मोदी इस पर अब अधिक यथार्थवादी दृष्टिकोण साझा करें, क्योंकि  2024 का चुनाव सभी राज्यों में, अपवाद स्वरूप गुजरात को छोड़कर, विजेता का चुनाव नहीं है। पीएम मोदी ने यह निष्कर्ष निकाला होगा कि छद्म लाभ की जगह कुल हानि को गिनना चाहिए। शायद इसी बात ने उन्हें चिंता में डाल दिया होगा और उनके मुंह से झूठ निकलता जा रहा हो। मैं इसका अनुमान नहीं लगा सकता हूं कि लोग किस तरह से मतदान करेंगे, लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि लोग मोदी के झूठ को समझ सकते हैं। शायद वे यह भी सोच रहे होंगे कि एक 'मजबूत' नेता को झूठ क्यों बोलना चाहिए? 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed